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Odisha News: केंद्रीय विश्वविद्यालय में शास्त्रीय पाली का उत्कृष्टता केंद्र मंजूर, आखिर क्यों अहम है ये फैसला?

Odisha News: शिक्षा मंत्रालय ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में शास्त्रीय पाली अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित करने की मंजूरी दी है। यह फैसला पांच राज्यों में शास्त्रीय भाषाओं के लिए पांच ऐसे केंद्र खोलने की व्यापक योजना का हिस्सा है। उच्च शिक्षा विभाग ने 1 अक्टूबर 2026 को कार्यालय ज्ञापन जारी कर शास्त्रीय असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत के केंद्रों को मंजूरी दी। इन केंद्रों से अकादमिक शोध, संरक्षण, डिजिटाइजेशन और भाषाई-साहित्यिक विरासत के प्रसार को सहारा मिलना है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पर इस मंजूरी का स्वागत किया। उन्होंने पाली केंद्र को भाषा के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार को मजबूत करने वाला कदम बताया और विश्वविद्यालय तथा इससे जुड़े लोगों को बधाई दी। पाली का स्थान भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में अलग माना जाता है। नया केंद्र संबंधित भाषाई और साहित्यिक सामग्री के शोध व संरक्षण का संस्थागत मंच देगा।

पाली का उत्कृष्टता केंद्र किस विश्वविद्यालय में खुलेगा?

शास्त्रीय पाली का केंद्र ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्थापित होगा। मंत्रालय के अनुसार, ये केंद्र संबंधित भाषा में उन्नत शोध, विद्वत्तापूर्ण काम और अकादमिक जुड़ाव के लिए संस्थागत सहायता देंगे। विश्वविद्यालय को चुनने का आधार ज्ञापन में विस्तार से नहीं दिया गया है, पर राज्य में उच्च शिक्षा संस्थान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

केंद्र खुलने के बाद पाठ्यक्रम, फैकल्टी भर्ती, पांडुलिपि संग्रह और छात्र प्रवेश की समयरेखा अलग अधिसूचना में आ सकती है। फिलहाल मंजूरी और स्थान तय होने की खबर है, कक्षाएं कब शुरू होंगी यह सार्वजनिक विवरण में स्पष्ट नहीं है।

बाकी चार उत्कृष्टता केंद्र कहां मंजूर हुए हैं?

शिक्षा मंत्रालय ने असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात के उच्च शिक्षा संस्थानों में पांच केंद्र स्वीकृत किए हैं। शास्त्रीय असमिया का केंद्र तेजपुर विश्वविद्यालय, असम में होगा। शास्त्रीय बंगाली का केंद्र विश्वभारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में रखा गया है। शास्त्रीय मराठी का केंद्र पुणे के डेक्कन कॉलेज पोस्ट-ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में होगा। शास्त्रीय प्राकृत का केंद्र गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में मंजूर हुआ है। पाली का केंद्र ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के पास है।

पांच राज्यों में ये स्थान क्षेत्रीय अकादमिक ढांचे को भी मजबूत करने के इरादे से चुने गए बताए जा रहे हैं। हर केंद्र अपनी भाषा पर काम करेगा, साझा पाठ्यक्रम का ढांचा अभी ज्ञापन के सार्वजनिक सार तक सीमित है।

इन केंद्रों का मुख्य काम क्या होगा?

मंत्रालय के अनुसार, उत्कृष्टता केंद्र उन्नत अकादमिक शोध और छात्रवृत्ति का मंच देंगे। भाषाई और साहित्यिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटाइजेशन को सहारा मिलेगा। शास्त्रीय भाषाओं से जुड़ी ज्ञान परंपरा तक पहुंच बढ़ाना और उसे व्यापक रूप से उपलब्ध कराना भी उद्देश्य है।

पाली के मामले में इसका मतलब त्रिपिटक जैसी परंपरा, शिलालेख, व्याकरण और बाद की टीकाओं पर शोध हो सकता है। डिजिटाइजेशन से दुर्लभ पांडुलिपियां स्कैन होकर शोधकर्ताओं तक पहुंच सकती हैं। संरक्षण का काम भौतिक प्रति और डिजिटल संग्रह दोनों पर निर्भर करेगा। विस्तृत प्रोजेक्ट सूची विश्वविद्यालय जारी करे तो ही काम का दायरा स्पष्ट होगा।

पाली को अलग केंद्र क्यों मिला?

पाली भारत की बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी भाषा मानी जाती है। बौद्ध ग्रंथों की बड़ी मात्रा पाली में सुरक्षित रही है। ओडिशा में प्राचीन बौद्ध स्थल और पुरातात्विक परतें भी इस भाषा के अध्ययन को स्थानीय संदर्भ देती हैं। केंद्र को इसी विरासत के शोध और प्रसार का संस्थागत आधार बताया गया है।

मुख्यमंत्री माझी ने मंजूरी को अध्ययन, संरक्षण और प्रोत्साहन तीनों दिशाओं से जोड़ा। राजनीतिक स्वागत के अलावा अकादमिक असर फैकल्टी, बजट और दीर्घकालिक प्रकाशन पर निर्भर करेगा। ज्ञापन में वार्षिक अनुदान का आंकड़ा सार्वजनिक सार में नहीं आया है।

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अगला कदम क्या है?

अभी प्रवेश नोटिफिकेशन या फैलोशिप विज्ञप्ति जारी होने की जानकारी नहीं है। इच्छुक शोधार्थी ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट और शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के अपडेट देख सकते हैं। भाषा, इतिहास, बौद्ध अध्ययन या तुलनात्मक साहित्य की पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थी बाद में पात्रता सूची में आ सकते हैं, पर नियम केंद्र की अधिसूचना से तय होंगे।

1 अक्टूबर 2026 के कार्यालय ज्ञापन से पांच शास्त्रीय भाषाओं के उत्कृष्टता केंद्र मंजूर हुए हैं। ओडिशा को पाली का केंद्र मिला है, जबकि असमिया तेजपुर, बंगाली विश्वभारती, मराठी डेक्कन कॉलेज पुणे और प्राकृत गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय को दिए गए हैं। शोध, डिजिटाइजेशन और विरासत प्रसार इन केंद्रों का घोषित दायरा है। पाठ्यक्रम और बजट का विस्तृत खाका आने के बाद ही यह कहा जा सकेगा कि पाली अध्ययन को कितना स्थायी मंच मिला है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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