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Petrol – Diesel Price 22 Oct 2026: देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, लेकिन आम आदमी की जेब पर दबाव बना रहा

Petrol – Diesel Price 22 Oct 2026: आज देशभर में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है। सुबह छह बजे जारी नए रेट के मुताबिक, ज्यादातर शहरों में कीमतें वही हैं जो पिछले कई हफ्तों से चल रही थीं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य बड़े शहरों में भी यही स्थिति है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, फिर भी घरेलू रेट नहीं बढ़ाए गए।

Petrol – Diesel Price 22 Oct 2026: प्रमुख शहरों में आज के ताजा दाम

देश के बड़े शहरों में आज की स्थिति साफ है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये जबकि डीजल 97.83 रुपये पर है। चेन्नई में पेट्रोल करीब 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये। बेंगलुरु और हैदराबाद में पेट्रोल 111 रुपये के पार और डीजल 100 रुपये के आसपास चल रहा है। जयपुर जैसे शहरों में पेट्रोल 113 रुपये के आसपास और डीजल करीब 98 रुपये पर है। नोएडा और गुरुग्राम में दिल्ली के करीब रेट हैं। राज्य के हिसाब से वैट और अन्य टैक्स की वजह से कीमतों में अंतर बना रहता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और घरेलू स्थिरता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय दामों का सीधा असर पड़ता है। इसके बावजूद सरकारी कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए। आखिरी बड़ी बढ़ोतरी 25 मई 2026 को हुई थी, जब पेट्रोल और डीजल दोनों के रेट में कुछ रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से सार्वजनिक कंपनियों के पंपों पर कीमतें स्थिर हैं। कुछ निजी कंपनियों ने अक्टूबर की शुरुआत में कुछ राज्यों में अपने पंपों पर पेट्रोल में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी, लेकिन सरकारी पंपों पर ऐसा कदम नहीं उठाया गया।

राज्यों में कीमतों का फर्क क्यों ?

देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दाम एक जैसे नहीं हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों में वैट की दर ऊंची होने के कारण कीमतें ज्यादा हैं। दिल्ली और कुछ उत्तर भारतीय शहरों में दाम अपेक्षाकृत कम रहते हैं। हैदराबाद और कुछ आंध्र प्रदेश के शहरों में पेट्रोल 116 रुपये के आसपास पहुंच जाता है। यह अंतर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स की वजह से आता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए बेस प्राइस पर राज्य अपना वैट जोड़ते हैं, जिससे अंतिम रेट तय होता है।

आम आदमी, ट्रांसपोर्ट और छोटे कारोबार पर असर

दाम स्थिर रहने के बावजूद मई के बाद की बढ़ोतरी का असर अभी भी लोगों की जेब पर है। रोजाना दोपहिया चलाने वाले मध्यम वर्गीय परिवार को महीने में सैकड़ों रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। ट्रक और टैक्सी ऑपरेटर्स का कहना है कि डीजल की ऊंची कीमत से माल भाड़ा और किराया दोनों प्रभावित हुए हैं। किसान जो सिंचाई या फसल ढुलाई के लिए डीजल इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है। छोटे दुकानदार और शहरों में आने-जाने वाले कर्मचारी भी इस बोझ को महसूस कर रहे हैं। कई जगहों पर लोग पेट्रोल की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या संभावनाएं?

तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अपने मार्जिन को देखकर फैसला लेती हैं। फिलहाल दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो आगे दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ, कंपनियां और सरकार आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और घरेलू मांग पर नजर रहेगी। लोग रोज सुबह पंप पर रेट चेक करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जल्द राहत मिले।

देशभर में फिलहाल यही स्थिति है। दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन पुरानी बढ़ोतरी का असर बना हुआ है। आम आदमी को अभी भी ईंधन पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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