Uttar Pradesh Opinion Poll: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले न्यूज लीडर और मैटराइज का यूपी ओपिनियन पोल सार्वजनिक हुआ है। सर्वे इस सवाल पर केंद्रित है कि अगर चुनाव आज होते तो सत्ता का रुख कैसा दिखता। राज्य में 403 सीटें हैं और सरकार के लिए 202 सीटों का आंकड़ा चाहिए। चुनाव फरवरी मार्च के आसपास संभावित बताया गया है।
पोल के मुताबिक पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड की कुल 273 सीटों में भाजपा को 187, समाजवादी गठबंधन को 85 और बसपा को 1 सीट मिलने का अनुमान है। सर्वे खुद साफ करता है कि ओपिनियन पोल अंतिम परिणाम नहीं होता। मत और समीकरण चुनाव तक बदल सकते हैं। आंकड़ों को मौजूदा रुझान ही माना जाना चाहिए।
2017 में भाजपा ने अकेले 312 सीटें जीती थीं। अपना दल सोनेलाल को 9 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 4 सीटें मिलीं। गठबंधन का योग 325 रहा। सपा को 47, कांग्रेस को 7, बसपा को 19 और आरएलडी को 1 सीट मिली। 2022 में भाजपा सहयोगियों सहित 273 सीटों पर सरकार बनाई। सपा 111 पर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी रही। आरएलडी को 8, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को 6, बसपा को 1 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। 2024 लोकसभा में भाजपा को प्रदेश में झटका लगा था, जिसके बाद विधानसभा में हैट्रिक और सपा की वापसी दोनों पर बहस तेज हुई।
पश्चिमी यूपी की 136 सीटों पर सर्वे क्या कहता है?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों की 136 विधानसभा सीटों पर न्यूज लीडर मैटराइज सर्वे में भाजपा प्लस को 93 और समाजवादी पार्टी प्लस को 43 सीटें बताई गई हैं। यह इलाका जाट, किसान, मुस्लिम, दलित, गुर्जर, सैनी और अन्य समूहों के मेल से जाना जाता है। 2022 में किसान आंदोलन और सपा आरएलडी गठबंधन ने कई सीटों पर भाजपा को टक्कर दी थी। अब राष्ट्रीय लोक दल एनडीए में है, इसलिए समीकरण उस चुनाव से अलग हो सकते हैं।
जिलेवार अनुमान में आगरा की 9 सीटें भाजपा प्लस को मिल सकती हैं। गाजियाबाद की सभी सीटें भाजपा के खाते में बताई गई हैं। बागपत की 3 सीटों पर भी भाजपा प्लस का क्लीन स्वीप अनुमान है। फिरोजाबाद की 5 में भाजपा प्लस को 3 और सपा प्लस को 2 सीटें बताई गई हैं। मुजफ्फरनगर की 6 में भाजपा प्लस 4 और सपा प्लस 2 पर आगे दिखती हैं। मेरठ की 7 सीटों पर सपा प्लस को 4 और भाजपा प्लस को 3 का अनुमान है।
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद और रामपुर जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। दलित वोट भी कई सीटों पर समीकरण का हिस्सा है। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और आगरा जैसे शहरों में व्यापारी, नौकरीपेशा और शहरी ओबीसी समूह ग्रामीण इलाकों से अलग मुद्दे रखते हैं। गन्ना, रोजगार और स्थानीय समस्याएं पश्चिमी यूपी के एजेंडे में गिनी गई हैं।
अवध और बुंदेलखंड में सीटों का अनुमान क्या है?
अवध रीजन में सर्वे भाजपा को 76, समाजवादी पार्टी को 41 और बसपा को 1 सीट देता है। लखनऊ में भाजपा प्लस का क्लीन स्वीप अनुमान है। कानपुर नगर में भाजपा को 8 और सपा को 2 सीटें बताई गई हैं। कानपुर देहात की 4 में भाजपा 3 और सपा 1 पर हैं। रायबरेली की 6 में सपा को 5 और भाजपा को 1 सीट का अनुमान है। अवध में दोनों मुख्य दावेदारों के बीच अंतर बुंदेलखंड जितना चौड़ा नहीं दिखता।
बुंदेलखंड की 19 सीटों पर सर्वे भाजपा को 17 और समाजवादी पार्टी तथा संभावित गठबंधन को 2 सीटें बताता है। तीनों क्षेत्रों को मिलाकर दिए गए 273 सीटों वाले आंकड़े में भाजपा 187, समाजवादी गठबंधन 85 और बसपा 1 है। पूर्वांचल का अलग विस्तृत आंकड़ा इस किस्त में नहीं दिया गया। पोल में कहा गया है कि अलग अलग हिस्सों की तस्वीर समझने की कोशिश की गई है।
मुख्यमंत्री पसंद और नेताओं ने सर्वे पर क्या कहा?
सर्वे के अनुसार सबसे बेहतर मुख्यमंत्री के सवाल पर 54 प्रतिशत लोग योगी आदित्यनाथ, 35 प्रतिशत अखिलेश यादव और 7 प्रतिशत मायावती का नाम लेते हैं। यह पसंद का आंकड़ा सीट अनुमान से अलग सवाल है।
भाजपा सांसद अरुण गोविल ने कहा, “यूपी के लिए योगी जी सबसे बड़ा ब्रांड यूपी में बनेगी बीजेपी की सरकार।” कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रदेश की जनता का आशीर्वाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि भाजपा निश्चित रूप से पश्चिमी यूपी जीतेगी। आरएलडी गठबंधन से भाजपा को फायदा मिलेगा, ऐसा भी उन्होंने कहा।
बसपा के यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने कहा, “कोई भी गरीब की झोपड़ी में सर्वे करने नहीं जाता है बसपा मजबूती से चुनाव लड़ेगी और जीतेगी।” सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने कहा कि वे मुरादाबाद की 6 की 6 सीटें जीतने जा रहे हैं। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि विपक्ष के नेता गठबंधन की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई भी राजनीतिक हिस्सेदारी देने को तैयार नहीं।
ये बयान सर्वे की प्रतिक्रिया हैं, सर्वे के अपने आंकड़े नहीं।
पिछले नतीजों के बाद यह रुझान क्यों चर्चा में है?
दो लगातार विधानसभा चुनावों में भाजपा सरकार बना चुकी है। 2024 लोकसभा के बाद विपक्ष इस दावे के साथ मैदान में है कि राज्य का मिजाज बदल चुका है। यूपी ओपिनियन पोल उसी बहस के बीच आया है। पश्चिमी यूपी में आरएलडी के एनडीए में जाने से जाट वोट का गणित 2022 वाला नहीं रहा। मेरठ और रायबरेली जैसे जिले दिखाते हैं कि एक ही सर्वे में कुछ इलाके सपा प्लस को देते हैं।
पोल बार बार दोहराता है कि यह चुनाव का अंतिम नतीजा नहीं है। मुद्दे, गठबंधन और प्रत्याशी सूची आने पर राय बदल सकती है। 403 सीटों में से इस अपडेट में 273 सीटों का क्षेत्रीय अनुमान सामने है। बाकी सीटों की तस्वीर अलग किस्तों में आ सकती है, जैसा प्रसारण के दौरान कहा गया।
सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 202 है। सर्वे के तीन क्षेत्रों वाले योग में भाजपा 187 पर है, जो पूर्ण बहुमत से नीचे है, लेकिन बाकी क्षेत्रों के बिना पूरा नक्शा अधूरा है। इसलिए आंकड़ों को टुकड़ों में पढ़ना और उन्हें अंतिम घोषणा न मानना सर्वे की अपनी चेतावनी से मेल खाता है।
चुनाव से पहले इन आंकड़ों को कैसे पढ़ें?
न्यूज लीडर मैटराइज सर्वे पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड में भाजपा को बढ़त देता है। समाजवादी गठबंधन मेरठ, रायबरेली और कुछ अन्य जगहों पर सीटें बचाता दिखता है। बसपा का अनुमान एक सीट तक सीमित है। मुख्यमंत्री पसंद में योगी आदित्यनाथ आगे हैं, अखिलेश यादव दूसरे स्थान पर हैं।
पार्टियों की प्रतिक्रियाएं अपने अपने दावे दोहराती हैं। भाजपा नेता मोदी योगी ब्रांड और पश्चिमी यूपी की जीत की बात करते हैं। बसपा सर्वे की पद्धति पर सवाल उठाती है। सपा नेता स्थानीय सीटों पर अपना दावा रखते हैं। आजाद गठबंधन में हिस्सेदारी न मिलने की शिकायत करते हैं।
पाठक के लिए सबसे उपयोगी बात यही है कि यह एक समय का मूड है, मतगणना नहीं। फरवरी मार्च का संभावित चुनाव अभी महीनों दूर है। गठबंधन की अंतिम तस्वीर, प्रत्याशी और स्थानीय मुद्दे इन प्रतिशत और सीट अनुमानों को बदल सकते हैं। यूपी ओपिनियन पोल उसी बहस को आंकड़ों के साथ रखता है, फैसला नहीं सुनाता।
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