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Mukhyamantri Pashudhan Vikas Yojana: बकरी पालन पर झारखंड सरकार दे रही 70% सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन

Mukhyamantri Pashudhan Vikas Yojana: झारखंड में स्वरोजगार की तलाश कर रहे लोगों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और आकर्षक योजना शुरू की है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत व्यावसायिक बकरी पालन योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत इच्छुक लाभार्थियों को 70 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। इस योजना के जरिए राज्य का कोई भी स्थानीय निवासी 100 बकरी और 5 बकरा क्षमता वाला फार्म स्थापित कर सकता है। खास बात यह है कि शेष 30 प्रतिशत राशि में से भी 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऋण के रूप में प्राप्त किया जा सकता है, जिससे लाभार्थी पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है। पशुपालन विभाग के अनुसार इस साल राज्यभर में 437 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना उन लोगों के लिए बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है, जो पशुपालन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

क्या है मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना

झारखंड सरकार की यह योजना खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू की गई है। पशुपालन (योजना एवं प्रशिक्षण) के संयुक्त निदेशक डॉ विपिन महथा के अनुसार इस योजना के तहत राज्य का कोई भी स्थानीय निवासी व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन शुरू कर सकता है। सरकार इसके लिए फार्म की कुल लागत पर 70 प्रतिशत तक का अनुदान देगी, जिससे नए उद्यमियों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

सब्सिडी और लोन का पूरा गणित

योजना के तहत कुल परियोजना लागत करीब 9 लाख 78 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इसमें से सरकार 6 लाख 84 हजार 600 रुपये यानी 70 प्रतिशत राशि अनुदान के तौर पर देगी। बाकी बचे 30 प्रतिशत यानी 2 लाख 93 हजार 400 रुपये में से भी 15 प्रतिशत हिस्सा लाभार्थी बैंक ऋण के माध्यम से जुटा सकता है। इससे स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने वालों के लिए शुरुआती पूंजी का इंतजाम काफी आसान हो जाता है।

दो किस्तों में मिलेगी अनुदान राशि

अनुदान की पूरी राशि एक साथ नहीं बल्कि दो अलग-अलग किस्तों में लाभार्थियों को दी जाएगी। पहली किस्त कुल राशि की 40 प्रतिशत होगी, जो योजना के स्वीकृत होते ही जारी कर दी जाएगी। वहीं दूसरी किस्त शेष 60 प्रतिशत की होगी, जो फार्म की आधारभूत संरचना पूरी होने के बाद लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुदान की राशि तभी उपलब्ध कराई जाएगी जब लाभार्थी अपने हिस्से का अंशदान और बैंक ऋण की राशि पहले हस्तांतरित कर चुका होगा।

आवेदन के लिए जरूरी पात्रता शर्तें

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें भी तय की गई हैं। आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना और बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना जरूरी है। इसके अलावा आवेदक के पास कम से कम 50 डिसमिल निजी भूमि या 10 वर्षों के लिए लीज पर ली गई भूमि होनी चाहिए, जिस पर छायादार वृक्ष होना भी अनिवार्य शर्त है। आवेदक को बैंक से प्रमाण-पत्र या पिछले एक वर्ष का औसत बैंक बैलेंस भी प्रमाणित करना होगा, साथ ही ऋण स्वीकृति के लिए सहमति पत्र भी देना अनिवार्य होगा।

फार्म संचालन से जुड़ी शर्तें

Mukhyamantri Pashudhan Vikas Yojana
Mukhyamantri Pashudhan Vikas Yojana

योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को अपने फार्म को कम से कम दस वर्षों तक लगातार संचालित रखने की शपथ लेनी होगी। इसके अलावा फार्म में महामारी नियंत्रण से जुड़े मानकों की नियमित समीक्षा संबंधित जिला पशुपालन पदाधिकारी द्वारा की जाएगी। बकरी पालन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता भी दी जाएगी, जिससे अनुभवी और प्रशिक्षित लोगों को अधिक लाभ मिल सके।

कैसे और कहां करें आवेदन

इच्छुक पशुपालकों को योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र, घोषणा पत्र और शपथ पत्र भरना होगा। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न करके संबंधित प्रखंड पशुपालन कार्यालय या फिर जिला पशुपालन कार्यालय में जमा करना होगा। डॉ विपिन महथा ने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत आवेदक ही नहीं, बल्कि स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन भी उठा सकते हैं।

चयन प्रक्रिया के चार महत्वपूर्ण चरण

योजना के अंतर्गत चयन प्रक्रिया कुल चार चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले आवेदक को दस्तावेजों सहित योजना प्रस्ताव संबंधित पशुपालन कार्यालय में जमा करना होगा। इसके बाद संबंधित स्थल का निरीक्षण किया जाएगा, जिसकी अनुशंसा पशुपालन निदेशक को भेजी जाएगी। अंत में निदेशालय स्तर पर गठित एक समिति द्वारा लाभार्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा, जिसके बाद अनुमोदित उम्मीदवारों को योजना का लाभ मिलना शुरू होगा।

जिलेवार तय किया गया लक्ष्य

इस वर्ष राज्यभर में कुल 437 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे अलग-अलग जिलों में बांटा गया है। सबसे अधिक 47 फार्म रांची जिले में स्थापित किए जाएंगे, जबकि जमशेदपुर और पलामू में 26-26 फार्म का लक्ष्य तय किया गया है। हजारीबाग में 25, चाईबासा में 23 और दुमका में 22 फार्म बनाए जाने हैं। इसके अलावा गोड्डा, गढ़वा, साहिबगंज और गुमला जैसे जिलों में भी उल्लेखनीय संख्या में फार्म स्थापित करने की योजना है, वहीं लोहरदगा में सबसे कम केवल 9 फार्म बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

झारखंड सरकार की यह पहल राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भारी सब्सिडी और आसान बैंक ऋण सुविधा के चलते यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जो पशुपालन के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं। पात्रता शर्तों और दस्तावेजी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन करने वाले आवेदकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यह योजना राज्य में बकरी पालन को व्यावसायिक रूप देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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