New Birth Death Rules: देशभर में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के नियम 1 अक्टूबर 2026 से सख्त हो जाएंगे। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम 2026 के प्रावधान उसी दिन लागू होंगे। भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने बुधवार को गजट अधिसूचना जारी कर यह तारीख तय करने की जानकारी दी। दो साल से अधिक पुरानी घटना का रजिस्ट्रेशन अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना नहीं हो सकेगा। एक से दो साल की देरी पर जिलाधिकारी, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी होगी।
जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन नए नियम का मकसद घटनाओं की समय पर जानकारी दर्ज कराना है। संसद के दोनों सदनों से विधेयक पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह पिछले महीने कानून बन चुका है। यह 1969 के मूल कानून में बदलाव करता है।
New Birth Death Rules: नए कानून कब से लागू होंगे
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को अधिनियम के प्रावधान लागू करने की तारीख तय की है। रजिस्ट्रार जनरल ने गजट अधिसूचना के जरिए इसकी जानकारी दी। देशभर में एक ही दिन से नए नियम प्रभावी होंगे। पुरानी प्रक्रिया उसी तारीख से बदल जाएगी।
कानून कैसे बना
संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह पिछले महीने कानून बन गया। इसका मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु की घटनाओं को समय पर दर्ज कराना है। सरकार का कहना है कि इससे समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा।
New Birth Death Rules: 1969 और 2023 के कानून से नाता
यह कानून मूल जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में बदलाव करता है। साल 2023 में भी संशोधन हुआ था और उसके प्रावधान 1 अक्टूबर 2023 से लागू हुए थे। अब 2026 का संशोधन देरी वाले मामलों को और सख्त बनाता है। धारा 13(3) में बदलाव किया गया है।
दो साल से ज्यादा देरी पर क्या होगा
अगर जन्म या मृत्यु की घटना के दो साल बाद रजिस्ट्रेशन का आवेदन होता है तो प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से काम नहीं चलेगा। न्यायिक स्तर पर जांच और मंजूरी के बाद ही पंजीकरण संभव होगा।
एक से दो साल की देरी का नियम
एक साल से अधिक लेकिन दो साल के भीतर आवेदन करने पर जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए। अधिकारी पहले जानकारी की सत्यता जांचेंगे। सही पाए जाने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही रजिस्ट्रेशन होगा।
New Birth Death Rules: समय पर पंजीकरण क्यों जरूरी है
1969 के कानून के तहत जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इससे जारी प्रमाणपत्र कानूनी पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जन्म या मृत्यु साबित करने के लिए इसे कानूनी सबूत माना जाता है। देरी से कई काम अटक सकते हैं।
सरकार ने नियम क्यों सख्त किए
विधेयक में कहा गया था कि बदलाव से जन्म और मृत्यु की घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलेगा। आधिकारिक रिकॉर्ड समय पर अपडेट रहने की उम्मीद है। लोग घटना के तुरंत बाद आवेदन करें यही मकसद बताया गया है।
New Birth Death Rules: आम लोगों को क्या ध्यान रखना होगा
1 अक्टूबर के बाद पुरानी घटनाओं का रजिस्ट्रेशन आसान नहीं रहेगा। दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में अदालती आदेश की जरूरत पड़ेगी। एक-दो साल वाले मामलों में भी जिला स्तर की मंजूरी लगेगी। समय रहते प्रमाणपत्र बनवाना फायदेमंद रहेगा।
1 अक्टूबर 2026 से जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी महंगी पड़ सकती है। दो साल से अधिक पुरानी घटना के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। एक से दो साल की देरी पर डीएम, एसडीएम या अधिकृत मजिस्ट्रेट की जांच और मंजूरी चाहिए। नया कानून 1969 के अधिनियम में संशोधन है और समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है। लोगों को घटना के बाद जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए ताकि बाद में कानूनी उलझन न हो।
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