Uttarakhand News: उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर प्रशासन की कार्रवाई के बाद 107 संस्थान बंद हो गए हैं। इनमें सबसे अधिक 102 मदरसे हरिद्वार जिले के हैं। ऊधमसिंह नगर में पांच मदरसे बंद बताए गए हैं।
हरिद्वार के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्र प्रकाश रावत ने मंगलवार को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में 76 मदरसों ने मान्यता के लिए शिक्षा विभाग में आवेदन किया है और मामला विचाराधीन है।
45 मदरसे विभाग में पंजीकृत हैं जबकि 46 का निरीक्षण बाकी है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जांच अभियान चल रहा है। बिना मान्यता वाले कई मदरसे स्वयं बंद हो गए हैं और अभियान जारी रहेगा।
Uttarakhand News: हरिद्वार से आई ताजा आधिकारिक रिपोर्ट
चंद्र प्रकाश रावत ने प्राधिकरण को जिले की स्थिति विस्तार से बताई है। उनके अनुसार 102 मदरसे अब बंद हो चुके हैं। मान्यता के लिए 76 आवेदन शिक्षा विभाग के पास लंबित हैं। पंजीकृत मदरसों की संख्या 45 बताई गई है। बाकी 46 संस्थानों का निरीक्षण अभी पूरा नहीं हुआ है। यह आंकड़ा सात सितंबर के बाद भेजी गई रिपोर्ट का हिस्सा है।
ऊधमसिंह नगर की स्थिति अलग है
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के मुताबिक ऊधमसिंह नगर में 119 मदरसे हैं। इनमें से अब तक पांच बंद हो चुके हैं। साठ मदरसों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए अभी आवेदन नहीं किया है। बाकी संस्थानों की स्थिति अलग-अलग चरण में है। जिले का आंकड़ा हरिद्वार के मुकाबले अलग तस्वीर दिखाता है। आवेदन न करने वाले संस्थानों पर आगे कार्रवाई संभव है।
Uttarakhand News: नैनीताल और पहाड़ी जिलों के आंकड़े
नैनीताल जिले में 18 मदरसे बताए गए हैं। इनमें से 12 ने मान्यता के लिए आवेदन कर दिया है। पिथौरागढ़ में एक और चंपावत में दो मदरसे हैं। प्राधिकरण के अध्यक्ष के अनुसार इन दोनों जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों की रिपोर्ट अभी नहीं पहुंची है। पहाड़ी जिलों की संख्या मैदानी इलाकों से काफी कम है। रिपोर्ट आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी।
पुराने मदरसा बोर्ड के पंजीकरण का रिकॉर्ड
मदरसा बोर्ड खत्म होने से पहले कई जिले बोर्ड से जुड़े थे। देहरादून में 41, नैनीताल में 18 और अल्मोड़ा में एक मदरसा दर्ज था। पिथौरागढ़ में एक, हरिद्वार में 270, ऊधमसिंह नगर में 119 और चंपावत में दो संस्थान तहतानिया से आलिम तक की मान्यता लिए हुए थे। बोर्ड समाप्त होने के बाद नया ढांचा प्राधिकरण और शिक्षा विभाग के पास है। बिना पंजीकृत मदरसों की पूरी सूची विभाग के पास नहीं बताई गई है।
Uttarakhand News: मान्यता के लिए आवेदन और निरीक्षण प्रक्रिया
हरिद्वार में 76 आवेदन विचाराधीन हैं। शिक्षा विभाग पंजीकरण और मानकों की जांच करता है। 46 मदरसों का निरीक्षण बाकी है। जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक उनकी वैध स्थिति अधूरी मानी जाएगी। अन्य जिलों में आवेदन न करने वाले संस्थानों पर प्रशासन नजर रखे हुए है। प्रक्रिया पूरी होने पर आंकड़े और बदल सकते हैं।
सरकार के निर्देश और चल रहा अभियान
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद मदरसों की जांच का अभियान तेज हुआ है। बिना मान्यता चल रहे कई संस्थान खुद बंद हो गए। प्राधिकरण का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन दस्तावेज, संचालन और मानकों की पड़ताल कर रहा है। सख्ती का असर बंद संस्थानों की संख्या में दिख रहा है।
जिलेवार अंतर क्यों दिख रहा है
हरिद्वार में बंद मदरसों की संख्या सबसे अधिक है। ऊधमसिंह नगर में कुल संस्थान ज्यादा हैं लेकिन बंद होने वाले कम बताए गए हैं। नैनीताल में अधिकांश ने आवेदन कर दिया है। पिथौरागढ़ और चंपावत की रिपोर्ट अभी शेष है। मैदानी जिलों में संस्थानों की घनी संख्या के कारण आंकड़ा बड़ा है। पहाड़ी क्षेत्रों में संख्या सीमित है।
Uttarakhand News: बोर्ड समाप्ति के बाद नया ढांचा
पहले मदरसा बोर्ड मान्यता देता था। बोर्ड खत्म होने के बाद राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और शिक्षा विभाग यह काम देख रहे हैं। पुराने पंजीकृत संस्थानों का रिकॉर्ड अलग है। बिना पंजीकरण वाले मदरसों की पूरी रिपोर्ट विभाग के पास उपलब्ध नहीं बताई गई। नई व्यवस्था में आवेदन और निरीक्षण अनिवार्य हो गया है। जो संस्थान प्रक्रिया से बाहर हैं वे बंद श्रेणी में आ रहे हैं।
उत्तराखंड में बिना मान्यता वाले 107 मदरसे बंद हो चुके हैं और हरिद्वार अकेले 102 मामलों के साथ सबसे आगे है। ऊधमसिंह नगर में पांच बंद हुए हैं जबकि साठ ने अभी आवेदन नहीं किया। नैनीताल में 12 आवेदन दर्ज हैं और दो पहाड़ी जिलों की रिपोर्ट बाकी है। हरिद्वार में 76 आवेदन विचाराधीन हैं तथा 46 का निरीक्षण शेष है।
प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर अभियान चल रहा है और आगे भी जारी रहेगा। पुराने मदरसा बोर्ड के आंकड़े अलग हैं और बिना पंजीकृत संस्थानों की पूरी सूची अभी अधूरी है। आगे निरीक्षण और आवेदनों के निपटारे से स्थिति और स्पष्ट होगी।
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