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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में मदन मोहन पांडेय को बैंकिंग व लेखा की जिम्मेदारी, वित्तीय निगरानी पर नया जोर

Ayodhya Ram Mandir News: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नवनियुक्त सदस्यों के बीच कार्यक्षेत्र साफ करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। ट्रस्ट के नए सदस्य मदन मोहन पांडेय को बैंकिंग और लेखा व्यवस्था से जुड़े कामों की देखरेख सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक वे ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, बैंक संबंधी प्रक्रियाओं और खाता-बही की व्यवस्था पर नजर रखेंगे तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय का काम भी संभालेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्रस्ट चढ़ावे की रकम से जुड़े मामले के बाद अपनी आंतरिक निगरानी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि नए सदस्यों के आने के बाद जिम्मेदारियों का बंटवारा चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। बैंकिंग और लेखा वाले हिस्से को अलग से चिह्नित करने का मकसद यही है कि धन के आने-जाने का रिकॉर्ड एक ही जगह केंद्रित रहे और किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश कम हो। पांडेय की भूमिका मुख्य रूप से निगरानी और समन्वय की बताई जा रही है, न कि रोजमर्रा के लेखांकन का सीधा संचालन।

मदन मोहन पांडेय को ट्रस्ट में कौन-सा काम सौंपा गया है?

मदन मोहन पांडेय को बैंकिंग प्रक्रियाओं और लेखा व्यवस्था की निगरानी का जिम्मा मिला है। इसके तहत बैंक खातों से जुड़े लेन-देन, चढ़ावे की राशि के जमा होने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच जैसे काम उनके समन्वय में आएंगे। ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार वित्तीय कार्यों का नया विभाजन किया जा रहा है ताकि हर क्षेत्र की जवाबदेही स्पष्ट रहे। पहले इन कामों में पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका प्रमुख मानी जाती रही है। अब नए सदस्यों के बीच अलग-अलग व्यवस्थाएं बांटी जा रही हैं, ताकि एक व्यक्ति पर निर्भरता कम हो और सामूहिक निगरानी बढ़े।

यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट के अंदर यह चर्चा है कि बैंकिंग और लेखा को लेकर दिशा-निर्देश और सख्त किए जाएं तथा समय-समय पर आंतरिक समीक्षा हो। पांडेय की नियुक्ति इसी क्रम में देखी जा रही है।

चढ़ावे की राशि वाले मामले के बाद निगरानी क्यों बढ़ाई जा रही है?

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े चोरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने अपनी आंतरिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर दोबारा गौर करना शुरू किया। इसी सिलसिले में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करने का काम चल रहा है। बैंकिंग और लेखा क्षेत्र को प्राथमिकता देना इसी प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। ट्रस्ट का रुख यह है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित राशि का हिसाब-किताब पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी स्तर पर सेंध की आशंका न रहे।

मामले की जांच अलग से चल रही है, लेकिन ट्रस्ट स्तर पर प्रक्रियागत कमियों को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। नए सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की जा सकती हैं।

सुभाष श्रीवास्तव की जमानत याचिका पर सुनवाई क्यों टली?

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में जेल में बंद गणना प्रभारी रहे आरोपी सुभाष श्रीवास्तव की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई होनी थी। अभियोजन पक्ष की ओर से मौका प्रार्थना पत्र दिए जाने के कारण अदालत ने उस दिन याचिका पर विचार नहीं किया। सुनवाई टाल दी गई है और अगली तारीख अदालत तय करेगी। इस मामले में आरोपी लंबे समय से हिरासत में हैं और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

ट्रस्ट के वित्तीय ढांचे में हो रहे बदलाव और इस मामले की सुनवाई दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन दोनों का संदर्भ चढ़ावे की राशि की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। ट्रस्ट सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि अदालती कार्यवाही अपने स्तर पर चल रही है, जबकि आंतरिक जिम्मेदारियों का बंटवारा प्रशासनिक फैसला है।

ट्रस्ट में जिम्मेदारियों का बंटवारा किस आधार पर हो रहा है?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हाल में नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद कार्यों का पुनर्वितरण तेज हुआ है। बैंकिंग और लेखा के अलावा अन्य व्यवस्थाओं पर भी विचार चल रहा है। सूत्रों के अनुसार मकसद यह है कि हर महत्वपूर्ण क्षेत्र की देखरेख किसी न किसी सदस्य के पास स्पष्ट रूप से रहे। इससे निर्णय लेने में देरी कम होने और जवाबदेही तय करने में आसानी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

डॉ. अनिल मिश्रा की पहले की भूमिका को ध्यान में रखते हुए नए ढांचे में कार्यों को बांटा जा रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि यह प्रक्रिया सामान्य प्रशासनिक पुनर्व्यवस्था का हिस्सा है और मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों को और व्यवस्थित करने के लिए उठाया गया कदम है।

आगे ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था में क्या बदलाव संभव हैं?

अभी पांडेय को बैंकिंग और लेखा की निगरानी सौंपी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा भी हो सकती है। चढ़ावे की राशि के संग्रह, गणना, जमा और ऑडिट जैसे चरणों पर अलग-अलग नजर रखने की बात कही जा रही है। ट्रस्ट इस दिशा में आंतरिक दिशा-निर्देश तैयार करने पर भी विचार कर रहा है।

अयोध्या राम मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में चढ़ावा आता है। ऐसे में वित्तीय लेन-देन की निगरानी को मजबूत करना ट्रस्ट की प्राथमिकताओं में शामिल है। मदन मोहन पांडेय की नई जिम्मेदारी इसी प्राथमिकता के तहत देखी जा रही है। आगे की कार्यवाही और अन्य सदस्यों के बीच बंटवारे का विवरण ट्रस्ट की ओर से औपचारिक रूप से सामने आने की प्रतीक्षा है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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