ADAS बस चालक को किन खतरों की चेतावनी देगा?
ADAS संभावित टक्कर, ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहन और लेन बदलने की स्थिति पर ड्राइवर को सावधान करेगा। आपात ब्रेकिंग में सहायता, रिवर्स पार्किंग और आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में भी यह सिस्टम मदद करेगा। शहरी रूट पर अचानक रुकने वाले ऑटो, दोपहिया और पैदल यात्री आम हैं, इसलिए आगे की दूरी और पिछली तरफ का अलर्ट दोनों उपयोगी माने जा रहे हैं।
चेतावनी का मतलब अपने आप ब्रेक लगना हर स्थिति में नहीं है। अंतिम नियंत्रण ड्राइवर के पास रहेगा। सिस्टम की सटीकता कैमरा, सेंसर और सॉफ्टवेयर अपडेट पर निर्भर करेगी। धूल, भारी बारिश या खराब कैमरा एंगल से अलर्ट छूट भी सकता है।
DFMS थकान और ध्यान भटकने पर कैसे काम करेगा?
Driver Fatigue and Monitoring System ड्राइवर की थकान, ध्यान भटकने और ऊंघने के संकेत देखेगा। यदि सिस्टम को लगे कि चालक पूरी तरह सतर्क नहीं है, तो अलर्ट भेजेगा। लंबी शिफ्ट और बार-बार रुकने वाले शहरी रूट पर यह निगरानी दुर्घटना का जोखिम कम करने के लिए जोड़ी जा रही है।
अलर्ट के बाद ड्राइवर को क्या करना होगा, डिपो में अनिवार्य विश्राम होगा या नहीं, और कितनी बार चेतावनी पर कार्रवाई होगी, इन नियमों का विस्तृत प्रोटोकॉल अभी सार्वजनिक विवरण में नहीं है। सिर्फ उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं, शिफ्ट और रेस्ट पॉलिसी भी साथ चलनी चाहिए।
पहला चरण सिर्फ तीन शहरों तक क्यों सीमित है?
अधिकारियों ने पहले चरण का दायरा भुवनेश्वर, कटक और पुरी की 270 इलेक्ट्रिक बसों तक बताया है। ये CRUT के व्यस्त शहरी और अंतरनगरीय कॉरिडोर हैं, जहां यात्री संख्या और ट्रैफिक घनत्व दोनों अधिक हैं। रुपाली स्क्वायर वाली घटना भी इसी संचालन क्षेत्र से जुड़ी बताई गई।
बाकी शहरों की बसों में यही सिस्टम कब लगेगा, अलग घोषणा का विषय है। ओडिशा के शहरी विकास मंत्री की ओर से छह नए शहरों में इलेक्ट्रिक बसें लाने की खबर भी चर्चा में रही है। नई बसों में सुरक्षा किट फैक्टरी स्तर पर लगे या बाद में जोड़ी जाए, यह टेंडर और आपूर्ति कार्यक्रम पर निर्भर करेगा।
यात्रियों और चालकों के लिए इससे क्या बदलेगा?
यात्रियों को सीधे टिकट या किराए में बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है। अपेक्षा यह है कि टक्कर की चेतावनी और थकान अलर्ट से अचानक ब्रेक या पीछे से टक्कर जैसी घटनाएं कम हों। चालकों को अतिरिक्त स्क्रीन या बीप का सामना करना पड़ सकता है। प्रशिक्षण न होने पर अलर्ट की अनदेखी या बार-बार गलत चेतावनी से झुंझलाहट भी हो सकती है।
CRUT को डिपो स्तर पर ड्राइवर ओरिएंटेशन, झूठे अलर्ट की शिकायत और मासिक दुर्घटना आंकड़ा साथ रखना होगा। तभी यह कहा जा सकेगा कि 270 बसों वाला चरण वाकई जोखिम घटा रहा है।
दुर्घटना के बाद यह कदम कितना पर्याप्त है?
रुपाली स्क्वायर पर ऑटोरिक्शा से टक्कर के बाद तकनीक एक जवाब है, अकेला हल नहीं। स्टॉप पर खड़े वाहन, रात की दृश्यता, ड्राइवर की ड्यूटी अवधि और रूट डिजाइन भी जांच के दायरे में रहते हैं। ADAS आगे की दूरी और ब्लाइंड स्पॉट संभाल सकता है, DFMS ऊंघने पर चेतावनी दे सकता है, पर दोनों तभी काम आएंगे जब सेंसर सक्रिय रहें और अलर्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया हो।
फिलहाल आधिकारिक जानकारी पहले चरण, 270 इलेक्ट्रिक बसें और दो सिस्टम तक सीमित है। इंस्टॉलेशन की समयसीमा, प्रति बस लागत और मेंटेनेंस जिम्मेदारी सार्वजनिक ब्योरे में स्पष्ट नहीं है। यात्री सुरक्षा को लेकर CRUT का यह कदम भुवनेश्वर, कटक और पुरी के रूट पर देखा जाएगा। बाकी बेड़े में विस्तार की घोषणा अलग से आने की उम्मीद है।
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