UP SIR 2027: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर रोक लगा दी गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदाता सूची के आलेख्य प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन तक किसी भी संबंधित अधिकारी का स्थानांतरण आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी जैसे पदों को भी इस दौरान खाली नहीं रखा जाएगा।
यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अद्यतन करने की प्रक्रिया को बिना किसी व्यवधान के पूरा करने के लिए उठाया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के कार्यालय ने संबंधित विभागों को आयोग के निर्देशों से अवगत करा दिया है और प्रक्रिया को समय पर, पारदर्शी तरीके से पूरा करने के आदेश दिए हैं।
UP SIR 2027: मतदाता सूची का कार्यक्रम तय
भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अर्हता तिथि 1 जनवरी 2027 के आधार पर विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 चलाया जा रहा है। एकीकृत मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 12 नवंबर 2026 को होगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों को स्थिर रखना जरूरी माना गया है। आयोग का मानना है कि बीच में ट्रांसफर होने से प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और काम में देरी या अनियमितता की आशंका बढ़ सकती है।
आयोग की अनुमति के बिना नहीं होगा तबादला
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष पुनरीक्षण से जुड़े किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण आलेख्य प्रकाशन से अंतिम प्रकाशन तक आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं किया जाएगा। जिला स्तर पर काम करने वाले अधिकारी, रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और उनके सहायक सभी इस निर्देश के दायरे में आएंगे। साथ ही इन पदों को खाली रखने पर भी रोक है। अगर कोई पद खाली होता है तो उसे तुरंत भरा जाएगा।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण और संशोधन से जुड़े अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन माने जाते हैं। इस अवधि में वे आयोग के प्रति जवाबदेह रहते हैं। इसी प्रावधान के आधार पर ट्रांसफर संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
पुनरीक्षण कार्य क्यों महत्वपूर्ण?
SIR का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना, मृत मतदाताओं के नाम हटाना, नए मतदाताओं को जोड़ना और डुप्लिकेट एंट्रीज को साफ करना है। 2027 के चुनावों से पहले यह काम पूरा होना जरूरी है। अगर बीच में अधिकारी बदलते रहे तो क्षेत्रीय स्तर पर काम में निरंतरता नहीं रहेगी। कई जिलों में फील्ड स्टाफ को घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना होता है। ऐसे में एक ही टीम का काम जारी रहना प्रक्रिया को सुचारु बनाता है।
आयोग ने पहले भी विभिन्न राज्यों में ऐसे निर्देश जारी किए हैं जब बड़े स्तर पर पुनरीक्षण या चुनाव संबंधी काम चल रहे होते हैं। यूपी में मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा होने के कारण यहां काम और चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए अधिकारियों को स्थिर रखने पर जोर दिया गया है।
दावे-आपत्ति और अंतिम प्रकाशन
12 नवंबर के बाद आम मतदाता अपने नाम जुड़वाने, पता बदलवाने या किसी गलत प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। यह प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी। इसके बाद अधिकारियों को सभी दावों और आपत्तियों की जांच करनी होगी और 28 दिसंबर तक उनका निस्तारण करना होगा। 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ही ट्रांसफर संबंधी रोक हटेगी।
इस दौरान कोई भी अधिकारी बिना अनुमति स्थानांतरित नहीं हो सकेगा। विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों को अन्य कामों में व्यस्त न करें और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करें।
चुनावी तैयारी का हिस्सा
यह फैसला यूपी में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। मतदाता सूची को साफ रखना निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद है। आयोग ने पहले भी कहा है कि पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारियों का ट्रांसफर प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। अब संबंधित विभागों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।
यूपी में SIR का काम निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों पर ट्रांसफर रोक से उम्मीद है कि काम बिना रुकावट आगे बढ़ेगा और अंतिम सूची समय पर प्रकाशित हो सकेगी। आम मतदाताओं के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि उनकी सूची में नाम सही तरीके से दर्ज हो और वे बिना किसी परेशानी के मतदान कर सकें।
आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय दोनों ही प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं। आने वाले दिनों में आलेख्य सूची प्रकाशित होने के बाद दावे-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी और उसके बाद अंतिम सूची तैयार होगी।
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