Akhilesh Yadav PDA Yatra: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए यात्रा का पहला चरण रायबरेली के बछरावां से शुरू किया। यह राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है और लोकसभा में 1999 से कांग्रेस के पास रहा है। विधानसभा स्तर पर तस्वीर अलग है। 2022 में यहां छह सीटों में सपा ने चार और भाजपा ने दो जीती थीं। कांग्रेस के पास कोई विधानसभा सीट नहीं रही।
यात्रा के दौरान अखिलेश हरचंदपुर के सपा विधायक और ओबीसी नेता राहुल लोधी के घर जाएंगे। बछरावां के एससी विधायक श्याम सुंदर भारती से भी मिलेंगे। दोनों पर रायबरेली पुलिस से बदसलूकी का आरोप है। समाजवादी छात्र सभा और एबीवीपी के टकराव में पुलिस से झड़प बताई गई, जिसे अखिलेश ने पीडीए के अपमान से जोड़ा था।
स्रोत इस शुरुआत को एक तीर से तीन निशाने बताता है। जातीय गोलबंदी, कांग्रेस पर सीट बंटवारे का दबाव और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कैडर को सक्रिय करना। अखिलेश कहते हैं कि लोकसभा की तरह विधानसभा में भी इंडिया गठबंधन रहेगा। सीट संख्या पर दोनों दलों के बयान आ रहे हैं, आंकड़ा इस रिपोर्ट में तय नहीं है।
रायबरेली की विधानसभा गणित क्या कहती है?
जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। 2022 में सपा के टिकट पर बछरावां से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज पांडेय जीते। बाद में मनोज पांडेय भाजपा में चले गए। भाजपा से रायबरेली सदर अदिति सिंह और सलोन अशोक कुमार जीते।
लोकसभा कांग्रेस के पास लंबे समय से है, विधानसभा में कांग्रेस खाली हाथ है। इसी अंतर को सपा अपना संदेश बनाने की कोशिश में बताई गई है। गढ़ में रथ पहुंचाना कांग्रेस को यह दिखाने वाला दांव माना जा रहा है कि मैदान में सपा कितनी मजबूत है। लोधी और पासी समाज से जुड़े विधायकों के घर जाना पी और डी साधने की रणनीति से जोड़ा गया। श्याम सुंदर भारती पासी समाज से हैं, राहुल लोधी पिछड़े वर्ग से।
2027 का चुनाव अभी दूर है। यात्रा का पहला पड़ाव प्रतीकात्मक और संगठनात्मक दोनों पढ़ा जा रहा है। गठबंधन बना रहेगा यह अखिलेश का दोहराया वाक्य है। सीट सूत्र अभी सार्वजनिक पक्का नहीं।
ओपी राजभर ने यात्रा पर क्या आरोप लगाया?
मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव रायबरेली में पीडीए रथ इसलिए ला रहे हैं ताकि गुंडागर्दी और अपराध को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने जिलाध्यक्ष द्वारा सर्कल ऑफिसर से बदतमीजी का जिक्र किया। आरोप है कि अफसर से चूड़ियां पहनने को कहा गया और अभद्र बातें कहीं। राजभर के अनुसार अखिलेश उसी व्यवहार को सही ठहराने और जिलाध्यक्ष की हरकत का समर्थन करने जा रहे हैं।
यह सरकारी पक्ष का हमला है। सपा इसे पुलिस बदसलूकी और पीडीए अपमान से जोड़ती है। दोनों दावे आमने सामने हैं। स्वतंत्र जांच का नतीजा इस सामग्री में नहीं है। यात्रा का विपक्षी पाठ जातीय सम्मान और संगठन है, सत्ता पक्ष का पाठ कानून व्यवस्था है।
कांग्रेस पर दबाव वाला कोण कितना मजबूत है?
इंडिया गठबंधन लोकसभा में रहा। विधानसभा सीट बंटवारे पर नेताओं के बयान टकरा रहे हैं। रायबरेली से रथ निकालना उसी बहस को मैदान में लाने वाला कदम माना गया। कांग्रेस लोकसभा गढ़ बचाए हुए है, विधानसभा में शून्य है। सपा 2022 में चार सीटें ले चुकी थी, एक विधायक बाद में भाजपा चला गया।
दबाव की भाषा विश्लेषण है, लिखित अल्टीमेटम नहीं। अखिलेश गठबंधन बनाए रखने की बात करते हैं। कांग्रेस का प्रत्युत्तर इस खबर में नहीं आया। इसलिए निष्कर्ष इतना ही कि प्रतीक रायबरेली चुना गया और समय 2027 से पहले का संगठन चरण है।
हाल में अखिलेश का एक पोस्टर भी चर्चा में रहा जिसमें वे हनुमान जी से आशीर्वाद लेते दिखे। यह छवि यात्रा के साथ सुर्खियों का हिस्सा बनी। धार्मिक प्रतीक और पीडीए का सामाजिक गठबंधन एक साथ चल रहे हैं।
कैडर और वोट बैंक के लिए यात्रा का मतलब क्या है?
पहला चरण बछरावां से है। पिछड़े और दलित विधायकों के घर जाना स्थानीय नेताओं को केंद्र में लाता है। छात्र संगठन वाली झड़प को पीडीए अपमान कहना कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाला वाक्य है। कैडर को एक्टिव मोड में लाना तीसरा निशाना बताया गया।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में बड़े गठबंधन और जातीय समीकरण दोनों साथ चलेंगे। पीडीए पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक का विस्तारित फ्रेम है। इस यात्रा का दावा पी और डी पर जोर का है। अल्पसंख्यक कोण इस पड़ाव के विवरण में अलग से नहीं खुला।
अखिलेश यादव पीडीए यात्रा रायबरेली से इसलिए देखी जा रही है कि लोकसभा गढ़ और विधानसभा हकीकत में फर्क साफ है। तीन निशाने विश्लेषण है। राजभर का गुंडागर्दी वाला आरोप विरोधी स्वर है। आगे के चरण और कांग्रेस की प्रतिक्रिया तय करेंगी दबाव कितना बना।
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