Top 5 This Week

Related Posts

PM Surya Ghar Yojana: गुजरात को पीछे छोड़ यूपी नंबर-1, 8.77 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, 78 हजार तक सब्सिडी

PM Surya Ghar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश ने गुजरात को पछाड़कर देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 8,77,104 रूफटॉप सोलर सिस्टम लग चुके हैं, जबकि गुजरात में यह संख्या 8,76,353 है। यानी यूपी 751 इंस्टॉलेशन की बढ़त के साथ शीर्ष पर पहुंच गया है। पिछले कुछ महीनों में राज्य में पैनल लगाने की रफ्तार साफ बढ़ी है और मौजूदा औसत से रोजाना करीब 2,493 नए सिस्टम जुड़ रहे हैं।

जुलाई 2026 में यूपी सात लाख का आंकड़ा पार कर दूसरे स्थान पर था। सितंबर के अंत तक गुजरात अभी भी थोड़ा आगे था। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में यह अंतर पलट गया। जिला स्तर पर समीक्षा, बिजली कंपनियों द्वारा मीटरिंग और निरीक्षण की निगरानी तथा बैंकों में लंबित फाइलों के फॉलोअप ने इस उछाल में भूमिका निभाई है। यूपीनेडा ने आठ हजार से ज्यादा वेंडर इंपैनल किए हैं, जिससे इंस्टॉलेशन का काम जमीन पर तेजी से हो रहा है।

यूपी के कितने जिले देश के टॉप-100 में हैं?

योजना के जिलावार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के 15 जिले देश के शीर्ष 100 में शामिल हैं। राजधानी लखनऊ ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी दसवें पायदान पर है। इन जिलों में आवेदन, वेंडर आवंटन और नेट मीटरिंग की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। बिजली वितरण कंपनियां लंबित निरीक्षणों पर रोजाना नजर रख रही हैं, ताकि मंजूरी के बाद सब्सिडी अटक न जाए। छोटे जिलों में भी कैम्प लगाकर उपभोक्ताओं को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने में मदद दी जा रही है।

कितनी सौर क्षमता जुड़ चुकी है और बिजली कितनी बन रही है?

प्रदेश में रूफटॉप सोलर की कुल स्थापित क्षमता 2,942 मेगावॉट से अधिक हो चुकी है। मानक अनुमान के अनुसार प्रति किलोवाट रोजाना करीब 4.5 यूनिट उत्पादन माना जाए तो इन सिस्टम से हर दिन 1.32 करोड़ यूनिट से ज्यादा स्वच्छ बिजली पैदा करने की क्षमता बनती है। 6.50 रुपये प्रति यूनिट के अनुमानित मूल्य पर यह बिजली रोजाना करीब 8.5 करोड़ रुपये और सालाना 3,100 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर बैठती है। इससे घरों का बिजली बिल घटता है और अतिरिक्त यूनिट ग्रिड में जाने पर उपभोक्ता को क्रेडिट भी मिल सकता है। छत पर सिस्टम लगने से अलग जमीन की जरूरत नहीं पड़ती और कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।

सब्सिडी कितनी मिलती है और कौन पात्र है?

केंद्र सरकार की सब्सिडी सिस्टम की क्षमता पर निर्भर करती है। एक किलोवाट पर 30,000 रुपये तक, दो किलोवाट पर 60,000 रुपये तक और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78,000 रुपये तक सहायता मिलती है। उत्तर प्रदेश में पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी है। कुल मदद पात्रता और स्वीकृत क्षमता के अनुसार आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे पहुंचती है। आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसके पास अपनी छत पर पैनल लगवाने की सुविधा होनी चाहिए। बिजली कनेक्शन घरेलू श्रेणी का होना जरूरी है। नेट मीटर लगने और निरीक्षण पूरा होने के बाद ही सब्सिडी जारी होती है।

आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए और कहां करें?

आवेदन आधिकारिक पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर ऑनलाइन होता है। रजिस्ट्रेशन से पहले राज्य, बिजली वितरण कंपनी और उपभोक्ता खाता संख्या तैयार रखें। जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड, बिजली का ताजा बिल, बैंक पासबुक की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर शामिल हैं। पोर्टल पर खाता संख्या डालने के बाद पात्रता जांच होती है। डिस्कॉम की मंजूरी मिलने पर पंजीकृत वेंडर से सिस्टम लगवाया जाता है। इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग और निरीक्षण के बाद सब्सिडी खाते में आती है। आवेदन से पहले बिल पर लिखा उपभोक्ता नंबर और डिस्कॉम का नाम सही मिला लें, वरना फाइल वापस हो सकती है।

रोजगार और पर्यावरण पर क्या असर पड़ा है?

यूपीनेडा के इंपैनल वेंडरों के जरिए बिक्री, डिजाइन, इंस्टॉलेशन, इलेक्ट्रिकल काम, कमीशनिंग और सर्विस में एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार बने हैं। ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग, सर्वे और मरम्मत जैसे जुड़े कामों में भी लोगों को काम मिला है। योजना युवाओं के लिए ग्रीन स्किल का नया बाजार खोल रही है। छत पर सोलर से कृषि या आवासीय भूमि अलग से नहीं चाहिए, इसलिए भूमि उपयोग पर दबाव कम होता है। रोजाना करोड़ों यूनिट स्वच्छ बिजली का मतलब कोयला आधारित उत्पादन पर निर्भरता में कमी भी है। केंद्र और राज्य दोनों स्तर की सब्सिडी पहुंचने से मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सिस्टम लगवाना आसान हुआ है।

अभी बढ़त मामूली है, इसलिए रोजाना इंस्टॉलेशन की रफ्तार बनाए रखना निर्णायक रहेगा। जिन परिवारों की छत खाली है और बिजली बिल नियमित आता है, वे पोर्टल पर पात्रता जांच करवा सकते हैं। दस्तावेज पहले से तैयार रखने पर मंजूरी और सब्सिडी दोनों की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles