Pitru Paksh 2026: पितृपक्ष इस साल 26 सितंबर 2026 से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्ध पक्ष समाप्त होगा। हिंदू परंपरा में यह समय पूर्वजों के स्मरण का माना जाता है। लोग श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं।
कई परिवार इस अवधि में नई और अनावश्यक चीजें खरीदने से बचते हैं। इसका मतलब हर खरीदारी बंद होना नहीं है। जरूरत की वस्तुएं और श्राद्ध से जुड़ी सामग्री खरीदी जा सकती है। काले तिल, कुश, अन्न, वस्त्र और दान की चीजें इसी तैयारी का हिस्सा मानी जाती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ये वस्तुएं कर्म के लिए जुटाई जाती हैं, दिखावे के लिए नहीं। क्षेत्र और परिवार के अनुसार परंपरा अलग हो सकती है। इसलिए शुभ अशुभ तय करने से पहले अपनी घर की रीत देखना चाहिए।
पितृपक्ष में खरीदारी पूरी तरह बंद है क्या?
पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का समय माना जाता है। कई घर नई विलास की चीजें टाल देते हैं। जरूरत का सामान और पूजा श्राद्ध की सामग्री इससे बाहर रखी जाती है। चावल, दाल, फल, सब्जी जैसी रोज की चीजें सामान्य हिसाब से ली जा सकती हैं।
श्राद्ध पर ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को अन्न दान की परंपरा भी कई परिवारों में है। पहले से सामग्री जुटाना सुविधा देता है। खरीदारी को भौतिक सुख से नहीं, कर्म की तैयारी से जोड़ा जाता है।
मूल उद्देश्य स्मरण, तर्पण और श्रद्धापूर्वक कर्म है। मान्यता से ज्यादा यही भाव जरूरी बताया गया है। स्थानीय रीति अलग हो तो उसी के अनुसार फैसला करें।
काले तिल खरीदना क्यों कहा जाता है?
श्राद्ध और तर्पण में काले तिल का विशेष इस्तेमाल होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तिल से पितरों का तर्पण करने का महत्व माना जाता है। तर्पण के दौरान जल में तिल मिलाकर अर्पित किया जाता है। इसलिए पितृपक्ष में काले तिल खरीदकर रखना शुभ माना जाता है।
यह मान्यता है, वैज्ञानिक दावा नहीं। तिल कर्म की सामग्री है। घर में पहले से हो तो नई खरीद जरूरी नहीं। जरूरत हो तो श्राद्ध से पहले रख लेना व्यावहारिक रहता है।
तिल को दान सामग्री से भी जोड़ा जा सकता है, लेकिन स्रोत में मुख्य उपयोग तर्पण और श्राद्ध का ही बताया गया है। भाव पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का है।
कुश और पूजा सामग्री क्या खरीदें?
पितृकर्म में कुश का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है। तर्पण और श्राद्ध के दौरान कुश से संबंधित सामग्री काम आती है। पूजा पाठ की जरूरी वस्तुएं भी जरूरत के अनुसार खरीदी जा सकती हैं।
इन चीजों की खरीद को दिखावा नहीं, धार्मिक तैयारी माना जाता है। जितना कर्म में लगे उतना ही लें। अनावश्यक ढेर लगाने की बात स्रोत में नहीं है।
कुश और पूजा सामान स्थानीय दुकान या मंदिर के पास मिल जाता है। परिवार की विधि के हिसाब से सूची बना लें। परंपरा अलग हो तो उसी सूची को मानें।
अन्न, वस्त्र और दान की चीजें कैसे जुटाएं?
श्राद्ध के लिए चावल, आटा, दाल, फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री की जरूरत पड़ती है। ये सामान्य जरूरत के अनुसार खरीदी जा सकती हैं। कई परिवार श्राद्ध पर भोजन कराने और अन्न दान करने के कारण सामग्री पहले रख लेते हैं।
सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न और उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी है। दान के लिए वस्त्र या जरूरत की चीजें खरीदना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य भाव पितरों के प्रति श्रद्धा और जरूरतमंद की मदद है।
दान की मात्रा घर की क्षमता पर निर्भर करती है। दिखावे से ज्यादा उपयोग और श्रद्धा पर जोर दिया गया है। क्षेत्रीय रीति देखकर वस्तुएं चुनें।
खरीदारी से पहले परिवार की परंपरा क्यों देखें?
अलग अलग इलाकों और घरों में पितृपक्ष की खरीदारी को लेकर रीतियां भिन्न हैं। किसी वस्तु को शुभ या अशुभ कहने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता देखना चाहिए। पितृपक्ष का मूल काम पूर्वजों का स्मरण और तर्पण है।
जरूरत और कर्म से जुड़ी खरीद वर्जित नहीं मानी गई। नई अनावश्यक चीजें कई परिवार टालते हैं। दोनों बातें साथ समझनी चाहिए। श्रद्धा को खरीदारी की सूची से बड़ा माना गया है।
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पक्ष चलेगा। सर्वपितृ अमावस्या पर समापन होगा। इस अवधि में तिल, कुश, अन्न और दान सामग्री जुटाना कई घरों की तैयारी का हिस्सा है। अपनी रीत के हिसाब से सरल सूची बनाएं।
News Desk Declaration / Disclaimer
घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
Read More Here
- Ravivar Puja Vidhi: रविवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है, पूजा विधि और दान की परंपराएं
- 26 September 2026 Current Affairs: SIR पर EC का बड़ा बयान, भारत ने जीता कबड्डी गोल्ड, कई राज्यों में आपदाओं ने मचाई तबाही
- Kal Ka Mausam 27 September 2026: 19 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 85 की स्पीड से चलेगी आंधी, जानें अपने शहर का हाल
- West Bengal Anti-Goonda Bill: राष्ट्रपति मुर्मू ने बंगाल का ‘गुंडा दमन विधेयक’ किया वापस, जानें NDPS एक्ट से टकराव की पूरी वजह

