National Teacher Award: राजौरी जिले के मुहम्मद अयाज रैना को वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में बॉटनी के लेक्चरर अयाज रैना को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पांच सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में यह सम्मान दिया। शिक्षा मंत्रालय की सूची में वह जम्मू-कश्मीर से चुने गए शिक्षक हैं।
यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली। 1993 से शुरू हुए उनके शिक्षकीय सफर में तकनीक के इस्तेमाल, प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा और दूरदराज के विद्यार्थियों तक अच्छी पढ़ाई पहुंचाने की कोशिशें शामिल रही हैं। इसी वजह से आज वह देश के चुनिंदा शिक्षकों में गिने जा रहे हैं।
National Teacher Award: बचपन से शिक्षा की ओर बढ़ता सफर
मुहम्मद अयाज रैना मूल रूप से थन्नामंडी क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने राजौरी के सरकारी डिग्री कॉलेज से स्नातक किया और इसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बॉटनी में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ उन्होंने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी यानी आईसीटी में भी दक्षता विकसित की।
विद्यार्थी से शिक्षक बनने के दौरान उन्होंने समझा कि सिर्फ किताबों से विज्ञान पढ़ाने पर बच्चों की जिज्ञासा पूरी तरह नहीं जागती। उनका मानना रहा कि पौधे, प्रकृति और आसपास का पर्यावरण ही सबसे अच्छी प्रयोगशाला बन सकते हैं। आगे चलकर यही सोच उनकी शिक्षण शैली की पहचान बनी।
11 फरवरी 1993 से शुरू हुआ शिक्षकीय सफर
अयाज रैना ने 11 फरवरी 1993 को शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की। बाद में उन्होंने बॉटनी के शिक्षक और लेक्चरर के तौर पर काम करते हुए सरकारी स्कूलों में विज्ञान शिक्षा को असरदार बनाने पर जोर दिया।
तीन दशक से ज्यादा के इस दौर में उन्होंने उस समय भी पढ़ाया, जब सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधन आज जैसे आसानी से उपलब्ध नहीं थे। जब स्मार्ट क्लास और ई-लर्निंग का चलन शुरू हुआ, तो उन्होंने खुद को नई तकनीक के हिसाब से ढाल लिया।
थन्नामंडी में कंप्यूटर लैब की स्थापना
उनके करियर का अहम अध्याय सरकारी ब्वायज हायर सेकेंडरी स्कूल थन्नामंडी से जुड़ा है। यहां उन्होंने स्कूल की पहली समर्पित कंप्यूटर लैब स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत 14 कंप्यूटर सिस्टम जुटाए गए, जबकि छह अतिरिक्त सिस्टम स्कूल शिक्षा विभाग ने उपलब्ध कराए।
दूरदराज के सरकारी स्कूल में कंप्यूटर लैब खड़ी करना अपने आप में बड़ी पहल थी। रैना ने तकनीक को सिर्फ मशीनों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ई-कंटेंट, वर्चुअल सिमुलेशन, ऑनलाइन असेसमेंट, डिजिटल सामग्री और वर्चुअल प्रयोगशालाओं को पढ़ाई का हिस्सा बनाया।
बॉटनी को किताब से निकालकर प्रकृति तक ले गए
अयाज रैना के लिए बॉटनी केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं रही। उन्होंने आसपास की वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों को विद्यार्थियों के लिए जीवंत अध्ययन सामग्री बना दिया। स्थानीय पौधों पर फील्ड स्टडी कराकर उन्होंने बच्चों को पौधे पहचानने और उनके गुण समझने के लिए प्रेरित किया।
इससे बॉटनी रटने का विषय न रहकर निरीक्षण, प्रयोग और जिज्ञासा का विषय बन गई। सीमित संसाधनों वाले स्कूलों में स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सामग्री से प्रयोग कराने पर भी उन्होंने जोर दिया।
दूरदराज के बच्चों के लिए बने वर्चुअल शिक्षक
जम्मू संभाग के दूरदराज हायर सेकेंडरी स्कूलों में जब विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी सामने आई, तो स्कूल शिक्षा विभाग ने अयाज रैना की सेवाओं का उपयोग किया। उन्हें कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीयकृत वर्चुअल बॉटनी कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी दी गई।
इस पहल से उन विद्यार्थियों तक भी विशेषज्ञ की कक्षाएं पहुंच सकीं, जो भौगोलिक हालात के कारण बड़े शिक्षा केंद्रों से दूर थे। शिक्षक की भूमिका एक स्कूल तक सीमित न रहे, यह उनके काम का अहम पहलू रहा।
शिक्षकों को प्रशिक्षण और ई-कंटेंट का काम
अयाज रैना ने खुद तकनीक सीखने के साथ दूसरे शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया। वह एससीईआरटी जम्मू और डीआईईटी समेत कई शैक्षणिक संस्थानों के लिए रिसोर्स पर्सन और मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करते रहे हैं। उन्होंने सैकड़ों शिक्षकों, मास्टरों और लेक्चररों को आईसीटी आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने डिजिटल लर्निंग सामग्री, इंटरएक्टिव प्रेजेंटेशन, शैक्षिक वीडियो, ऑनलाइन क्विज और वर्चुअल लैब डेमो भी तैयार किए। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, डिजिटल नागरिकता, साइबर बुलिंग और गलत सूचना जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाई। जम्मू-कश्मीर नॉलेज नेटवर्क, आईएलएम-कोश और राष्ट्रीय दीक्षा पोर्टल के लिए भी उन्होंने डिजिटल सामग्री बनाई।
कक्षा के बाहर समाज से जोड़ी शिक्षा
अयाज रैना ने विद्यार्थियों को सिर्फ परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रखा। स्वच्छ भारत अभियान, मतदाता जागरूकता, एंटी-प्लास्टिक अभियान, नशा विरोधी जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण जैसी गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी को उन्होंने शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया।
उनके काम को पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती रही है। उन्हें 2017 का राष्ट्रीय आईसीटी पुरस्कार मिला, जो 2019 में प्रदान किया गया। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर यूटी बेस्ट टीचर अवार्ड 2021, ग्लोबल टीचर अवार्ड 2021 और ग्लोबल बेस्ट एजुकेशनल पोस्टर अवार्ड 2020 भी उनके खाते में हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार बना सबसे बड़ा पड़ाव
शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए देशभर से 48 शिक्षकों का चयन किया। चयन प्रक्रिया जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के तीन चरणों में पूरी हुई। आधिकारिक सूची में अयाज रैना जम्मू-कश्मीर के शिक्षक के रूप में शामिल रहे।
राजौरी लौटने पर जिला प्रशासन ने भी उनका सम्मान किया। उपायुक्त अभिषेक शर्मा ने इसे राजौरी और पूरे पीर पंजाल क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताया और उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुस्तक विंग्स ऑफ फायर भेंट की। अयाज रैना ने इसे अपनी निजी उपलब्धि के बजाय विद्यार्थियों, सहकर्मियों, संस्थान और शिक्षा विभाग का सामूहिक सम्मान बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहचान दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के शिक्षकों और बच्चों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देगी।
मुहम्मद अयाज रैना की कहानी सिर्फ एक पुरस्कार की नहीं, बल्कि बदलाव की मिसाल है। 1993 से पढ़ा रहे इस शिक्षक ने थन्नामंडी में कंप्यूटर लैब बनवाई, बॉटनी को प्रकृति से जोड़ा, सैकड़ों शिक्षकों को प्रशिक्षित किया और वर्चुअल कक्षाओं के जरिए दूरदराज के विद्यार्थियों तक पहुंचे। पांच सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार इसी लंबे सफर की पहचान है। उनकी यात्रा बताती है कि शिक्षा में बदलाव सिर्फ बड़े शहरों से नहीं, किसी दूरदराज सरकारी स्कूल की साधारण कक्षा से भी शुरू हो सकता है।
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Sanjana Gupta
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