Top 5 This Week

Related Posts

CG News: रायपुर में बिजली कर्मचारियों का OPS प्रदर्शन, 18 नवंबर तक लिखित आदेश का अल्टीमेटम

CG News: छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनियों में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग सोमवार को रायपुर की सड़क पर उतरी। विद्युत अधिकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन अधिकार मंच के नेतृत्व में 12 संगठनों की महारैली और आमसभा हुई। प्रदेशभर से हजारों अधिकारी और कर्मचारी राजधानी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पावर कंपनी प्रबंधन से साफ कहा कि अब आश्वासन नहीं, पुरानी पेंशन लागू करने का अंतिम लिखित आदेश चाहिए।

मंच ने अगला कदम भी बता दिया। यदि जल्द ठोस आदेश नहीं निकला, तो 18 नवंबर 2026 को 12 संगठनों से जुड़े सभी अधिकारी कर्मचारी सामूहिक मास अवकाश पर रहेंगे। उसके बाद आंदोलन को और व्यापक तथा चरणबद्ध तरीके से तेज करने की बात कही गई।

यह प्रदर्शन एक दिन की भीड़ तक सीमित नहीं था। कर्मचारी 6 अक्टूबर 2023 को ऊर्जा विभाग की सैद्धांतिक सहमति का हवाला दे रहे हैं। तीन साल बीतने के बाद भी अंतिम आदेश नहीं आया, इसी लंबन को उन्होंने नाराजगी की मुख्य वजह बताया।

रायपुर की महारैली में क्या हुआ?

राज्य ब्यूरो की खबर के अनुसार बिजली कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना लागू कराने के लिए राजधानी में शक्ति प्रदर्शन किया। महारैली और आमसभा का आयोजन विद्युत अधिकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन अधिकार मंच ने किया। इसमें 12 संगठन शामिल थे और प्रदेश के अलग अलग इलाकों से हजारों लोग पहुंचे।

रैली के दौरान दो नारे बार बार सुनाई दिए। एक था पुरानी पेंशन हमारा अधिकार है, लेकर रहेंगे। दूसरा था आश्वासन नहीं, अब आदेश चाहिए। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि विद्युतकर्मी कठिन परिस्थितियों में दिन रात सेवा देते हैं, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा उनका अधिकार है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।

आमसभा का मतलब था कि मांग केवल बैनर तक नहीं रही। वक्ताओं ने प्रबंधन और सरकार दोनों को संबोधित किया। उनका जोर इस बात पर था कि मौखिक भरोसा अब काफी नहीं। उन्हें लागू करने वाला लिखित आदेश चाहिए, ताकि पेंशन का सवाल फाइलों में अटका न रहे।

2023 की सैद्धांतिक सहमति का क्या हवाला दिया गया?

अभियंता संघ के महासचिव मनोज वर्मा समेत अन्य वक्ताओं ने 6 अक्टूबर 2023 का जिक्र किया। उस दिन ऊर्जा विभाग ने विद्युत कंपनियों में पुरानी पेंशन लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति दी थी। कर्मचारी कह रहे हैं कि सहमति के तीन साल बाद भी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ।

बैठकें हुईं और आश्वासन भी मिले, फिर भी निर्णय लंबित है। इसी लंबन से कर्मचारियों में भारी नाराजगी बताई गई। सैद्धांतिक सहमति और अंतिम आदेश के बीच का यही फासला महारैली का केंद्र था। मंच की मांग है कि उस सहमति को तत्काल अंतिम आदेश में बदला जाए और योजना लागू करने के लिए समयबद्ध निर्णय लिया जाए।

कर्मचारियों के लिए यह अंतर व्यावहारिक है। सैद्धांतिक हामी से पेंशन नहीं बदलती। जब तक कंपनी स्तर पर लागू करने वाला आदेश नहीं निकलता, सेवानिवृत्ति के बाद की सामाजिक सुरक्षा का दावा कागज पर ही रहता है। रायपुर की आमसभा में वक्ताओं ने इसी अधूरे फैसले को तीन साल पुराना बताया।

18 नवंबर को मास अवकाश की चेतावनी क्यों दी गई?

महारैली में आंदोलन का अगला चरण भी घोषित किया गया। मंच ने चेतावनी दी कि यदि जल्द पुरानी पेंशन लागू करने का ठोस आदेश नहीं निकला, तो 18 नवंबर 2026 को 12 संगठनों से जुड़े सभी अधिकारी कर्मचारी सामूहिक मास अवकाश पर रहेंगे। इसके बाद आंदोलन को और व्यापक और चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।

मास अवकाश का ऐलान मांग को समय से जोड़ता है। सोमवार का प्रदर्शन चेतावनी था, 18 नवंबर को बताई गई तारीख अगली सीमा है। मंच ने यह नहीं कहा कि आदेश निकल चुका है। चेतावनी शर्त के साथ है। ठोस लिखित आदेश नहीं आया, तो अवकाश होगा। आदेश आ गया, तो यह चरण टल सकता है, ऐसी बात मंच की चेतावनी के स्वरूप से निकलती है।

12 संगठनों का एक साथ अवकाश बिजली कंपनियों की रोजमर्रा की सेवा से जुड़ा सवाल है। विद्युतकर्मी खुद कह रहे हैं कि वे कठिन परिस्थितियों में दिन रात काम करते हैं। उसी कार्यबल के सामूहिक अवकाश का अल्टीमेटम इसलिए दिया गया, ताकि लंबित आदेश पर दबाव बने। आंदोलन को चरणबद्ध बढ़ाने की बात का अर्थ है कि 18 नवंबर के बाद भी कार्यक्रम रुकने नहीं दिए जाएंगे, यदि मांग अधूरी रही।

कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा को अपना अधिकार क्यों बता रहे हैं?

पदाधिकारियों ने सेवानिवृत्ति के बाद की सामाजिक सुरक्षा को हक करार दिया। उनका तर्क है कि विद्युतकर्मी मुश्किल हालात में सेवा देते हैं, इसलिए पुरानी पेंशन मांगना अतिरिक्त सुविधा नहीं, अधिकार है। नारे में भी यही बात थी कि पुरानी पेंशन हमारा अधिकार है, लेकर रहेंगे।

दूसरी तरफ कर्मचारी यह भी कह रहे हैं कि आवाज लगातार उठ रही है, सुनवाई नहीं हो रही। 2023 की सहमति, बाद की बैठकें और बार बार मिले आश्वासन उनके अनुसार सुनवाई की जगह नहीं ले सके, क्योंकि अंतिम आदेश नहीं आया। नाराजगी का आधार नया वादे का टूटना नहीं, पुराने वादे का कागज पर अटके रहना बताया गया।

सरकार या प्रबंधन की तरफ से इस महारैली पर कोई ताजा जवाब इस खबर में दर्ज नहीं है। मांग, नारे और अल्टीमेटम प्रदर्शनकारियों तथा मंच के हैं। सैद्धांतिक सहमति का हवाला वक्ताओं ने ऊर्जा विभाग के 6 अक्टूबर 2023 के रुख के रूप में दिया। अंतिम आदेश अब भी लंबित है, यह कर्मचारी पक्ष का दावा है।

अब आगे क्या हो सकता है?

मंच चाहता है कि सैद्धांतिक सहमति तत्काल अंतिम आदेश बने और लागू करने की समयसीमा तय हो। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो 18 नवंबर 2026 को 12 संगठनों का सामूहिक मास अवकाश प्रस्तावित है। उसके बाद आंदोलन को व्यापक और चरणबद्ध करने की घोषणा हो चुकी है।

रायपुर की महारैली में हजारों अधिकारी कर्मचारी जुटे थे। नारे आश्वासन और आदेश के फर्क पर टिके रहे। मनोज वर्मा समेत वक्ताओं ने तीन साल के इंतजार को नाराजगी की वजह बताया। बिजली कंपनियों के कर्मचारियों के लिए अगली स्पष्ट तारीख 18 नवंबर है। तब तक मांग वही है, पुरानी पेंशन का लिखित और अंतिम आदेश।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles