Jharkhand Urdu Teacher Vacancy 2026: झारखंड में उर्दू माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की पढ़ाई शिक्षकों की भारी कमी के चलते बुरी तरह प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2024 में उर्दू सहायक आचार्य के 7232 पद स्वीकृत किए थे, लेकिन दो साल गुजरने के बावजूद इन पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इनमें कक्षा एक से पांच तक के लिए 5478 और कक्षा छह से आठ तक के लिए 1754 पद शामिल हैं। गौरतलब है कि राज्य के उर्दू स्कूलों में साल 2015 के बाद से किसी नई भर्ती का आयोजन ही नहीं हुआ है। उस वर्ष 4401 पदों के लिए आवेदन मंगाए गए थे, मगर केवल 689 अभ्यर्थियों की ही नियुक्ति हो सकी थी, जिसके बाद बाकी बचे 3712 पदों को समाप्त कर नए सिरे से पद सृजित किए गए। नतीजा यह है कि राजधानी रांची सहित राज्यभर के कई स्कूल आज भी शिक्षकों की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं।
Jharkhand Urdu Teacher Vacancy 2026: दशकों से खाली पड़े हैं कई स्कूलों में पद
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से यह साफ हुआ है कि राज्य के कुछ उर्दू विद्यालयों में शिक्षकों के पद पुराने अविभाजित बिहार के जमाने से रिक्त पड़े हैं। सूचना अधिकार कार्यकर्ता एमजेड खान ने जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय से यह आंकड़े हासिल किए। इससे पता चलता है कि समस्या नई नहीं, बल्कि बरसों पुरानी है और अब तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा सका है।
रांची में आधे से ज्यादा पद रिक्त
राजधानी रांची में उर्दू शिक्षकों के कुल 56 स्वीकृत पदों में से 34 पद अब भी खाली पड़े हैं। जीएमएस हिंदपीढ़ी उर्दू स्कूल में जहां 425 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, वहां सात पद स्वीकृत होने के बावजूद सिर्फ तीन शिक्षक ही कार्यरत हैं। इसी तरह कांटाटोली स्थित विद्यालय में शिक्षकों के दोनों स्वीकृत पद पूरी तरह खाली हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
मांडर प्रखंड में शिक्षकों पर दोहरा बोझ
मांडर प्रखंड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां शिक्षकों के 43 पद स्वीकृत हैं, मगर इनमें से केवल नौ पर ही शिक्षक तैनात हैं और 34 पद रिक्त पड़े हैं। कुछ पद तो एक दशक से भी ज्यादा समय से खाली बताए जा रहे हैं। नियुक्ति नहीं होने के कारण मौजूदा शिक्षकों पर पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव लगातार बना हुआ है।
उर्दू स्कूल बुढ़मू की तस्वीर हालात की गंभीरता को और स्पष्ट करती है। यहां 415 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए महज एक शिक्षक उपलब्ध है। स्कूल में नौ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से आठ खाली पड़े हैं। बताया जाता है कि यहां कुछ पद वर्ष 1996 से ही रिक्त चले आ रहे हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
राजकीयकृत मध्य विद्यालय नगड़ी की हालत सबसे चिंताजनक मानी जा सकती है। यहां 197 विद्यार्थी नामांकित हैं, मगर विद्यालय में एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। यहां शिक्षकों के दो पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों ही खाली पड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बावजूद शिक्षक नियुक्ति में देरी सवाल खड़े करती है।
Jharkhand Urdu Teacher Vacancy 2026: ओरमांझी के दोनों स्कूलों में भी संकट
ओरमांझी प्रखंड के स्कूलों में भी शिक्षकों की भारी कमी देखी जा रही है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुटे में पांच स्वीकृत पदों में से चार खाली हैं, जबकि प्राथमिक विद्यालय इरबा में एक ही स्वीकृत पद है और वह भी रिक्त है। इस तरह दोनों स्कूलों को मिलाकर छह स्वीकृत पदों में से पांच पद खाली पड़े हैं, जिससे पढ़ाई की व्यवस्था लड़खड़ा रही है।
झारखंड के उर्दू विद्यालयों में शिक्षकों की यह कमी अब सिर्फ प्रशासनिक देरी का मामला नहीं रह गई, बल्कि इसका सीधा असर हजारों बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। सृजित पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी से न सिर्फ पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि मौजूदा शिक्षकों पर भी काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि राज्य सरकार 7232 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करे, ताकि दशकों से खाली पड़े पदों को भरा जा सके और उर्दू माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का माहौल मिल सके।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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