Muscle Growth Tips for Women: आजकल शरीर को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन खाने और पेट को स्वस्थ रखने के लिए दही जैसी चीजें खाने की बातें आम हो गई हैं। लेकिन पेट की सेहत का असर मसल्स पर भी पड़ सकता है। गट और मसल्स के बीच एक खास संबंध हो सकता है। इस संबंध को गट-मसल एक्सिस कहा जाता है। दही, केफिर और पनीर जैसे फर्मेंटेड फूड्स इस कनेक्शन में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि इन्हें खाने से मसल्स मजबूत होती हैं या नहीं, इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। आंतों में होने वाली गतिविधियों का असर मांसपेशियों की सेहत पर भी पड़ सकता है।
गट और मसल्स के बीच क्या संबंध होता है
गट और मसल्स के बीच के इस संबंध को गट-मसल एक्सिस कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो आंतों में चलने वाली प्रक्रियाओं का असर मसल्स पर भी हो सकता है। हमारी आंतों में कई छोटे-छोटे जीव रहते हैं जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहते हैं। ये भोजन को पचाने, शरीर को पोषक तत्व देने और सूजन को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। रिसर्च के मुताबिक आंतों की परत शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को खून में जाने से रोकती है। अगर आंतों के बैक्टीरिया में बदलाव आता है तो शरीर में सूजन बढ़ सकती है और इसका असर मसल्स की सेहत पर भी पड़ सकता है।
मसल्स के लिए हेल्दी गट क्यों जरूरी है
मसल्स को मजबूत रखने के लिए सिर्फ प्रोटीन खाना काफी नहीं होता। शरीर उस प्रोटीन का इस्तेमाल कैसे करता है, यह भी मायने रखता है। यहां गट हेल्थ की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जब प्रोटीन वाला खाना खाते हैं तो शरीर उसे तोड़कर अमीनो एसिड में बदलता है। ये अमीनो एसिड मसल्स की मरम्मत और बनने के लिए जरूरी होते हैं। गट में मौजूद बैक्टीरिया भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों के इस्तेमाल पर असर डाल सकते हैं। इससे शरीर को मिलने वाले अमीनो एसिड की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है। यह संबंध सिर्फ गट से मसल्स तक सीमित नहीं रहता। मसल्स भी शरीर में कुछ ऐसे पदार्थ बनाती हैं जो आंतों और दूसरे अंगों के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं।
दही, केफिर और पनीर जैसे फर्मेंटेड फूड्स क्यों खास हैं
दही, केफिर और पनीर को फर्मेंटेड फूड्स कहा जाता है। इन्हें बनाने के दौरान खास तरह के माइक्रोआर्गेनिज्म भोजन में मौजूद चीजों को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया को फर्मेंटेशन कहते हैं। फर्मेंटेशन की वजह से कुछ फूड्स में मौजूद प्रोटीन को पचाना आसान हो सकता है। साथ ही शरीर को अमीनो एसिड मिलने की प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है। फर्मेंटेशन के दौरान कुछ ऐसे तत्व भी बन सकते हैं जिनमें सूजन कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा कुछ फर्मेंटेड फूड्स में जीवित माइक्रोआर्गेनिज्म भी मौजूद हो सकते हैं। ये गट में मौजूद बैक्टीरिया और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
क्या दही और पनीर खाने से मसल्स मजबूत होती हैं
इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह साफ नहीं है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्रोटीन से भरपूर कुछ फर्मेंटेड फूड्स आंतों की सेहत, शरीर में पोषक तत्वों के इस्तेमाल और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर डाल सकते हैं। लेकिन अभी इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि इन फूड्स को खाने से मसल्स का आकार बढ़ता है या उनकी ताकत में खास सुधार होता है। गट हेल्थ सुधारने से प्रोटीन का इस्तेमाल बेहतर हो सकता है, लेकिन मसल्स बनाने के लिए सिर्फ दही या पनीर पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। अधिक रिसर्च की जरूरत है ताकि यह साफ हो कि इन फूड्स का सीधा असर मसल्स की ताकत या आकार पर कितना पड़ता है।
आगे की संभावनाएं और सावधानी
गत माइक्रोबायोम और मसल्स के बीच का यह कनेक्शन अभी भी अध्ययन का विषय है। फर्मेंटेड फूड्स गट हेल्थ सुधारने में मदद कर सकते हैं और सूजन कम करने में भूमिका निभा सकते हैं। इससे प्रोटीन के अमीनो एसिड में बदलने की प्रक्रिया पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन मसल्स मजबूत बनाने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत बनी रहती है। सिर्फ दही या पनीर खाने से मसल्स का आकार या ताकत नहीं बढ़ेगी। गट हेल्थ को ध्यान में रखकर खाना खाने से समग्र सेहत पर अच्छा असर पड़ सकता है।
मसल्स बनाने की कोशिश करने वालों को गट हेल्थ पर भी ध्यान देना चाहिए। गट-मसल एक्सिस के जरिए आंतों की स्थिति मांसपेशियों पर असर डाल सकती है। दही, केफिर और पनीर जैसे फर्मेंटेड फूड्स प्रोटीन को पचाने और सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। फिर भी इनसे सीधे मसल्स मजबूत होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। अधिक रिसर्च की जरूरत है। संतुलित आहार, व्यायाम और गट को स्वस्थ रखने वाले फूड्स का साथ मिलकर बेहतर परिणाम दे सकता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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