Trump tariff on India: अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त प्रतिबंधों वाला बिल पास होते ही भारत ने अपना रुख साफ शब्दों में जाहिर कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी तरह के दबाव में झुकने का सवाल ही नहीं उठता। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि वह वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए जहां से उचित समझेगा, वहीं से तेल खरीदना जारी रखेगा। साथ ही अपने राष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। यह बिल भारत जैसे बड़े तेल खरीदार देशों पर सीधा असर डाल सकता है, इसलिए इस पर भारत की प्रतिक्रिया को अहम माना जा रहा है।
Trump tariff on India: विदेश मंत्रालय ने दोहराई ऊर्जा सुरक्षा की प्रतिबद्धता
अमेरिकी संसद में बिल पारित होने के तुरंत बाद भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। मंत्रालय ने कहा कि जैसा पहले भी कई मौकों पर बताया जा चुका है, भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बयान में यह भी कहा गया कि देश बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेगा।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर की दी चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बातचीत में भारत ने अपनी चिंताएं पहले ही स्पष्ट कर दी थीं। भारत की ओर से अमेरिका को बता दिया गया था कि इस तरह के कानून का असर सिर्फ दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी बड़ी उथल-पुथल मच सकती है।

व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे हर कदम
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को पूरी तरह तैयार है। बयान के मुताबिक इस नए घटनाक्रम और संभावित प्रतिबंधों से निपटने के लिए भारत सरकार देश के व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि किसी भी प्रतिकूल असर को कम किया जा सके।
जानें क्या है लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट 2026
इस कानून का नाम पूर्व रिपब्लिकन सांसद और ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे दिवंगत लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर रखा गया है। इसे ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम दिया गया है। इसके तहत रूस के वित्तीय संस्थानों, अधिकारियों और तेल ढोने वाले शैडो फ्लीट यानी जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है।
Trump tariff on India: 100% टैरिफ को लेकर क्या है असल स्थिति
यह कानून सीधे तौर पर भारत पर 100% टैरिफ नहीं लगाता है। हालांकि अगर राष्ट्रपति ट्रंप इसे लागू करने का फैसला लेते हैं, तो उन्हें शीर्ष तेल खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। इसके साथ ही बिल में ईरान पर लगे मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों को अगले पांच सालों के लिए बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल किया गया है।
भारत का यह स्पष्ट रुख दिखाता है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के मामले में किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट के जरिए अमेरिका को कानूनी अधिकार तो मिल सकता है, लेकिन इसे लागू करना या न करना पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर निर्भर करेगा। भारत की ओर से पहले ही उच्च स्तरीय बातचीत में अपनी स्थिति साफ कर दी गई है, जिससे आगे की कूटनीतिक बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर दुनियाभर की नजर रहेगी, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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