Genz Driving Skill: नई पीढ़ी यानी जन जेड ऑटोमैटिक कारों के साथ पली-बढ़ी है। ढलान पर गाड़ी बंद होने जैसे सवाल पर कई युवा यही कहते हैं कि ऑटोमैटिक होती तो झंझट ही न होता। Extreme Terrain के जुलाई 2026 सर्वे में अमेरिका के 1006 ड्राइवर शामिल हुए।
नतीजे बताते हैं कि 35 प्रतिशत जन जेड ड्राइवरों ने जीवन में कभी क्लच-गियर वाली मैनुअल कार चलाना सीखा ही नहीं। बेबी बूमर्स में यह आंकड़ा सिर्फ 9 प्रतिशत है। तीस साल से कम उम्र के केवल 58 प्रतिशत युवा मैनुअल चलाने का पूरा भरोसा रखते हैं जबकि 91 प्रतिशत बेबी बूमर्स आत्मविश्वास के साथ चला सकते हैं।
पुरानी पीढ़ी के 55 प्रतिशत लोगों ने जरूरत से सीखा। जन जेड के 55 प्रतिशत ने शौक के लिए सीखा। 56 प्रतिशत युवा अब भी कहते हैं काश उन्होंने मैनुअल चलाना सीख लिया होता। जो जानते हैं उनमें 64 प्रतिशत इसे कभी-कभार ही चलाते हैं। ईवी बढ़ने से 55 प्रतिशत मानते हैं कि मैनुअल ट्रांसमिशन खत्म हो जाएगा। 1980 में मैनुअल बिक्री 35 प्रतिशत थी जो 2025 मॉडल में 0.6 प्रतिशत रह गई।
Genz Driving Skill: सर्वे में पीढ़ियों का कितना अंतर निकला
बेबी बूमर्स मैनुअल पर सबसे अधिक भरोसा रखते हैं। जन जेड में आत्मविश्वास काफी कम है। एक पीढ़ी ने मजबूरी में सीखा तो दूसरी ने दिलचस्पी से। फिर भी युवाओं का बड़ा हिस्सा अब भी इस स्किल को अधूरा मानता है। आंकड़े साफ बताते हैं कि आदत और जरूरत दोनों बदल चुकी हैं।
क्यों घट रहा है मैनुअल चलाने का भरोसा
क्लच, गियर, एक्सेलेरेटर और स्टीयरिंग का साथ-साथ तालमेल नए ड्राइवर को भारी लगता है। विशेषज्ञ इसे मल्टीटास्किंग वाला काम मानते हैं। ऑटोमैटिक में यह झंझट नहीं रहती इसलिए अभ्यास कम होता है। कम अभ्यास से आत्मविश्वास और गिरता है। ढलान या ट्रैफिक जैसे मौके और डराते हैं।
Genz Driving Skill: सीखने की वजह दोनों पीढ़ियों में अलग
पुरानी पीढ़ी के लिए मैनुअल अक्सर एकमात्र विकल्प था। इसलिए 55 प्रतिशत ने जरूरत से सीखा। जन जेड के 55 प्रतिशत ने इसे पसंद या शौक बताया। विकल्प बढ़ने से मजबूरी घटी है। शौक से सीखने वाले भी रोज इस्तेमाल कम करते हैं। स्किल रह तो गई है लेकिन आदत नहीं बनी।
जो जानते हैं वे भी कम चलाते हैं
मैनुअल चलाना जानने वालों में 64 प्रतिशत इसे कभी-कभार ही छूते हैं। रोजमर्रा की गाड़ी ऑटोमैटिक हो चुकी है। स्किल रखने और नियमित इस्तेमाल में फर्क साफ है। अभ्यास छूटे तो ढलान या अचानक स्थिति में हाथ कांप सकते हैं। सर्वे इसी दूरी को रेखांकित करता है।

Genz Driving Skill: डेटिंग में भी दिखता है असर
43 प्रतिशत लोगों को पार्टनर का मैनुअल चलाना अधिक आकर्षक लगता है। 40 प्रतिशत डेटिंग प्रोफाइल में यह स्किल देखकर प्रभावित होते हैं। पुरानी स्किल अब व्यक्तित्व का हिस्सा मानी जा रही है। यह आंकड़ा ड्राइविंग को सिर्फ तकनीक नहीं सामाजिक छवि से भी जोड़ता है। युवाओं में कमी के बावजूद आकर्षण बचा हुआ है।
पीढ़ियों की उम्र का हिसाब
2026 में जन जेड की उम्र roughly 14 से 29 वर्ष है। मिलेनियल्स 30 से 45, जनरेशन एक्स 46 से 61 और बेबी बूमर्स 62 से 80 वर्ष के हैं। सर्वे मुख्य रूप से ड्राइविंग आयु वर्ग पर केंद्रित रहा। उम्र के साथ अनुभव और विकल्प दोनों बदलते गए। यही अंतर आंकड़ों में उतर आया।
ईवी के दौर में मैनुअल का भविष्य
55 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि इलेक्ट्रिक कारें मैनुअल गियर को समाप्त कर देंगी। ईवी में पारंपरिक क्लच-गियर की जरूरत नहीं रहती। बिक्री के पुराने आंकड़े भी गिरावट दिखाते हैं। 1980 की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी 2025 में 0.6 प्रतिशत रह गई। बाजार खुद दिशा बदल चुका है।
Genz Driving Skill: क्या युवा अब भी सीखना चाहते हैं
56 प्रतिशत जन जेड मानते हैं कि मैनुअल सीख लेना अच्छा होता। इच्छा बाकी है लेकिन मौका और अभ्यास कम हैं। ऑटोमैटिक और ईवी के बीच यह इच्छा शौक बनकर रह सकती है। कुछ इसे चुनौती की तरह लेना चाहते हैं। सर्वे बताता है कि पूरी तरह दिलचस्पी खत्म नहीं हुई है।
जन जेड का बड़ा हिस्सा मैनुअल कार से दूर होता जा रहा है। Extreme Terrain के 1006 ड्राइवरों वाले सर्वे में 35 प्रतिशत युवाओं ने कभी क्लच-गियर नहीं चलाया जबकि बेबी बूमर्स में यह आंकड़ा 9 प्रतिशत है। आत्मविश्वास 91 प्रतिशत से गिरकर 58 प्रतिशत रह गया है।
जो जानते हैं उनमें अधिकतर कभी-कभार ही चलाते हैं। डेटिंग में यह स्किल अभी आकर्षक मानी जाती है। ईवी के विस्तार और बिक्री के 0.6 प्रतिशत रह जाने से मैनुअल का भविष्य सीमित दिखता है। फिर भी आधे से अधिक युवा कहते हैं काश उन्होंने सीख लिया होता। स्किल अब जरूरत से ज्यादा पसंद और पहचान का विषय बन गई है।
Read More Here
- Zomato Boycott In Jaipur: जयपुर की 60 से ज्यादा मिठाई दुकानों ने जोमैटो का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया
- Uttarakhand News: उत्तराखंड में बिना मान्यता के चल रहे 107 मदरसे बंद, हरिद्वार में सबसे ज्यादा 102 पर ताले
- Student Protest 2026: छात्र आंदोलन से निपटने के भारत के तरीके की संयुक्त राष्ट्र ने की तारीफ, पाकिस्तान-चीन को दी नसीहत
- Bihar Flood: बिहार में बाढ़ ने रोकी बच्चों की पढ़ाई, कहीं डूबे स्कूल तो कहीं रास्तों में फंसी शिक्षा

