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मालदा हिंसा मामले में NIA की जांच तेज, 40 BLO तलब, मुख्य आरोपी गिरफ्तार, महिला BLO पर भी FIR दर्ज

SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के विरोध के दौरान हुई हिंसा और सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने इस पूरे मामले की जांच में तेजी ला दी है। एजेंसी ने 40 BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर को तलब किया है और पूछताछ का दौर जारी है। इस बीच मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसी इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़ी साजिश की तलाश में जुटी है।

SIR in Bengal: क्या है पूरा मामला, कैसे शुरू हुई यह सब घटना?

यह पूरा विवाद बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया से जुड़ा है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों की जांच और सुधार किया जाता है। इसमें BLO की अहम भूमिका होती है और उन्हें घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी जुटानी होती है।

तृणमूल कांग्रेस समर्थित BLO अधिकार संरक्षण समिति ने आरोप लगाया था कि इस काम का बोझ बहुत ज्यादा है और कई BLO इस दबाव में आकर गंभीर कदम तक उठा चुके हैं। इसी विरोध के चलते मालदा जिले के मोथाबाड़ी और कालियाचक इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घंटों तक बंधक बनाकर रखा। इस घटना के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया और NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली।

NIA की जांच: 40 BLO तलब, 22 से हो चुकी है पूछताछ

SIR in Bengal
SIR in Bengal

NIA ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 40 BLO को तलब किया है। मालदा में NIA का एक अस्थायी कार्यालय बनाया गया है जहां पूछताछ का काम चल रहा है। रविवार को इनमें से 22 BLO से पूछताछ पूरी की जा चुकी है और बाकी की पूछताछ जल्द होगी।

NIA की टीम रविवार को एक बार फिर मोथाबाड़ी BDO कार्यालय पहुंची जहां न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। अधिकारियों ने पूरे घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और यह समझने की कोशिश की कि उस दिन वहां क्या-क्या हुआ था। इसके अलावा इंग्लिशबाजार थाना क्षेत्र में भी जांच टीम पहुंची जहां CCTV फुटेज खंगाले गए और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की गई।

तीन हिस्सों में बांटकर चल रही है जांच

NIA ने इस पूरे मामले की जांच को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है ताकि हर पहलू को अच्छी तरह खंगाला जा सके। पहली टीम BDO कार्यालय में जांच कर रही है जहां बंधक बनाने की मुख्य घटना हुई थी। दूसरी टीम उस घटनास्थल पर काम कर रही है जहां हिंसा की घटनाएं सामने आईं। तीसरी टीम स्थानीय थाने में जांच में जुटी है और वहां के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

NIA इस पूरे मामले में मुख्य रूप से तीन सवालों के जवाब तलाश रही है। पहला यह कि इतनी बड़ी भीड़ एक साथ कैसे इकट्ठा हुई। दूसरा यह कि भीड़ का नेतृत्व कौन कर रहा था और इसके पीछे किसका हाथ था। तीसरा और सबसे अहम सवाल यह है कि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की यह योजना कब और कैसे बनाई गई।

मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम गिरफ्तार, साजिश की आशंका

NIA ने इस मामले में मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच में काफी मदद मिली है और कई नए तथ्य सामने आए हैं। NIA को आशंका है कि यह पूरी घटना किसी संगठित साजिश का हिस्सा हो सकती है। यानी न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना कोई अचानक हुई बात नहीं थी बल्कि इसे पहले से प्लान किया गया हो सकता है।

अगर यह साजिश साबित होती है तो मामला और भी गंभीर हो जाएगा और जांच का दायरा भी बहुत बढ़ जाएगा। NIA अभी इसी दिशा में काम कर रही है और जल्द ही अपनी प्राथमिक रिपोर्ट अदालत में पेश करने की तैयारी में है।

जिला मजिस्ट्रेट ने ADM को भेजा कारण बताओ नोटिस

इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही का भी मुद्दा सामने आया है। मालदा के जिला मजिस्ट्रेट ने जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट यानी ADM को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस इसलिए जारी किया गया है क्योंकि 1 अप्रैल 2026 को कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों की स्थिति के बारे में ऊंचे अधिकारियों को सही और समय पर जानकारी नहीं दी गई।

इससे यह साफ होता है कि उस दिन जमीन पर जो कुछ हो रहा था उसकी जानकारी ऊपर तक सही तरीके से नहीं पहुंची। यह प्रशासनिक चूक काफी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि अगर समय पर सही जानकारी मिलती तो शायद हालात इतने नहीं बिगड़ते।

महिला BLO पर FIR, पहला ऐसा मामला

इस पूरे विवाद में एक और नया मोड़ आया है। तृणमूल समर्थित BLO अधिकार संरक्षण समिति की सदस्य और महिला BLO तनुश्री मोदक भट्टाचार्य के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। यह FIR चुनाव आयोग के आदेश पर दर्ज की गई है।

तनुश्री पर आरोप है कि उन्होंने CEO यानी चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के कार्यालय के सामने अनधिकृत तरीके से प्रदर्शन किया। उन्हें नोटिस भेजा गया है और तीन दिनों के अंदर कोलकाता के हरे स्ट्रीट थाने में पेश होने को कहा गया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि जांच में पूरा सहयोग देना होगा, किसी भी सबूत को नष्ट नहीं करना होगा और भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से दूर रहना होगा। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि इन निर्देशों का पालन न करने पर गिरफ्तारी हो सकती है।

यह पहली बार है जब CEO कार्यालय के सामने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए किसी महिला BLO के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इससे यह साफ हो गया है कि चुनाव आयोग और पुलिस इस मामले में किसी को भी नहीं बख्शेगी।

BJP और TMC के बीच सियासी तनाव भी बढ़ा

इस पूरे मामले में राजनीतिक रंग भी आ गया है। 24 फरवरी को CEO कार्यालय के बाहर BLO अधिकार संरक्षण समिति के धरने के दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी वहां पहुंचे थे। उनके वहां पहुंचने के बाद BJP समर्थक भी CEO कार्यालय के बाहर जमा हो गए जिसके बाद वहां अशांति फैल गई।

इस घटना में तनुश्री मोदक भट्टाचार्य ने BJP समर्थकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अब एक तरफ उन्होंने BJP के खिलाफ शिकायत की है और दूसरी तरफ चुनाव आयोग के आदेश पर उनके खिलाफ भी FIR दर्ज हो गई है। इससे मामला और भी उलझ गया है।

आगे क्या होगा, कब आएगी NIA की रिपोर्ट?

NIA जल्द ही अपनी प्राथमिक रिपोर्ट अदालत में पेश करने की तैयारी में है। इस रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि मालदा में जो कुछ हुआ वह क्यों और कैसे हुआ, इसके पीछे कौन-कौन से लोग जिम्मेदार हैं और क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। बाकी 18 BLO की पूछताछ भी जल्द पूरी होगी।

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा डालना और सरकारी अधिकारियों को बंधक बनाना कितना गंभीर अपराध है। NIA की जांच से उम्मीद है कि दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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