Health Tips: सीने में जलन, खट्टी डकार और पेट फूलना अक्सर मामूली गैस मान लिया जाता है। एंटासिड लेकर लोग भूल जाते हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंसल्टेंट डॉक्टर शिवम कालिया के अनुसार बार-बार होने वाली एसिडिटी हमेशा मसाले या तनाव से नहीं आती। पेट की अंदरूनी परत में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) नाम का बैक्टीरिया भी वजह हो सकता है। महीनों तक लक्षण रहें तो जांच कराना उचित है।
यह बैक्टीरिया पेट की परत में घुसकर उसे धीरे नुकसान पहुंचाता है। इससे एसिडिटी, अल्सर और लगातार जलन हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे पेट के कैंसर के एक बड़े कारण के रूप में माना है। समय पर इलाज न हो तो गैस्ट्रिक कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। लक्षण को सिर्फ गैस समझकर टालना सही नहीं।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी पेट में क्या करता है?
बैक्टीरिया पेट की भीतरी परत में टिककर उसे कमजोर करता है। एसिड की जलन बढ़ती है और छाले यानी अल्सर बन सकते हैं। शुरुआत में खट्टी डकार और भारीपन ही दिखते हैं, इसलिए लोग एंटासिड पर निर्भर रह जाते हैं। दवा से राहत कुछ घंटे की होती है, जड़ बनी रहती है। डॉक्टर का कहना है कि बार-बार वही शिकायत लौटे तो कारण पेट के अंदर भी खोजा जाए।
किन लक्षणों पर सावधान होना चाहिए?
महीनों से बार-बार एसिडिटी, खाने के बाद लगातार भारीपन, बिना वजह वजन घटना, काला मल या खून आना और भूख में अचानक कमी चेतावनी हैं। ये लक्षण लंबे समय तक रहें तो इन्हें मामूली गैस न मानें। काला मल या खून आने पर देर नहीं करनी चाहिए। वजन और भूख का अचानक गिरना भी जांच का आधार है।
एक-दो दिन की जलन चिंता नहीं है। पैटर्न जब हफ्तों और महीनों का हो जाए, तब डॉक्टर से बात करें। खुद एंटीबायोटिक शुरू करना ठीक नहीं।
बैक्टीरिया का पता कैसे चलता है?
घबराने की जरूरत नहीं। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी का पता साधारण सांस टेस्ट (ब्रीथ टेस्ट), खून की जांच या एंडोस्कोपी से लगाया जा सकता है। बैक्टीरिया मिल जाए तो एंटीबायोटिक के छोटे कोर्स से इलाज संभव बताया गया है। कोर्स डॉक्टर लिखेगा। बीच में दवा रोकने से बैक्टीरिया वापस आ सकता है।
टेस्ट का चुनाव लक्षण और उम्र पर निर्भर करता है। ब्रीथ टेस्ट गैर-आक्रामक है। एंडोस्कोपी तब सुझाई जाती है, जब अल्सर या दूसरी वजह देखनी हो। रिपोर्ट आने के बाद ही दवा का निर्णय होता है।
एंडोस्कोपी कैंसर की शुरुआती पहचान में कैसे मदद करती है?
आज की एडवांस्ड एंडोस्कोपी, जैसे एनबीआई और हाई-डेफिनिशन तकनीक, पेट के कैंसर को शुरुआती चरण में पकड़ सकती है। उस स्टेज पर इलाज आसान और ज्यादा असरदार माना जाता है। लगातार लक्षण रहने पर समय पर एंडोस्कोपी जान बचा सकती है, यह डॉक्टर की सलाह है। हर एसिडिटी पर तुरंत स्कोपी जरूरी नहीं, पर लंबे लक्षण पर देरी महंगी पड़ सकती है।
एंटासिड पर निर्भर रहना क्यों काफी नहीं?
गोली जलन दबा देती है, बैक्टीरिया नहीं हटाती। बार-बार वही चक्र लौटे तो शरीर का संकेत है। जांच कराना समझदारी है। सांस टेस्ट, खून या एंडोस्कोपी में से डॉक्टर सही रास्ता बताएगा। पॉजिटिव रिपोर्ट पर एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करें।यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। डाइट बदलने या दवा शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। लक्षण की पुष्टि केवल जांच से होती है, अनुमान से नहीं।
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