Nepal Earthquake: प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे नेपाल के लिए एक और मुश्किल घड़ी सामने आई है। बीते दिनों भोटेकोशी में आई विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे इस हिमालयी देश की धरती अब भूकंप के झटकों से कांप उठी है। उत्तर-पश्चिमी नेपाल में मंगलवार देर रात एक के बाद एक दो बार भूकंप महसूस किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पहला झटका रात करीब पौने दो बजे और दूसरा झटका उसके कुछ घंटे बाद तड़के सुबह महसूस हुआ। दोनों झटकों की तीव्रता मध्यम दर्जे की आंकी गई है, लेकिन बाढ़ से पहले ही कमजोर हो चुके इलाकों में इस भूकंप ने नई चिंता खड़ी कर दी है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी जनहानि या संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है।
Nepal Earthquake: दो बार कांपी धरती, जानें कब और कहां
नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप मापन तथा अनुसंधान केंद्र के अनुसार, पहला भूकंप स्थानीय समयानुसार रात एक बजकर 51 मिनट पर दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.5 मापी गई। इसके कुछ ही घंटों बाद सुबह करीब 4 बजकर 28 मिनट पर दूसरा झटका महसूस हुआ, जिसकी तीव्रता 4.2 रही। दोनों ही भूकंपों का केंद्र मुगु जिले के कलाई क्षेत्र के आसपास बताया गया है। कम अंतराल में दो बार आए इन झटकों ने इलाके के लोगों को रातों-रात जगा दिया, हालांकि तीव्रता ज्यादा न होने के कारण बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
डोल्पा और जुम्ला तक महसूस हुआ असर
भूकंप का असर सिर्फ मुगु जिले तक सीमित नहीं रहा। आसपास के डोल्पा और जुम्ला जिलों में भी लोगों ने झटके महसूस किए। इन इलाकों में भी फिलहाल किसी तरह के नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है। बहरहाल, एक के बाद एक कई जिलों में महसूस हुए झटकों ने इस बात की ओर इशारा किया है कि भूकंप का दायरा काफी व्यापक रहा। स्थानीय प्रशासन इन क्षेत्रों में स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
बाढ़ की तबाही से अभी उबरा भी नहीं था नेपाल
गौरतलब है कि नेपाल हाल ही में भोटेकोशी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से जूझ रहा था, जिसने वहां के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया था। बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई अभी पूरी तरह नहीं हो पाई थी कि इसी बीच भूकंप के झटकों ने एक नई आपदा की आशंका पैदा कर दी। ऐसे इलाकों में, जहां बाढ़ के चलते पहले से ही ढांचागत कमजोरी आ चुकी है, वहां भूकंप जैसी घटनाएं खतरे को और बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि इस बार प्रशासन कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नजर नहीं आ रहा।
भूकंपीय रूप से संवेदनशील है नेपाल
नेपाल भौगोलिक दृष्टि से एक अत्यंत भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र में स्थित है, जहां छोटे-बड़े भूकंप आते रहना आम बात मानी जाती है। हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना के चलते यहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल लगातार बनी रहती है। यही कारण है कि नेपाल में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं, और स्थानीय प्रशासन इसके लिए हमेशा तैयार रहने की कोशिश करता है।
Nepal Earthquake: आफ्टरशॉक को लेकर बढ़ाई गई निगरानी
ताजा भूकंप के बाद नेपाली अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और तेज कर दी है। मुख्य चिंता संभावित आफ्टरशॉक यानी बाद में आने वाले छोटे झटकों और उनसे होने वाले ढांचागत नुकसान को लेकर है। खासकर उन इलाकों में जहां बाढ़ के चलते इमारतें और सड़कें पहले से कमजोर हो चुकी हैं, वहां किसी भी अतिरिक्त झटके से बड़ा नुकसान होने का खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित एजेंसियां स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों भूकंपों से किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि बाढ़ की मार झेल चुके नेपाल के लिए यह भूकंप एक और चेतावनी की तरह है। प्रशासन की सतर्कता और समय रहते ली गई एहतियात आने वाले दिनों में किसी बड़े खतरे को टालने में मददगार साबित हो सकती है। मुगु, डोल्पा और जुम्ला जैसे जिलों में स्थिति अभी सामान्य बताई जा रही है, लेकिन भूगर्भीय हलचल को देखते हुए आने वाले समय में एहतियात बरतना जरूरी रहेगा।
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Sanjana Gupta
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