MP News: मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर आरोप लगाया है कि आदिवासी विकास के बड़े दावे कागजों तक सिमटे हैं। उनके मुताबिक स्वास्थ्य, रोजगार और शिक्षा जमीन पर नहीं दिखते। उन्होंने हर साल हजारों करोड़ खर्च के बावजूद कुपोषण न हटने पर श्वेत पत्र सार्वजनिक करने को कहा।
पटवारी ने छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत, बालाघाट में कुपोषण मलेरिया और खसरा से हुई मौतें, सागर में जहरीली शराब और इंदौर में दूषित पानी से जान जाने का जिक्र किया। ये उनके द्वारा गिनाए गए उदाहरण हैं। अलग अलग मामलों की न्यायिक स्थिति इस सामग्री में विस्तार से नहीं है।
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को भाजपा राजनीति बता रही है। पटवारी का जवाब है कि कांग्रेस जिम्मेदारी निभा रही है और सवाल सरकार की मौजूदगी पर है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के दौरे गिनाने को कहा।
जीतू पटवारी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि सरकार आदिवासियों के विकास के दावे तो करती है, हकीकत अलग है। स्वास्थ्य सुविधा नहीं, रोजगार नहीं, शिक्षा नहीं। उन्होंने विकास को कागजों तक सीमित बताया। यह विपक्षी आरोप है। सरकार का पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे राजनीति नहीं करना चाहते। फिर भी प्रदेश की जनता को श्वेत पत्र से जवाब मिलना चाहिए। सवाल ये रखे गए कि हजारों करोड़ का बजट हर साल खर्च होने के बाद कुपोषण दूर क्यों नहीं हुआ। आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं पहुंची। स्कूलों में शिक्षक क्यों नहीं हैं। डॉक्टरों का अभाव क्यों है। आदिवासियों पर अत्याचार क्यों हो रहे हैं।
श्वेत पत्र की मांग आंकड़े और योजनाओं का हिसाब सार्वजनिक करने जैसी है। कांग्रेस इसे जवाबदेही बता रही है। सत्ता पक्ष इसे दबाव या चुनावी मुद्दा कह सकता है। फिलहाल केवल मांग दर्ज है। जारी श्वेत पत्र का जिक्र स्रोत में नहीं है।
किन घटनाओं का हवाला दिया गया?
पटवारी ने चार जगहों का नाम लिया। छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत। बालाघाट में कुपोषण, मलेरिया और खसरे से बच्चे मरे। सागर में जहरीली शराब से मौत। इंदौर में दूषित पानी से लोग मरे। वे इन घटनाओं को शासन की नाकामी से जोड़ रहे हैं।
बालाघाट वाला संदर्भ राहुल गांधी के दौरे से जुड़ा है। संबंधित खबर में दौरे से पहले एक और बच्ची की मौत और जिला अस्पताल में भर्ती रहने का जिक्र है। पटवारी बैगा आदिवासी बच्चों के स्वजन से मुलाकात वाले एजेंडे का बचाव कर रहे हैं। मौतों की ताजा अधिकारिक गिनती इस बयान में नहीं दी गई।
ये गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य विषय हैं। विपक्ष उन्हें सत्ता की जिम्मेदारी से बांधता है। जांच, मुआवजा और सुधार अलग प्रक्रियाएं हैं। इस लेख का दायरा पटवारी के आरोप और मांग तक है, किसी मुकदमे का फैसला नहीं।
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर क्या कहा?
भाजपा दौरे को राजनीति बता रही है। पटवारी ने कहा कि हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं लेकिन सरकार कहां है। उन्होंने पूछा कि स्वास्थ्य मंत्री कितनी बार आए और मुख्यमंत्री कहां कहां गए। उनके अनुसार राहुल गांधी आदिवासियों के दर्द को समझने और देश के सामने लाने आ रहे हैं। सरकार को जगाने और दायित्व याद दिलाने के लिए आ रहे हैं।
दौरा बैगा बच्चों के परिवारों से मुलाकात से जुड़ा बताया गया है। कांग्रेस इसे संवेदना और निगरानी बता रही है। भाजपा इसे चुनावी इस्तेमाल कह रही है। दोनों दावे राजनीतिक हैं। परिवारों की पीड़ा अलग तथ्य है, दौरे की मंशा पर सहमति नहीं है।
विपक्ष के प्रदेश अध्यक्ष जब राष्ट्रीय नेता के दौरे का बचाव करते हैं तो संगठन संदेश साफ होता है। मुद्दा कुपोषण और बीमारी रखा गया है। चुनावी आरोप पीछे चल रहे हैं। पाठक दोनों परतें अलग रख सकते हैं।
श्वेत पत्र से कांग्रेस क्या चाहती है?
पटवारी के सवाल बजट, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षक और डॉक्टर की कमी तथा अत्याचार पर केंद्रित हैं। श्वेत पत्र से वे खर्च बनाम नतीजा दिखाना चाहते हैं। आदिवासी इलाकों की बदहाली का दस्तावेज मांगने का मतलब आंकड़े सार्वजनिक करवाना है। कांग्रेस का आरोप है कि दावा बड़ा है, नतीजा कम है।
सरकार योजनाओं की सूची जारी कर जवाब दे सकती है। इस सामग्री में ऐसा जवाब नहीं है। इसलिए बहस एकतरफा दिखेगी जब तक मंत्रालय या मुख्यमंत्री कार्यालय बोलें। विपक्ष का काम सवाल उठाना है। सत्ता का काम आंकड़े रखना है। दोनों का मिलान पाठक बाद में कर सकता है।
शिक्षक और डॉक्टर की कमी पुरानी शिकायत रही है। कुपोषण भी लंबे समय से आदिवासी बेल्ट की खबरों में आता है। पटवारी इन्हें मौजूदा सरकार के खाते में लिख रहे हैं। समय और कारण कितने पुराने हैं, यह श्वेत पत्र या स्वतंत्र आंकड़े बताएंगे।
इस बयान का सियासी मतलब क्या है?
बालाघाट दौरे से पहले प्रदेश अध्यक्ष का हमला मंच तैयार करता है। राहुल गांधी परिवारों से मिलें, कांग्रेस शासन से हिसाब मांगे। भाजपा राजनीति का आरोप लगाए। यही चक्र मध्य प्रदेश की आदिवासी बेल्ट में चल रहा है।
आरोप स्वास्थ्य और पोषण जैसे मुद्दों पर हैं, इसलिए संवेदनशील हैं। बच्चों की मौत को नारे की भाषा में न घसीटना चाहिए। पटवारी ने श्वेत पत्र और मंत्री मुख्यमंत्री की उपस्थिति का सवाल चुना। सरकार जवाब दे तो तुलना हो सकेगी। नहीं दे तो आरोप हवा में लटकेंगे।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का निशाना साफ है। विकास के दावे बनाम कुपोषण, स्कूल और अस्पताल। राहुल गांधी के दौरे को जिम्मेदारी बताया गया है। श्वेत पत्र की मांग दर्ज हो गई है। आगे सरकार बोलती है या चुप रहती है, वही अगली कड़ी है।
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