SEBI Closing Auction Rules: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद कीमतों की सही खोज को बढ़ावा देना और बाजार में कृत्रिम उतार-चढ़ाव को कम करना है। नए प्रावधानों के तहत ऑक्शन सेशन का समय और ऑर्डर प्रक्रिया दोनों में बदलाव आएगा।
क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन की नई टाइमिंग क्या रहेगी?
SEBI के ताजा फ्रेमवर्क के अनुसार क्लोजिंग ऑक्शन सेशन अब शाम 3:30 बजे से 3:40 बजे तक यानी कुल 10 मिनट का रहेगा। सेशन की शुरुआत 3:30 बजे एक मिनट की विंडो से होगी, जिसमें रेफरेंस प्राइस की गणना और मौजूदा ऑर्डर्स का ट्रांसफर किया जाएगा। इसके बाद निवेशक लिमिट और मार्केट ऑर्डर लगा सकेंगे। ऑर्डर एंट्री की अवधि शाम 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय सिस्टम द्वारा रैंडम तरीके से बंद हो जाएगी। इसके बाद एक्सचेंज ऑक्शन मैचिंग प्रक्रिया के जरिए ऑर्डर्स का मिलान करेंगे और अंतिम क्लोजिंग प्राइस जारी करेंगे।
रेफरेंस प्राइस की गणना कैसे की जाएगी?
रेफरेंस प्राइस तय करने के लिए SEBI ने अलग-अलग स्थितियों के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं। सामान्य स्थिति में कैश मार्केट के कंटीन्यूअस ट्रेडिंग सेशन के अंतिम 15 मिनट का वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) रेफरेंस प्राइस बनेगा। अगर अंतिम 15 मिनट में कोई ट्रेड नहीं होता है तो उस दिन का लास्ट ट्रेडेड प्राइस (LTP) लिया जाएगा। पूरे दिन कोई ट्रेड न होने की स्थिति में पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग प्राइस रेफरेंस प्राइस माना जाएगा। कॉर्पोरेट एक्शन वाले दिनों में एडजस्टेड क्लोजिंग प्राइस या बेस प्राइस का इस्तेमाल होगा। ये नियम कीमत निर्धारण को ज्यादा विश्वसनीय बनाने के लिए लाए गए हैं।
नए नियम कब से लागू होंगे?
मुख्य बदलाव और नया ऑक्शन फ्रेमवर्क 7 दिसंबर 2026 से प्रभावी होगा। बिना एक्जीक्यूट हुए ऑर्डर्स के ट्रांसफर से जुड़े प्रावधान 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे। इस बीच एक्सचेंजों और ब्रोकरों को सिस्टम अपडेट और निवेशकों को जागरूक करने का समय मिलेगा।
डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग और ऑर्डर्स पर क्या असर पड़ेगा?
इंडेक्स डेरिवेटिव्स सामान्य दिनों में शाम 3:45 बजे तक ट्रेड होंगे, लेकिन एक्सपायरी वाले दिन ये 3:30 बजे बंद हो जाएंगे। स्टॉक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन भी 3:45 बजे तक खुले रहेंगे। ऑक्शन सेशन के दौरान सिर्फ लिमिट और मार्केट ऑर्डर की अनुमति होगी। नए आइसबर्ग ऑर्डर और स्टॉप-लॉस ऑर्डर नहीं लगाए जा सकेंगे। पहले से मौजूद आइसबर्ग ऑर्डर पूरी तरह डिस्क्लोज्ड लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे। कैश मार्केट में पोस्ट-क्लोज सेशन शाम 3:50 बजे से 4:00 बजे तक चलेगा, जिसमें ट्रेड क्लोजिंग प्राइस पर ही पूरे होंगे।
निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
निवेशकों को नए समय और ऑर्डर नियमों की जानकारी रखनी होगी, खासकर एक्सपायरी वाले दिनों में। रैंडम क्लोजिंग की वजह से आखिरी समय में ऑर्डर डालने की योजना बनानी पड़ सकती है। रेफरेंस प्राइस की गणना पद्धति बदलने से क्लोजिंग प्राइस पहले से थोड़ा अलग हो सकता है। ब्रोकर प्लेटफॉर्म पर समय-समय पर नोटिफिकेशन चेक करते रहें और जरूरत पड़ने पर अपने एडवाइजर से सलाह लें। ये बदलाव लंबे समय में बाजार की पारदर्शिता बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।
SEBI का यह कदम भारतीय शेयर बाजार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाने की दिशा में एक और प्रयास है। क्लोजिंग प्राइस अब ज्यादा व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से तय होने की उम्मीद है, जिससे खुदरा और संस्थागत दोनों निवेशकों को फायदा पहुंच सकता है।
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