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Odisha News: पंचायत-निकाय चुनाव से पहले ओडिशा में सियासी हलचल तेज, तीनों पार्टियों की क्या है रणनीति?

Odisha News: ओडिशा में आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा, बीजेडी और कांग्रेस तीनों प्रमुख दल गांव-गांव जाकर मतदाताओं से संपर्क साधने में जुटे हैं। विपक्षी दल सरकार की कथित कमजोरियों को मुद्दा बना रहे हैं जबकि सत्ताधारी भाजपा अपनी उपलब्धियों को लेकर सेवा संकल्प अभियान चला रही है। चुनावी माहौल गर्म होने के साथ ही पार्टियां जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

ओडिशा में पंचायत चुनाव से पहले कौन-कौन सी पार्टियां सक्रिय हैं?

राज्य में तीन बड़ी पार्टियां मैदान में हैं। भाजपा सत्ता में है और वह अपनी योजनाओं व उपलब्धियों को लेकर लोगों के बीच जा रही है। बीजेडी और कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में हैं। दोनों दल बाढ़ प्रबंधन में कथित लापरवाही, किसानों की समस्याओं और पेंशन वितरण में अनियमितताओं को उठाकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता और नेता गांवों में घूम-घूमकर जनसभाएं और संपर्क अभियान चला रहे हैं। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य प्रसन्न मोहंती का कहना है कि हाल के छात्रसंघ चुनाव भी सामान्य कैंपस पोल की तरह नहीं रहे बल्कि विधानसभा चुनाव जैसा माहौल बना था क्योंकि राजनीतिक दल सक्रिय रूप से उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे थे।

विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है?

बीजेडी और कांग्रेस बाढ़ से निपटने में सरकार की तैयारियों को कमजोर बता रहे हैं। किसानों की फसल क्षति, मुआवजे में देरी और पेंशन योजनाओं में कथित अनियमितताएं उनके प्रमुख मुद्दे हैं। विपक्षी नेता कह रहे हैं कि आम लोगों की बुनियादी समस्याएं अभी भी हल नहीं हुईं। वे गांवों में जाकर इन मुद्दों को उठा रहे हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका दावा है कि युवा वर्ग में भी उनका समर्थन बढ़ा है। दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता अनिल बिस्वाल का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव राज्य और देश के भविष्य के नेतृत्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भाजपा सेवा संकल्प अभियान के जरिए क्या कर रही है?

सत्ताधारी भाजपा सेवा संकल्प अभियान चलाकर अपनी सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। पार्टी कार्यकर्ता योजनाओं के लाभार्थियों से मिल रहे हैं और उन्हें बता रहे हैं कि केंद्र और राज्य सरकार ने किन क्षेत्रों में काम किया है। अभियान का मकसद जमीनी स्तर पर समर्थन मजबूत करना और विपक्ष के आरोपों का जवाब देना है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं को मतदाताओं के सामने रखा जाए ताकि वे सही जानकारी के आधार पर फैसला कर सकें।

अंत्योदय गृह योजना की घोषणा पर विपक्ष ने क्या कहा?

पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने गरीब, कमजोर वर्ग, विधवाओं और दिव्यांगों को पक्का मकान देने के लिए अंत्योदय गृह योजना की घोषणा की है। साथ ही मकान निर्माण समय से पहले पूरा करने वाले लाभार्थियों के लिए पहले से तय प्रोत्साहन राशि भी बढ़ा दी गई है। विपक्ष ने इस घोषणा की आलोचना की है। उनका आरोप है कि सरकार चुनावी फायदे के लिए ऐसी योजनाएं ला रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि समय पर योजना लागू करने के बजाय चुनाव से ठीक पहले घोषणा करना मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। सरकार का पक्ष है कि यह योजना जरूरतमंदों के लिए लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया का हिस्सा है।

छात्रसंघ चुनावों के नतीजों का राजनीति पर क्या असर पड़ रहा है?

हाल में हुए छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी सबसे आगे रही, उसके बाद बीसीजेडी का स्थान रहा जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। प्रसन्न मोहंती ने कहा कि इनमें जेन जेड का कोई खास प्रभाव नजर नहीं आया। बीजेडी का दावा है कि युवाओं में उनका बहुमत समर्थन है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि छात्रसंघ चुनाव अक्सर बड़े चुनावी रुझान का संकेत देते हैं। तीनों पार्टियां अब इन्हीं नतीजों को अपने पक्ष में बताते हुए जमीनी तैयारी तेज कर रही हैं। आने वाले दिनों में जब पंचायत और नगर निकाय चुनावों की तारीखें घोषित होंगी तो यह माहौल और गर्म होने की संभावना है।

ओडिशा में चुनावी तैयारियां पूरे जोरों पर हैं। पार्टियां मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं जबकि सरकार कल्याणकारी योजनाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जमीनी स्तर पर होने वाला यह संपर्क अभियान तय करेगा कि आने वाले चुनावों में जनता का रुझान किस ओर जाता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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