खेती में पानी की बढ़ती कमी और गिरता भूजल स्तर आज किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा) जैसी सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) तकनीकें कम पानी में बेहतर पैदावार का भरोसेमंद तरीका बनकर उभरी हैं। केंद्र सरकार “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” (Per Drop More Crop – PDMC) योजना के तहत इन प्रणालियों को लगाने के लिए किसानों को वित्तीय सहायता भी देती है। इस लेख में जानिए ड्रिप सिंचाई क्या है, इसके फायदे, किन फसलों के लिए उपयोगी है, सरकारी सब्सिडी कितनी मिलती है और आवेदन कैसे करें।
Drip Irrigation Subsidy: ड्रिप सिंचाई से कम पानी में ज्यादा पैदावार, पर ड्रॉप मोर क्रॉप में 55% तक सहायता, जानें पूरी जानकारी
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई क्या है, इसके फायदे, उपयुक्त फसलें और पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत छोटे-सीमांत किसानों को 55% व अन्य को 45% सहायता की पूरी जानकारी।
मुख्य बातें
- ड्रिप सिंचाई क्या है?
- ड्रिप सिस्टम के मुख्य हिस्से
- ड्रिप सिंचाई के फायदे
- किन फसलों के लिए उपयुक्त

ड्रिप सिंचाई क्या है?
ड्रिप सिंचाई में पानी को पाइपों, लेटरल ट्यूब और ड्रिपर (एमिटर) के जरिए बूंद-बूंद करके सीधे पौधे की जड़ों के पास पहुंचाया जाता है। पारंपरिक नाली या बाढ़ सिंचाई में पानी पूरे खेत में फैलता है, जिससे काफी पानी वाष्पीकरण और रिसाव में बर्बाद हो जाता है। ड्रिप प्रणाली में पानी केवल वहीं पहुंचता है जहां पौधे को उसकी जरूरत है।
स्प्रिंकलर सिंचाई
स्प्रिंकलर प्रणाली में पानी को दबाव के साथ फव्वारे की तरह फसल पर बारिश जैसा छिड़का जाता है। यह गेहूं, चना, दलहन और चारे जैसी घनी बोई जाने वाली फसलों तथा असमतल जमीन के लिए उपयोगी मानी जाती है।
ड्रिप सिस्टम के मुख्य हिस्से
- पानी का स्रोत और पंप: कुआं, ट्यूबवेल, तालाब या टैंक।
- फिल्टर: स्क्रीन या सैंड फिल्टर, जो पानी की गंदगी रोककर ड्रिपर को जाम होने से बचाते हैं।
- फर्टिगेशन यूनिट: वेंचुरी या फर्टिलाइजर टैंक, जिससे पानी के साथ घुलनशील खाद दी जाती है।
- मेन और सब-मेन पाइप: पानी को खेत के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाते हैं।
- लेटरल और ड्रिपर: पौधों की कतारों के साथ बिछी पतली ट्यूब, जिनसे बूंद-बूंद पानी निकलता है।
- वाल्व और प्रेशर गेज: पानी के प्रवाह और दबाव को नियंत्रित करते हैं।
ड्रिप सिंचाई के फायदे
कृषि मंत्रालय के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई से पानी की बचत होती है, फर्टिगेशन के जरिए उर्वरक का उपयोग घटता है, मजदूरी और दूसरी लागतें कम होती हैं और किसानों की कुल आय बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अन्य फायदे इस प्रकार हैं:
- कम पानी में ज्यादा क्षेत्र: उतने ही पानी से अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव।
- खरपतवार कम: पानी केवल पौधों की जड़ों के पास पहुंचने से खाली जगह पर खरपतवार कम उगते हैं।
- बेहतर गुणवत्ता: जड़ों को लगातार और संतुलित नमी मिलने से फल-सब्जियों की गुणवत्ता सुधरती है।
- असमतल जमीन पर भी उपयोगी: खेत को पूरी तरह समतल करने की जरूरत कम होती है।
- मिट्टी की सेहत: जलभराव और मिट्टी के कटाव की समस्या कम होती है।
किन फसलों के लिए उपयुक्त
ड्रिप सिंचाई खासतौर पर कतार में लगाई जाने वाली फसलों के लिए उपयोगी है, जैसे:
- फल: केला, अनार, अंगूर, आम, नींबू वर्गीय फल, पपीता।
- सब्जियां: टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, लौकी, तरबूज-खरबूज।
- नकदी फसलें: गन्ना, कपास।
- फूल और बागवानी: पॉलीहाउस और नर्सरी।
ड्रिप के साथ प्लास्टिक मल्चिंग अपनाने से नमी और लंबे समय तक बनी रहती है और खरपतवार और कम होते हैं।
पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना: सरकारी सहायता
PIB की जानकारी के अनुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने केंद्र प्रायोजित “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना 2015-16 से 2021-22 तक प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के एक घटक के रूप में लागू की। 2022-23 से यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत चलाई जा रही है। इसका मकसद ड्रिप और स्प्रिंकलर के जरिए खेत स्तर पर पानी के उपयोग की दक्षता बढ़ाना है।
कितनी मिलती है सहायता
- छोटे और सीमांत किसान: सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने पर 55% वित्तीय सहायता।
- अन्य किसान: 45% वित्तीय सहायता।
- राज्यों की अतिरिक्त सहायता: कुछ राज्य अपनी ओर से अतिरिक्त (टॉप-अप) सब्सिडी भी देते हैं।
- विशेष क्षेत्र: पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में सब्सिडी की गणना के लिए 25% अधिक इकाई लागत मानी जाती है, और कम सूक्ष्म सिंचाई वाले राज्यों में 15% अधिक।
सरकार ने राज्यों के लिए नाबार्ड (NABARD) के साथ 5,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि वाला माइक्रो इरिगेशन फंड (MIF) भी बनाया है।
सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें
- अपने जिले के कृषि या उद्यान (हॉर्टिकल्चर) विभाग कार्यालय से संपर्क करें, या राज्य के कृषि/उद्यान विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करें।
- जमीन के कागज, आधार, बैंक खाते का विवरण और फोटो जैसे दस्तावेज तैयार रखें।
- विभाग द्वारा पंजीकृत/अनुमोदित कंपनी या डीलर से प्रणाली का डिजाइन और अनुमान (कोटेशन) तैयार कराएं।
- स्वीकृति मिलने के बाद सिस्टम लगवाएं; विभाग के सत्यापन के बाद सहायता राशि जारी होती है।
आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज हर राज्य में अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय कृषि विभाग से पूरी जानकारी जरूर लें।
ड्रिप सिस्टम के रखरखाव के टिप्स
- फिल्टर को नियमित रूप से साफ करें।
- समय-समय पर लेटरल के आखिरी सिरे खोलकर पाइप की फ्लशिंग करें।
- ड्रिपर जाम होने पर विशेषज्ञ की सलाह से उपचार करें।
- चूहों और खेत के औजारों से पाइपों को नुकसान से बचाएं।
- सीजन खत्म होने पर लेटरल समेटकर छांव में सुरक्षित रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ड्रिप सिंचाई पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
PDMC योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% सहायता; कुछ राज्य अतिरिक्त सहायता भी देते हैं।
पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना अब किस योजना के तहत है?
2022-23 से यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत लागू है।
क्या ड्रिप से खाद भी दी जा सकती है?
हां, फर्टिगेशन यूनिट से पानी के साथ घुलनशील खाद दी जा सकती है।
सब्सिडी के लिए कहां आवेदन करें?
अपने राज्य के कृषि या उद्यान विभाग के कार्यालय या पोर्टल पर।

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran
