AI Job Impact: भारतीय रेलवे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टमों की बढ़ती तैनाती के बीच युवाओं में सवाल उठ रहे हैं कि क्या लोको पायलट, ट्रैक मेंटेनर और तकनीकी निरीक्षण से जुड़े पदों पर खतरा मंडरा सकता है। 2014 से जून 2026 तक 5.56 लाख से ज्यादा भर्तियां होने और 1.61 लाख से अधिक गैर-राजपत्रित पदों पर प्रक्रिया चलने के बावजूद AI का इस्तेमाल सुरक्षा और निगरानी के कामों को बदल रहा है।
रेलवे में AI किन कामों में इस्तेमाल हो रहा है?
12 मार्च 2026 की PIB रिपोर्ट के अनुसार रेलवे ने 24 व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (WILD), 25 ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (OMRS) और 3 इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS) लगाए हैं। WILD पटरियों पर पहिए के प्रभाव को मापकर दोषपूर्ण पहियों की पहचान करता है, जबकि OMRS बियरिंग और पहियों की स्थिति की रियल-टाइम निगरानी करता है। मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (MVIS) चलती ट्रेन में लटकते, ढीले या गायब पुर्जों को डिटेक्ट करने के लिए AI/ML का इस्तेमाल करता है। ये सिस्टम पहले मैन्युअल निरीक्षण पर निर्भर कामों को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिससे खराबी का पता जल्दी लगता है और सुरक्षा बढ़ती है।
भर्ती के आंकड़े क्या कहते हैं?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार 2014 से जून 2026 तक भारतीय रेलवे में 5.56 लाख से ज्यादा भर्तियां हो चुकी हैं। 22 जुलाई 2026 को मंत्रालय ने बताया कि वार्षिक भर्ती कैलेंडर के तहत 1.61 लाख से अधिक गैर-राजपत्रित पदों पर प्रक्रिया जारी है। तुलना करें तो 2004-05 से 2013-14 के बीच 4.11 लाख भर्तियां हुई थीं। ये आंकड़े बताते हैं कि भर्ती का पैमाना बढ़ा है, लेकिन AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टमों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
किन पदों पर असर पड़ सकता है?
तकनीकी निरीक्षण, ट्रैक मेंटेनेंस और कुछ रोलिंग स्टॉक चेक से जुड़े कामों में AI की भूमिका बढ़ने से मैन्युअल निरीक्षण की जरूरत कम हो सकती है। ट्रैक मेंटेनर और निरीक्षण कर्मचारियों के कुछ रूटीन काम ऑटोमेट हो सकते हैं। हालांकि लोको पायलट जैसे परिचालन पदों पर AI अभी मुख्य रूप से सहायक भूमिका में है, जैसे सिग्नलिंग और सुरक्षा सिस्टम में। यूनियनों का कहना है कि रिक्तियां भरने की रफ्तार और तकनीकी बदलाव के बीच संतुलन जरूरी है, वरना सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
भविष्य में नौकरियों का क्या हाल रहेगा?
AI पूरी तरह नौकरियां खत्म करने की बजाय काम के स्वरूप को बदल रहा है। निगरानी और डेटा एनालिटिक्स वाले नए रोल बन सकते हैं, जबकि पुराने मैनुअल काम कम हो सकते हैं। रेलवे अभी भी बड़े पैमाने पर भर्ती कर रहा है क्योंकि नेटवर्क का विस्तार और परिचालन जरूरतें बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में भर्ती जारी रहेगी, लेकिन तकनीकी दक्षता और AI/ML से जुड़ी स्किल्स वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है।
युवाओं को क्या तैयारी करनी चाहिए?
रेलवे परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सिर्फ पुराने सिलेबस पर निर्भर न रहकर तकनीकी बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। WILD, OMRS और MVIS जैसी प्रणालियों की बुनियादी जानकारी रखें। डिजिटल स्किल्स, डेटा विश्लेषण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समझ फायदेमंद हो सकती है। भर्ती अधिसूचनाओं में आने वाले बदलावों पर नियमित नजर रखें और ऑफिशियल सोर्स से ही जानकारी लें। AI के आने से नौकरियां पूरी तरह खत्म होने की बजाय अपस्किलिंग की मांग बढ़ने की संभावना ज्यादा है।
कुल मिलाकर रेलवे में AI सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने का माध्यम बन रहा है, जबकि भर्ती का सिलसिला भी जारी है। युवाओं को बदलाव के साथ खुद को अपडेट रखना होगा ताकि अवसरों का लाभ उठा सकें।
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