पिछले कुछ सालों में बच्चों और युवाओं में आंखों की समस्याएं बढ़ने का जिक्र है। लंबे स्क्रीन टाइम को एक वजह माना जा रहा है। प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस रोकने के लिए नियमित जांच, खराब स्थितियों की जानकारी और समय पर इलाज जरूरी बताया गया है। नियम आदत है, इलाज नहीं।
20-20-20 नियम स्क्रीन पर कैसे लागू होता है?
लैपटॉप, कंप्यूटर या दूसरी डिजिटल स्क्रीन पर समय बिताने वालों को आंखों को आराम देना कहा गया है। हर 20 मिनट पर करीब 20 फीट दूर देखें और 20 सेकंड रुकें। दूरी अनुमान है, नापने का टेप नहीं दिया गया। साथ में पर्याप्त रोशनी, स्क्रीन को आंखों से सही दूरी पर रखना, बार-बार पलक झपकाना और पूरी नींद लेना भी मदद कर सकता है। सही दूरी इंच में नहीं लिखी। पलक झपकाने की गिनती भी नहीं है। नियम डिजिटल आई स्ट्रेन के संदर्भ में है। नंबर, मोतियाबिंद या रेटिना की बीमारी इससे ठीक होने का वाक्य स्रोत में नहीं है।
बिना तकलीफ के जांच की सलाह किस पर है?
डॉक्टर सचदेव के मुताबिक युवा नियमित रूप से आंखों की पूरी जांच कराएं, भले परेशानी महसूस न हो। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, परिवार में ग्लूकोमा या आंखों की दूसरी बीमारी का इतिहास हो तो जांच ज्यादा नियमित हो सकती है। अंतराल महीनों में नहीं दिया गया। बच्चों की जांच जरूरी है, खासकर बार-बार सिरदर्द, पढ़ने में परेशानी, आंख मलना, आंख सिकोड़कर देखना या बोर्ड देखने में दिक्कत हो। खेल, मशीनरी और केमिकल के साथ सही आई प्रोटेक्शन से गंभीर चोट का बचाव हो सकता है। चश्मे का ब्रांड लेख में नहीं है।
कौन सी बीमारियां धीरे-धीरे नजर घटा सकती हैं?
प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस हमेशा साफ दिखने वाली बीमारी से शुरू नहीं होती। कैटरेक्ट, ग्लूकोमा, डायबिटिक आई डिजीज, नजर का नंबर, कॉर्निया और रेटिना की कुछ बीमारियां धीरे-धीरे नजर प्रभावित कर सकती हैं। कैटरेक्ट को दुनिया भर में नजर कमजोर होने के ऐसे प्रमुख कारणों में गिना गया है, जिसका इलाज संभव है। ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी में समय पर पहचान जरूरी कही गई है। ये लंबे समय बिना साफ लक्षण के बढ़ सकती हैं। ग्लूकोमा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर नजर को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। डायबिटीज रेटिना की नसों को नुकसान पहुंचाकर नजर कमजोर कर सकती है। “सकता है” संभावना है, हर मरीज का एक ही नतीजा नहीं।
स्क्रीन टाइम और इन बीमारियों को एक वजह क्यों न मानें?
स्क्रीन टाइम को बच्चों और युवाओं की बढ़ती समस्याओं की एक वजह माना जा रहा है। कैटरेक्ट और ग्लूकोमा का कारण सिर्फ लैपटॉप है, यह लेख नहीं कहता। 20-20-20 नियम स्ट्रेन कम करने की आदत है। जांच अलग सलाह है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का इतिहास आंखों की जांच की आवृत्ति से जोड़ा गया है, स्क्रीन नियम से नहीं। दोनों बातें एक पैरा में आने से एक इलाज नहीं बनतीं।
वर्ल्ड साइट डे वाली खबर में क्या नहीं है?
नियम की तीन संख्याएं 20 मिनट, 20 फीट और 20 सेकंड हैं। डॉक्टर का नाम और अस्पताल समूह दिया गया है। बच्चों के लक्षणों की सूची है। मुहूर्त, दवा का नाम, ड्रॉप या सर्जरी का खर्च नहीं है। रोशनी, दूरी, पलक और नींद अतिरिक्त आदतें हैं। आंख में दर्द, अचानक धुंधलापन या चोट हो तो नियम काफी नहीं। रिपोर्ट समय पर इलाज की जानकारी जरूरी बताती है। 20-20-20 को रोज की दिनचर्या में शामिल करने की सलाह है, बीमारी रुकने का वादा नहीं।
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