Jharkhand Naxal Encounter: झारखंड में वर्ष 2026 के पहले दस महीनों में नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षा बलों ने बड़ा प्रहार किया है। मुठभेड़ों में 22 माओवादी मारे गए जबकि 45 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। सारंडा के जंगलों से लेकर चतरा और हजारीबाग की सीमा तक कई अभियान चले। इनमें एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल समेत कई बड़े नाम शामिल रहे। मई में 27 नक्सलियों के एक साथ हथियार डालने और उसके बाद जुलाई-अगस्त की घटनाओं ने पूरे नेटवर्क पर दबाव बढ़ा दिया। राज्य में नक्सल गतिविधियों को लेकर लंबे समय से चर्चा रही है और इन कार्रवाइयों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
जनवरी में सारंडा जंगल की सबसे बड़ी कार्रवाई
जनवरी 2026 में पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने बड़ा अभियान चलाया। इस मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल समेत 15 नक्सली मारे गए। सारंडा लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाके यहां अभियान को मुश्किल बनाते रहे हैं। अनल जैसे बड़े नक्सली के मारे जाने से संगठन को भारी नुकसान पहुंचा। सुरक्षा बल इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण सफलता मान रहे हैं।
अप्रैल में चतरा-हजारीबाग सीमा और बलिबा क्षेत्र की घटनाएं
अप्रैल में चतरा और हजारीबाग जिले की सीमा पर खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया। इसमें 15 लाख रुपये के इनामी नक्सली सहदेव महतो समेत चार नक्सली मारे गए। इस कार्रवाई का मकसद क्षेत्र में सक्रिय माओवादी दस्ते की गतिविधियों को रोकना था। उसी महीने सारंडा जंगल के बलिबा क्षेत्र में कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के खिलाफ भी अभियान चला। तीन नक्सली मारे गए। हालांकि मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के चार जवान घायल हो गए। मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहा है और उसके नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।
मई में रांची में सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण
मई 2026 में रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में 27 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें 25 सीपीआई-माओवादी और दो जेजेएमपी से जुड़े लोग शामिल थे। इसे झारखंड बनने के बाद का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण माना गया। आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली भी थे जो मिसिर बेसरा के नेटवर्क से जुड़े बताए गए। इस घटना ने नक्सल संगठनों को बड़ा झटका दिया। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और लगातार अभियानों के बीच यह सरेंडर हुआ।
जुलाई और अगस्त में भी आत्मसमर्पण का सिलसिला जारी रहा
जुलाई में रांची के पुलिस मुख्यालय में 16 अन्य शीर्ष माओवादियों ने भारी मात्रा में गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। अगस्त में पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा में 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली सलूका कायम समेत चार नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। ये घटनाएं नक्सल विरोधी अभियानों के बीच महत्वपूर्ण मानी गईं। एक के बाद एक सरेंडर से माओवादी संगठनों की स्थिति कमजोर होने का संकेत मिला। सुरक्षा बल लगातार जंगली इलाकों में अभियान चला रहे हैं और स्थानीय स्तर पर भी दबाव बना रहे हैं।
नक्सल नेटवर्क पर बढ़ा दबाव और आगे की स्थिति
वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे गए और 45 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया। सारंडा से लेकर उत्तरी झारखंड तक की कार्रवाइयों ने माओवादी गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश तेज की। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सिर्फ मुठभेड़ ही नहीं, आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास, स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना और दुर्गम इलाकों में विकास योजनाएं पहुंचाना भी जरूरी है। इन सभी मोर्चों पर काम होने से ही प्रभावित क्षेत्रों में शांति की राह मजबूत हो सकती है। सुरक्षा बल आगे भी जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में अभियान जारी रखेंगे।
झारखंड में 2026 के दस महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान में स्पष्ट सफलता हासिल की। 22 माओवादी मारे गए और 45 से अधिक ने हथियार डाल दिए। सारंडा की जनवरी वाली बड़ी कार्रवाई से लेकर मई का सामूहिक आत्मसमर्पण और उसके बाद जुलाई-अगस्त की घटनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण रहीं। मिसिर बेसरा के नेटवर्क और इनामी नक्सलियों पर लगातार प्रहार हुआ। इन कार्रवाइयों ने पूरे नक्सल नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया। आगे पुनर्वास और विकास के कामों के साथ अभियान जारी रहने से प्रभावित इलाकों में स्थिति बेहतर हो सकती है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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