Premanand Maharaj: वृंदावन में यमुनापार स्थित यमुना विहार कुंज में साधनारत संत प्रेमानंद महाराज 19 दिन बाद बृहस्पतिवार को श्रीहित राधा केलिकुंज पहुंचे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार 19 सितंबर के बाद यह उनकी केलिकुंज में पहली उपस्थिति थी। कुछ समय रुकने के बाद वह अपने गुरु संत गौरांगी शरण महाराज के आश्रम गए और आशीर्वाद लिया। वापसी में परिक्रमा मार्ग पर अनुयायियों की भीड़ जुट गई। इसी बीच उनके शिष्य दीपक पटेल उर्फ रसिक दुलारी शरण की 25 सितंबर की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है और आयोग ने आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक को जांच तथा जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
केलिकुंज दौरा और मानवाधिकार संज्ञान दो अलग घटनाक्रम हैं, लेकिन दोनों एक ही सप्ताह में चर्चा में हैं। पुलिस शुरुआती आकलन में मौत को आत्महत्या की दिशा में देख रही है, जबकि परिवार और कुछ संगठनों ने परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। आश्रम ट्रस्ट ने जांच में सहयोग की बात कही है। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आती, आरोप को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
Premanand Maharaj: केलिकुंज आगमन का क्रम क्या रहा?
प्रेमानंद महाराज पिछले कुछ हफ्तों से मांट क्षेत्र के जहांगीरपुर खादर स्थित यमुना विहार कुंज में साधना में बताए गए। बृहस्पतिवार सुबह वह वाहनों के साथ श्रीहित राधा केलिकुंज पहुंचे। वहां कुछ समय बिताने के बाद गुरु संत गौरांगी शरण महाराज के आश्रम गए। आशीर्वाद के बाद कार से रवाना हुए तो परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं ने घेराव कर लिया। एक स्थानीय रिपोर्ट में आगमन का समय सुबह करीब सवा पांच बजे बताया गया और कहा गया कि वह वापस यमुना विहार कुंज के लिए रवाना हो गए।
रसिक दुलारी मामला मानवाधिकार आयोग तक कैसे पहुंचा?
दीपक पटेल लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण, उम्र करीब 25 वर्ष, जबलपुर मध्य प्रदेश से जुड़े बताए गए। 25 सितंबर 2026 की सुबह करीब 10:30 बजे वह गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल की छत से कूदे या गिरे। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित किया गया। पुलिस रिकॉर्ड में उसी दिन की जीडी दर्ज होने की खबर है। सीसीटीवी के हवाले से कहा गया कि वह करीब 10:25 बजे कमरे से बाहर निकले, छत पर कुछ समय रहे और 10:36 बजे के आसपास नीचे आए। पुलिस ने फुटेज के आधार पर प्रारंभिक रूप से आत्महत्या की आशंका जताई, लेकिन फोन, चैट और घटना से पहले के हालात की जांच जारी रखी।
दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया। आयोग ने आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक को निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव और हेमरेजिक शॉक बताया गया। शरीर पर गंभीर चोटों का जिक्र रिपोर्टों में है। परिवार ने परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं और कुछ मांगों में सीबीआई जांच भी शामिल रही। ये आरोप जांच के अधीन हैं।
संगठनों ने शिष्यों के खिलाफ क्या मांग रखी है?
अखिल भारत हिंदू महासभा और परशुराम शोभायात्रा समिति के पदाधिकारियों ने मथुरा एसएसपी श्लोक कुमार को प्रार्थना पत्र दिया है। पत्र में प्रेमानंद महाराज के कुछ शिष्यों के खिलाफ सात बिंदुओं पर जांच की मांग है। पत्र आरोपों की सूची है, दोषसिद्धि नहीं। पुलिस को यह देखना है कि कौन से बिंदु सबूत से जुड़ते हैं। श्री राधा केलीकुंज ट्रस्ट की तरफ से बयान में पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही गई है।
मामले में कमरे से ग्राइंडर बरामद होने और निजी अंग पर चोट की खबरें भी छपी हैं। पुलिस इन बातों को कूदने से पहले के समय से जोड़कर देख रही है। मोबाइल से डिलीट चैट और वीडियो भी जांच के दायरे में बताए गए। जब तक फोरेंसिक और गवाह बयान पूरे नहीं होते, किसी शिष्य या आश्रम प्रशासन पर सीधा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मानवाधिकार आयोग का निर्देश जांच की निगरानी बढ़ाता है, फैसला नहीं सुनाता।
बरसाना वाले अनुज का वीडियो क्यों चर्चा में है?
इसी बीच बरसाना में संन्यासी वेश में सादाबाद क्षेत्र के गांव बरामई निवासी किशोर अनुज का इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चला। अनुज कहते दिखे कि वृंदावन का माहौल और संत प्रेमानंद महाराज का सत्संग उनके मन पर गहरा असर छोड़ गया। वह जीवन में सकारात्मक बदलाव का दावा करते हैं। यह वीडियो केलिकुंज आगमन और मौत की जांच से अलग है, लेकिन एक ही नाम के आसपास चलने से दोनों चर्चाएं साथ आ गईं।
सत्संग का अनुभव कानूनी जांच का विकल्प नहीं है। अनुज के बयान से आश्रम की रोजमर्रा की गतिविधि का एक पक्ष सामने आता है, जबकि रसिक दुलारी प्रकरण पुलिस और मानवाधिकार आयोग के रिकॉर्ड पर है।
आगे जांच में किन बातों पर नजर रहेगी?
आगरा जोन के एडीजी को मिले निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस को परिस्थिति, सीसीटीवी, पोस्टमॉर्टम और डिजिटल सबूत फिर से रखना होगा। परिवार की मांग, संगठनों का सात सूत्रीय पत्र और ट्रस्ट का सहयोग तीनों एक ही फाइल में आ सकते हैं। केलिकुंज आगमन से जांच का रास्ता नहीं बदलता, लेकिन आश्रम गतिविधियों पर सार्वजनिक नजर बनी रहेगी।
अभी नतीजा नहीं निकला है। पुलिस का प्रारंभिक झुकाव आत्महत्या की ओर है, आयोग ने स्वतंत्र और पारदर्शी छानबीन मांगी है, और आरोप पत्रों में शिष्यों की भूमिका पर सवाल हैं। आधिकारिक बयान या चार्जशीट आने से पहले किसी नाम को दोषी बताना ठीक नहीं। यमुना विहार कुंज में साधना और केलिकुंज की संक्षिप्त वापसी जारी रहेगी, जबकि रसिक दुलारी शरण की मौत का रिकॉर्ड अब मानवाधिकार आयोग की निगरानी में भी है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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