Bihar Police Promotion: बिहार पुलिस महकमे से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें राज्य के 6800 सहायक अवर निरीक्षकों यानी एएसआई को पुलिस अवर निरीक्षक यानी दारोगा के पद पर प्रोन्नति दे दी गई है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने सोमवार को देर रात इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की, जिसके बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। यह प्रोन्नति एक सितंबर और उसके बाद हुई केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठकों में लिए गए फैसलों के आधार पर दी गई है। खास बात यह है कि प्रोन्नति पाने वालों में बड़ी संख्या ऐसे पुलिसकर्मियों की भी है, जिनकी नियुक्ति मूल रूप से सिपाही के पद पर हुई थी और वे वर्षों की सेवा के बाद अब दारोगा के पद तक पहुंचे हैं। इनमें कई पुलिसकर्मी 1990 से पहले नियुक्त हुए बताए जा रहे हैं। मुख्यालय के इस फैसले को थानों में लंबित मामलों के निपटारे और पुलिसिंग व्यवस्था सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
Bihar Police Promotion: 6800 एएसआई की हुई प्रोन्नति
बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक कुल 6800 सहायक अवर निरीक्षकों को दारोगा पद पर प्रोन्नत किया गया है। यह फैसला केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठकों में हुई समीक्षा के बाद लिया गया। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ प्रोन्नति मिलना बिहार पुलिस के इतिहास में उल्लेखनीय घटनाक्रम माना जा रहा है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दारोगा कोटि में यह प्रोन्नति फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार के रूप में दी गई है। इसके साथ ही संबंधित पदाधिकारियों को दारोगा के वेतनमान के अनुसार आर्थिक लाभ भी मिलेगा। यह लाभ उसी तारीख से देय होगा, जिस दिन संबंधित अधिकारी दारोगा का पदभार औपचारिक रूप से ग्रहण करेंगे।
पुराने सिपाहियों को मिला वरिष्ठता का फल
प्रोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों में एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिनकी नियुक्ति शुरुआत में सिपाही के पद पर हुई थी। विभाग में समय-समय पर मिलती प्रोन्नति के जरिए ये कर्मी धीरे-धीरे दारोगा के पद तक पहुंचे हैं। इनमें 1990 से पहले नियुक्त हुए कई वरिष्ठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जिन्हें लंबे इंतजार के बाद यह प्रोन्नति मिली है।
मुख्यालय ने आदेश में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है। जिन पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही, निगरानी जांच, फौजदारी या किसी आपराधिक मामले की सुनवाई अभी विचाराधीन है, उन्हें दारोगा पद का कार्यकारी प्रभार नहीं दिया जाएगा। यानी ऐसे मामलों में फंसे अधिकारियों को फिलहाल इस प्रोन्नति के दायरे से बाहर रखा गया है।
Bihar Police Promotion: पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
पुलिस मुख्यालय के इस निर्णय से थानों में लंबे समय से लंबित मामलों के साथ-साथ रोजमर्रा के सामान्य मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से थाना स्तर पर कामकाज सुचारू होने की संभावना है, जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिल सकता है। विशेषज्ञ इसे पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
बिहार पुलिस मुख्यालय का यह फैसला राज्य के हजारों पुलिसकर्मियों के करियर में एक अहम पड़ाव साबित होगा। लंबे समय से प्रोन्नति का इंतजार कर रहे एएसआई अब दारोगा के पद पर कार्यकारी प्रभार संभालेंगे, जिससे उनकी सेवा और वेतन दोनों में बदलाव आएगा। साथ ही, थानों में अधिकारियों की संख्या बढ़ने से आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। विभागीय अनुशासन बनाए रखने के लिए विवादित मामलों वाले अधिकारियों को इस दायरे से बाहर रखा जाना यह दिखाता है कि मुख्यालय ने प्रक्रिया में पारदर्शिता का ध्यान रखा है। आने वाले दिनों में इस प्रोन्नति का असर बिहार की कानून-व्यवस्था पर किस हद तक पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।
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Sanjana Gupta
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