Rahul Gandhi: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को उनकी याचिका खारिज करते हुए 2019 में जारी हुए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया। यह समन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मानहानि की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने पीएम मोदी को “कमांडर-इन-थीफ” यानी चोरों का कमांडर कहा था। जस्टिस एन.आर. बोरकर की सिंगल बेंच ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में किसी तरह की खामी न मिलने की बात कहते हुए गांधी की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि राहत की बात यह रही कि हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में सुनवाई टालने का अपना पुराना आदेश जारी रखा है, ताकि कांग्रेस नेता इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकें।
Rahul Gandhi: हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की राहुल गांधी की याचिका
जस्टिस एन.आर. बोरकर की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश में कोई खराबी या गैर-कानूनी बात नहीं पाई गई, इसलिए इसमें दखल देने की कोई वजह नहीं बनती। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उसे मजिस्ट्रेट के फैसले में कोई कमी नजर नहीं आई, इसी वजह से याचिका को खारिज किया जा रहा है। यह फैसला राहुल गांधी की उस याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त 2019 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।
2018 में राफेल डील पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद 2018 में राफेल फाइटर जेट डील से जुड़ा हुआ है, जब राहुल गांधी ने पीएम मोदी के खिलाफ “कमांडर-इन-थीफ” वाली टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता एम.एच. श्रीश्रीमाल ने खुद को सत्ताधारी भाजपा का सदस्य बताते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक भाषण में प्रधानमंत्री की बदनामी की थी। शिकायत के अनुसार गांधी ने रैली में की गई टिप्पणी के अलावा अपने एक्स अकाउंट पर भी एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को इसी तरह के शब्दों से संबोधित किया।
शिकायतकर्ता का दावा, बीजेपी सदस्यों पर लगा चोरी का आरोप
शिकायतकर्ता श्रीश्रीमाल के मुताबिक राहुल गांधी की इन टिप्पणियों का मतलब भाजपा के सभी सदस्यों और प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे तौर पर चोरी का आरोप लगाना था। इसी आधार पर उन्होंने गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद अगस्त 2019 में कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया था। श्रीश्रीमाल ने हाईकोर्ट में भी राहुल गांधी की याचिका का पुरजोर विरोध किया और मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराने की दलील दी।
Rahul Gandhi: राहुल गांधी के वकीलों ने उठाए थे ये तर्क
राहुल गांधी की ओर से पेश वकील सुदीप पसबोला और एडवोकेट कुशल मोर ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि यह शिकायत पूरी तरह बेबुनियाद है और शिकायतकर्ता के पास इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार यानी लोकस स्टैंडाई नहीं था। उनका कहना था कि शिकायतकर्ता खुद पीड़ित पक्ष नहीं है, इसलिए वह इस तरह की शिकायत दर्ज ही नहीं करा सकता। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 में मजिस्ट्रेट को इस मानहानि मामले की सुनवाई टालने का निर्देश दिया था, जिसकी वजह से राहुल गांधी को अब तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने की जरूरत नहीं पड़ी थी। मंगलवार के ताजा फैसले में भी हाईकोर्ट ने अपना यह पुराना आदेश जारी रखते हुए सुनवाई को छह हफ्तों के लिए और टाल दिया है, ताकि कांग्रेस नेता चाहें तो इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी के लिए यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उनके सामने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला है। यह मामला 2018 से चली आ रही राजनीतिक बयानबाजी और मानहानि से जुड़े कानूनी विवादों का एक अहम उदाहरण भी बन गया है, जिस पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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