Vighnaraj Sankashti Chaturthi 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व 29 सितंबर मंगलवार को पड़ रहा है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और गणेश पूजा करने से जीवन की बाधाएं कम होने का विश्वास किया जाता है। सुख समृद्धि की कामना भी इसी पूजा से जोड़ी जाती है। पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कथा सुनने या पढ़ने से पूजा का फल पूरा होता है।
इस पर्व से एक प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग भी जुड़ा है। कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही व्रत रखा था। सवाल यही है कि उन्होंने यह व्रत क्यों रखा और उषा अनिरुद्ध की कहानी इसमें कैसे जुड़ती है।
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब और क्यों मनाई जाती है
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर आती है। 2026 में यह तिथि मंगलवार 29 सितंबर को मनाई जा रही है। संकष्टी चतुर्थी का मूल भाव विघ्न हरने वाले गणेश की आराधना है।
मान्यता के अनुसार इस दिन विधि से व्रत रखने वाले भक्त बाधाओं और संकट से राहत की कामना करते हैं। घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना भी इसी अवसर से जुड़ी हुई है। कथा पाठ को पूजा का आवश्यक हिस्सा माना जाता है, क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा समझा जाता है।
यह जानकारी धार्मिक परंपरा और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसे सामान्य जानकारी के रूप में ही लिया जाना चाहिए।
उषा के स्वप्न से कैसे शुरू हुई यह कथा
पौराणिक कथा के अनुसार दैत्यराज बाणासुर की पुत्री उषा ने एक स्वप्न देखा। स्वप्न में उन्हें एक तेजस्वी राजकुमार दिखाई दिए और उसी स्वप्न में उनका विवाह भी हो गया। नींद खुलने पर राजकुमार उनके पास नहीं थे। इस विरह से उषा व्याकुल रहने लगीं।
उनकी यह हालत देखकर सखी चित्रलेखा ने कारण पूछा। उषा ने स्वप्न सुनाया और कहा कि उस राजकुमार से दोबारा न मिल पाने पर उनका जीवन व्यर्थ लगेगा। चित्रलेखा चित्रकला में निपुण थीं। उन्होंने कई राजकुमारों और वीरों के चित्र बनाकर उषा को दिखाए।
जब उषा की नजर द्वारका के राजकुमार अनिरुद्ध के चित्र पर पड़ी, उन्होंने उन्हें पहचान लिया। उषा ने बताया कि स्वप्न में वही राजकुमार थे। अनिरुद्ध भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र और प्रद्युम्न के पुत्र थे। यहीं से कथा आगे बढ़ती है और दो नगरों की घटना एक दूसरे से जुड़ जाती है।
चित्रलेखा अनिरुद्ध को शोणितपुर कैसे ले गईं
उषा की इच्छा पूरी करने के लिए चित्रलेखा ने अपनी मायावी विद्या का प्रयोग किया। वह द्वारका पहुंचीं और वहां से अनिरुद्ध को बाणासुर की नगरी शोणितपुर ले आईं। इसके बाद अनिरुद्ध को उषा के महल में पहुंचा दिया गया।
द्वारका में अनिरुद्ध अचानक गायब हो गए। परिवार और सैनिक चिंतित हो गए। उनकी खोज शुरू हुई, लेकिन प्रयासों के बावजूद पता नहीं चला कि वे कहां हैं। लापता होने की यह घटना श्रीकृष्ण तक पहुंची और संकट गहराता दिखा।
यही वह मोड़ है जहां कथा केवल प्रेम प्रसंग नहीं रह जाती। राजकुमार के गायब होने से द्वारका में चिंता फैल गई और समाधान के लिए धार्मिक उपाय की बात उठी।
श्रीकृष्ण ने विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत क्यों रखा
अनिरुद्ध के लापता होने का कारण जानने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ऋषि लोमश से मार्गदर्शन मांगा। लोमश ऋषि ने दिव्य दृष्टि से बताया कि अनिरुद्ध बाणासुर की नगरी में हैं।
ऋषि ने श्रीकृष्ण को सलाह दी कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखें। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश की पूजा और व्रत से इस संकट का समाधान संभव है। श्रीकृष्ण ने ऋषि के बताए अनुसार विधि विधान से व्रत रखा और गणेश पूजा की।
कथा के अनुसार गणेश जी की कृपा से श्रीकृष्ण अनिरुद्ध को वापस लाने में सफल हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण और बाणासुर के बीच युद्ध हुआ। युद्ध में बाणासुर पराजित हुए। अनिरुद्ध सकुशल द्वारका लाए गए। इसके बाद उषा और अनिरुद्ध का विवाह संपन्न हुआ।
इस प्रसंग से जुड़ी मान्यता यही है कि जब मार्ग में विघ्न खड़ा हो, तब गणेश आराधना से रास्ता खुल सकता है। विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026 पर यही कथा इसलिए दोहराई जाती है कि भक्त व्रत का आशय समझ सकें।
कथा पाठ और पूजा का धार्मिक महत्व क्या माना जाता है
धार्मिक विश्वास के अनुसार इस दिन केवल व्रत रखना काफी नहीं माना जाता। पूजा के दौरान कथा का पाठ भी शुभ फल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि कथा पाठ से सकारात्मक भाव बढ़ता है और पूजा पूरी मानी जाती है।
गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसीलिए संकट और अटकन दूर करने की कामना रखने वाले इस तिथि पर विशेष रूप से पूजा करते हैं। उषा अनिरुद्ध की कथा में भी संकट के बाद समाधान गणेश कृपा से जुड़ा बताया गया है। इसलिए भक्त इस कथा को व्रत का केंद्र मानते हैं।
पूजा का व्यावहारिक अर्थ घर में यही लिया जाता है कि दिन की कथा सुनकर व्रत पूरा किया जाए। कोई अतिरिक्त दावा स्रोत में नहीं है, इसलिए तिथि, कथा और मान्यता तक ही बात सीमित रखनी चाहिए। यह विवरण धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। सामान्य जानकारी के तौर पर ही समझें।
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026 का सबसे स्पष्ट समाचार यही है कि पर्व मंगलवार 29 सितंबर को है, यह गणेश को समर्पित है और इससे जुड़ी कथा श्रीकृष्ण के व्रत तथा उषा अनिरुद्ध प्रसंग पर टिकी है। जो पाठक कथा जानकर व्रत करना चाहते हैं, उनके लिए यही प्रसंग पूजा का आधार माना जाता है।
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घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
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