Rajasthan Politics: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने, बागियों का समर्थन करने या अपने परिजनों को मैदान में उतारने वाले 41 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
सबसे ज्यादा असर राजधानी जयपुर पर पड़ा है, जहां अकेले 26 नेताओं पर यह कार्रवाई हुई है। पार्टी का कहना है कि अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम करना संगठन विरोधी गतिविधि है। प्रदेश के 309 निकायों में 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में मतदान होना है।
Rajasthan Politics: जयपुर से निकाले गए नेताओं के नाम
जयपुर से निष्कासित 26 लोगों में मोहनलाल कुमावत, छीतरमल शर्मा, नेमीचंद सैन, हरिशंकर बोहरा, दिनेश कांवट और चंदा कुमावत शामिल हैं। कमलेश तिवारी, बनवारी सैनी, महर्षि शर्मा, पंकज गोयल, राजेश सालोदिया और नारायण सोनी भी इस सूची में हैं। समा राठौड़, राजू अग्रवाल, जय वशिष्ठ, शंकर शर्मा, रमेश चंद्र सैनी, स्वाति परनामी और मुकेश किराड़ के नाम भी सामने आए हैं। बीना मेठी, नरेश शर्मा, विश्व सिंह तंवर, शिव सोनी, बरखा सैनी और अविनाश सैनी को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर किया गया है।
राजसमंद में अलग-अलग समीकरण
राजसमंद के वार्ड 22 में आम आदमी पार्टी से निष्कासित अमित वर्मा का मामला चर्चा में है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें छह साल के लिए निकाला गया था। अब उनके दो अलग-अलग वीडियो वायरल हो रहे हैं। एक में वे भाजपा को समर्थन देने की बात कहते दिखते हैं। दूसरे में उन्होंने दबाव में बयान देने का आरोप लगाया है। उनकी पत्नी ने भी आम आदमी पार्टी पर कई आरोप लगाए हैं। इससे स्थानीय विवाद और बढ़ा है।
Rajasthan Politics: धोइंदा वार्ड में समर्थन का एलान
राजसमंद के धोइंदा वार्ड 9 में निर्दलीय उम्मीदवार भरत कुमार ने भाजपा प्रत्याशी चंपालाल कुमावत को खुला समर्थन देने की घोषणा की है। इस फैसले से स्थानीय चुनावी समीकरण बदलते दिख रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। मतदाता इस समर्थन का कितना असर देखते हैं, यह मतदान के दिन पता चलेगा। स्थानीय स्तर पर यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
Rajasthan Politics: दो चरणों में मतदान और सूखा दिवस
प्रदेश में कुल 309 निकायों के चुनाव दो चरणों में होंगे। पहला चरण 9 सितंबर और दूसरा चरण 11 सितंबर को है। निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासन ने मतदान से पहले 48 घंटे का सूखा दिवस घोषित किया है। पहले चरण के लिए 7 सितंबर शाम छह बजे से 9 सितंबर शाम छह बजे तक शराब बिक्री पर रोक रहेगी। दूसरे चरण के लिए 9 सितंबर शाम छह बजे से 11 सितंबर शाम छह बजे तक प्रतिबंध लागू रहेगा।
मतगणना के दिन भी प्रतिबंध
14 सितंबर को मतगणना होनी है। उस दिन भी पूरे प्रदेश में सूखा दिवस रहेगा। प्रशासन का लक्ष्य शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराना है। शराब बिक्री पर यह रोक चुनावी माहौल को नियंत्रित रखने के लिए लगाई गई है। पार्टियां अपने प्रचार को अंतिम चरण में ले जा रही हैं। बागी नेताओं के निष्कासन के बाद संगठन स्तर पर अनुशासन की चर्चा तेज हो गई है।
Rajasthan Politics: पार्टी अनुशासन पर जोर
भाजपा का स्पष्ट रुख है कि अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ कोई गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निष्कासन की यह कार्रवाई चुनावी सरगर्मी के बीच आई है। जयपुर में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के बाहर होने से स्थानीय इकाई पर असर पड़ सकता है। बाकी जिलों में भी पार्टी इसी तर्ज पर नजर रख रही है। चुनाव नजदीक होने के कारण हर कदम की चर्चा हो रही है। मतदाता अब मैदान में उतरने वाले चेहरों को देख रहे हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव में यह कार्रवाई अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। जयपुर समेत कई जगहों पर बागी नेताओं के निकलने से समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। राजसमंद जैसे इलाकों में समर्थन और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। दो चरणों का मतदान और सूखा दिवस प्रशासन की तैयारियों को दिखाते हैं। पार्टियां अब बूथ स्तर पर सक्रिय हैं। अंतिम नतीजे 14 सितंबर की गिनती के बाद सामने आएंगे। युवा और स्थानीय मतदाता इन घटनाओं को ध्यान से देख रहे हैं।
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