By Election Results 2026: शुक्रवार को आई गिनती में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की पांच विधानसभा सीटों तथा असम की नगांव लोकसभा सीट पर सत्ताधारी दलों का पलड़ा भारी रहा। नंदीग्राम में भाजपा की हसीरानी राठ ने 1,22,753 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। रेजीनगर में शंकराव सरकार 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से आगे रहे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्ट्री कझगम ने धारापुरम और मदुरंतकम दोनों सीटें अपने पास रखीं। पुडुचेरी की थट्टनचावडी पर ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के अशोक आनंद ने 8,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की। नगांव में भाजपा के देवाशीष शर्मा करीब 1,57,804 वोटों की बढ़त के साथ आगे बताए गए।
ये सीटें हालिया विधानसभा नतीजों के बाद खाली हुई थीं। नंदीग्राम मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के दूसरी सीट रखने से खाली हुई। रेजीनगर हुमायूं कबीर के नाओदा चुनने के बाद उपचुनाव में गई। तमिलनाडु की दोनों अनुसूचित जाति सीटें उन विधायकों के इस्तीफे से खुलीं, जो एआईएडीएमके छोड़कर टीवीके में गए। थट्टनचावडी मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के मंगलम रखने से खाली हुई। नगांव प्रद्युत बोरदोलोई के दल बदल और दिसपुर जीतने के बाद उपचुनाव में गई।
By Election Results 2026: नंदीग्राम और रेजीनगर पर अंतर कितना रहा?
नंदीग्राम में हसीरानी राठ को कांग्रेस के मिलन प्रधान पर 1,22,753 वोटों की बढ़त मिली। मिलन प्रधान को 41,674 वोट पड़े। इस सीट पर तृणमूल के मूल प्रत्याशी ने नाम वापस ले लिया था और ममता बनर्जी खेमे ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया था। समर्थन के बाद भी अंतर एक लाख के पार रहा। हसीरानी राठ, मुख्यमंत्री के पूर्व सहयोगी चंद्रनाथ राठ की माता बताई गई हैं। सीट का राजनीतिक वजन 2021 और बाद के सत्ता परिवर्तन दोनों से जुड़ा है।
रेजीनगर में शंकराव सरकार ने हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को 75 हजार से अधिक वोटों से पीछे छोड़ा। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई जाती है। बड़ी बढ़त को भाजपा खेमा बोनस जीत मान रहा है। गिनती के बीच कांग्रेस प्रत्याशी ने धांधली का आरोप लगाया था। आरोप जांच के अधीन हैं। आधिकारिक फॉर्म 20 आने से पहले अंतर अंतिम घोषणा पत्र से मिलाना चाहिए।
तमिलनाडु में टीवीके ने दोनों सीटें कैसे रखीं?
धारापुरम में टीवीके की पी. सत्यभामा ने 9 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। दूसरे स्थान पर द्रमुक की एस. सुगन्या रहीं। एक गिनती अपडेट में सत्यभामा के 66,841 और सुगन्या के 57,370 वोट बताए गए, अंतर 9,471। एआईएडीएमके की के. भानुमति तीसरे स्थान के आसपास रहीं। यह वही सीट है जहां पहले एआईएडीएमके की जीत हुई थी और विधायक टीवीके में चली गई थीं। उपचुनाव में वोट टीवीके के खाते में आया।
मदुरंतकम में टीवीके की के. मरगथम कुमारवेल 27 राउंड पूरे होने के बाद 20 हजार से अधिक वोटों के अंतर से आगे रहीं और जीत का परचम गाड़ा। दूसरे नंबर पर द्रमुक के आई. परंथमन रहे। दोनों सीटें आरक्षित थीं और मई के सत्ता परिवर्तन के बाद टीवीके की पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही थीं। द्रमुक विपक्ष में है। एआईएडीएमके इन सीटों पर अपना पुराना खाता नहीं बचा पाई। विजय सरकार के लिए यह उपचुनाव संगठन की पकड़ का संकेत है, पूरे राज्य का जनमत नहीं।
पुडुचेरी और नगांव का नतीजा क्या कहता है?
थट्टनचावडी में एआईएनआरसी के अशोक आनंद ने कांग्रेस के ई. विनयागम को 8,000 से अधिक वोटों से हराया। एक अपडेट में अंतर 8,482 वोट बताया गया। सीट छोटी है और मुख्यमंत्री रंगासामी के दूसरी सीट चुनने से खाली हुई थी। एनडीए सहयोगी की यह जीत स्थानीय गठबंधन को राहत देती है। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। द्रमुक समर्थित उम्मीदवार और पीछे रहे।
नगांव लोकसभा पर भाजपा के देवाशीष शर्मा करीब 1,57,804 वोटों की बढ़त के साथ आगे रहे। दूसरे स्थान पर एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल बताए गए। कांग्रेस की सिबमोनी बोरा काफी पीछे रहीं। शर्मा पूर्व आईएएस अधिकारी हैं। सीट 2024 में कांग्रेस के पास थी। बोरदोलोई के भाजपा में जाने के बाद खाली हुई। बड़ी बढ़त को अंतिम अंतर तभी मानना चाहिए, जब निर्वाचन आयोग पूरा फॉर्म जारी कर दे। अल्पसंख्यक वोट एआईयूडीएफ और कांग्रेस में बंटे, इसका असर अंतर पर दिखा।
खाली सीटें और प्रत्याशी किस पृष्ठभूमि से आए?
नंदीग्राम अधिकारी की निजी सीट मानी जाती रही। राठ परिवार का टिकट हालिया हिंसा की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। रेजीनगर कबीर की दूसरी सीट थी। उनके बेटे को टिकट मिला और हार हुई। तमिलनाडु में सत्यभामा और मरगथम कुमारवेल वही चेहरे हैं, जो एआईएडीएमके छोड़कर टीवीके में आए। मतदाता ने पुराने विधायक को नई पार्टी के टिकट पर दोहराया। पुडुचेरी में अशोक आनंद रंगासामी की पार्टी के प्रत्याशी थे। नगांव में शर्मा का टिकट सेवानिवृत्ति के कुछ दिनों बाद मिला था।
मतदान 6 अक्टूबर को हुआ था। मदुरंतकम में 86 प्रतिशत के आसपास और नंदीग्राम, रेजीनगर तथा धारापुरम में 80 प्रतिशत के पार मतदान दर्ज हुआ था। ऊंची भागीदारी के बाद भी सत्ताधारी दलों का अंतर घटा नहीं। विपक्षी वोट कई जगह बंटा। बंगाल में तृणमूल का मूल प्रत्याशी मैदान छोड़ चुका था। रेजीनगर में कांग्रेस और कबीर की पार्टी अलग-अलग उतरीं।
इन नतीजों को पूरे राज्य का जनमत मानना कहां तक ठीक है?
छह सीटें पांच विधानसभा और एक लोकसभा हैं। बंगाल में भाजपा सरकार के लिए नंदीग्राम की एक लाख से बड़ी जीत प्रतीकात्मक है। रेजीनगर की बढ़त अल्पसंख्यक बहुल सीट पर संगठन का दावा मजबूत करती है, लेकिन पूरे मुर्शिदाबाद का निष्कर्ष नहीं है। तमिलनाडु में दोनों आरक्षित सीटों पर टीवीके की जीत विजय सरकार को उपचुनाव में राहत देती है। द्रमुक दूसरे स्थान पर रही, एआईएडीएमके तीसरे के आसपास। पुडुचेरी की छोटी सीट स्थानीय सत्ता का टेस्ट थी। नगांव की बढ़त असम में दल बदल के बाद खाली सीट को भाजपा के पास रखने का संकेत है।
अंतर के आंकड़े गिनती अपडेट और प्रारंभिक घोषणा पर आधारित हैं। नंदीग्राम का 1,22,753, धारापुरम का 9 हजार के पार का अंतर और थट्टनचावडी का 8,000 के पार का अंतर कई अपडेट में दोहराया गया। नगांव और रेजीनगर पर अंतिम फॉर्म आने तक बढ़त को जीत की दिशा माना जाए, पूर्ण प्रमाणपत्र नहीं। निर्वाचन आयोग की सीटवार शीट ही आधिकारिक नतीजा है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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