Onion Kidney Stone Myth: सोशल मीडिया पर एक दावा फैल रहा है कि प्याज के ऊपर या जड़ के पास मौजूद कठोर सफेद हिस्से को खाने से किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी हो सकती है। कई लोग प्याज काटते समय इस हिस्से को अलग कर देते हैं।
न्यूट्रिशनिस्ट लीमा महाजन का कहना है कि इस दावे का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बिना सही जानकारी के किसी भी खाद्य पदार्थ को किडनी स्टोन का कारण मान लेना ठीक नहीं है। उनके अनुसार यह हिस्सा सामान्य तौर पर खाया जा सकता है।
प्याज के सफेद हिस्से को लेकर क्या दावा किया जा रहा है?
किडनी स्टोन एक आम स्वास्थ्य समस्या है। इससे जुड़ी खानपान वाली कई बातें समय-समय पर वायरल होती रहती हैं। इसी क्रम में प्याज के कठोर सफेद हिस्से को लेकर यह चर्चा चल रही है कि इसे खाने से पथरी बन सकती है।
इस डर से लोग प्याज काटते समय ऊपरी या जड़ वाले सफेद हिस्से को काटकर फेंक देते हैं। लीमा महाजन ने स्पष्ट किया कि बिना प्रमाण के किसी चीज को बीमारी का कारण बताना सही नहीं। प्याज के इस हिस्से में भी बाकी प्याज की तरह सल्फर कंपाउंड्स होते हैं जिनमें शरीर के लिए उपयोगी गुण हो सकते हैं।
दावा वायरल होने से आम लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है। विशेषज्ञ की राय जानना इसलिए जरूरी है ताकि अनावश्यक रूप से खाद्य पदार्थ न फेंके जाएं।
लीमा महाजन के अनुसार इस हिस्से में क्या होता है?
लीमा महाजन के मुताबिक प्याज में मौजूद सल्फर कंपाउंड्स एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से जुड़े होते हैं। ये कंपाउंड शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े तंत्र पर प्रभाव डाल सकते हैं।
प्याज के सफेद हिस्से में भी वही सल्फर कंपाउंड्स पाए जाते हैं जो बाकी हिस्से में होते हैं। उन्होंने बताया कि प्याज में मौजूद कुछ यौगिक फैट मेटाबॉलिज्म से जुड़े हो सकते हैं और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।
यह जानकारी इस हिस्से को पूरी तरह बेकार या नुकसानदायक बताने वाले दावे के विपरीत है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि केवल यही हिस्सा खाने से किसी बीमारी का इलाज हो जाएगा या स्वास्थ्य समस्या रुक जाएगी। सामान्य आहार का हिस्सा मानकर खाया जा सकता है।
किडनी स्टोन बनने के असली कारण क्या हो सकते हैं?
किडनी स्टोन बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में पर्याप्त पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन एक महत्वपूर्ण कारण है। पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सालेट या यूरिक एसिड जैसे पदार्थों का अधिक मात्रा में होना भी कुछ प्रकार की पथरी का जोखिम बढ़ा सकता है।
कुछ लोगों में जेनेटिक कारण, खानपान, मोटापा और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। हर व्यक्ति में कारण एक जैसा नहीं होता। पथरी के प्रकार के आधार पर डॉक्टर डाइट और इलाज की सलाह देते हैं।
अगर किसी को पहले से पथरी की समस्या है तो उसकी डाइट स्टोन के प्रकार के अनुसार एक्सपर्ट की निगरानी में तय होनी चाहिए। एक खाद्य पदार्थ को अकेला दोषी ठहराना वैज्ञानिक तरीके से सही नहीं माना जाता।
क्या प्याज का यह हिस्सा फेंक देना चाहिए?
लीमा महाजन के अनुसार प्याज के इस सफेद हिस्से को सामान्य तौर पर खाया जा सकता है। इसे काटकर अलग करने की कोई वैज्ञानिक जरूरत नहीं बताई गई है। प्याज के बाकी हिस्सों की तरह इसमें भी उपयोगी यौगिक हो सकते हैं।
लोग अक्सर वायरल दावों के चलते खाने की चीजें फेंक देते हैं। पानी की कमी और असंतुलित आहार पथरी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण कारक बताए गए हैं। पर्याप्त पानी पीना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार खानपान रखना बेहतर उपाय है।
प्याज को पूरी तरह खाने से पोषण मिलता है। सिर्फ एक हिस्से को नुकसानदायक मानकर फेंकना भोजन की बर्बादी भी हो सकती है जब तक कोई प्रमाण न हो।
पथरी की समस्या होने पर डाइट कैसे तय करें?
किडनी स्टोन का कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। इसलिए एक ही सलाह सभी पर लागू नहीं होती। डॉक्टर पथरी का प्रकार जांचकर डाइट बताते हैं। कुछ स्टोन में ऑक्सालेट कम करने की सलाह होती है तो कुछ में यूरिक एसिड नियंत्रित करने की।
लीमा महाजन ने जोर दिया कि बिना जानकारी के किसी खाद्य पदार्थ को कारण मानना ठीक नहीं। अगर पथरी की हिस्ट्री है तो स्वघोषित प्रतिबंध लगाने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। पानी की मात्रा बढ़ाना आम सुझावों में शामिल है क्योंकि डिहाइड्रेशन प्रमुख कारण माना जाता है।
सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी दावे तेजी से फैलते हैं। ऐसे में न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर की राय पर भरोसा करना सुरक्षित रहता है। प्याज के सफेद हिस्से वाले दावे का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं बताया गया है इसलिए इसे सामान्य आहार में शामिल रखा जा सकता है जब तक व्यक्तिगत मेडिकल सलाह इसके विपरीत न हो।
किडनी स्टोन से बचाव के लिए समग्र जीवनशैली मायने रखती है न कि एक सब्जी का छोटा हिस्सा। पर्याप्त पानी, संतुलित भोजन और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह ही सही दिशा देते हैं। वायरल दावों को जांचकर ही अपनाना चाहिए।
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