MP News: राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने ग्वालियर स्थित दारूल कुरआन मदरसे में कार्रवाई की है। इस दौरान चार से 16 वर्ष आयु के 22 बच्चों को मुक्त कराया गया। मदरसा प्रबंधन मान्यता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों को बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और देखरेख की व्यवस्था में कमियां मिलीं। बाल कल्याण समिति की निगरानी में छोटे बच्चों को शिशु गृह और बड़े बच्चों को उम्र के अनुसार अन्य जगह शिफ्ट कराया गया।
ग्वालियर के मदरसे से कितने बच्चे मुक्त कराए गए?
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शुक्रवार को ग्वालियर के दारूल कुरआन मदरसे में कार्रवाई की। चार से 16 वर्ष के कुल 22 बच्चों को मुक्त कराया गया। बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि मदरसे में बिना मान्यता के बच्चों को रखा जा रहा है। आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। छोटे बच्चों को शिशु गृह और बड़े बच्चों को उम्र के अनुसार अन्य जगह भेज दिया गया।
कार्रवाई किस आधार पर की गई?
बाल कल्याण समिति को यह सूचना मिली थी कि एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में गैर मान्यता के अवैध ढंग से बच्चों को रखा जा रहा था। यह सूचना राज्य बाल संरक्षण आयोग को पहुंची। अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने खुद जाकर अधिकारियों के साथ छापामार कार्रवाई की। मदरसे का पूरा निरीक्षण किया गया और रिकॉर्ड मांगा गया। अलग-अलग कक्ष बने थे और बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था थी, लेकिन सुरक्षा और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं मिली।
मदरसा प्रबंधन दस्तावेज क्यों नहीं दे सका?
प्रबंधन से मान्यता और बच्चों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई अभिलेख नहीं दे सका। दोपहर से शाम तक चली कार्रवाई के दौरान प्रबंधन कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। मदरसा प्रबंधन ने मौके पर बच्चों को फौरन छोड़ने की मांग की और कहा कि दस्तावेज देने में समय लगता है। जांच में यह भी सामने आया कि मदरसा प्रबंधन पर कोई मान्यता नहीं है।
जांच के दौरान क्या कमियां मिलीं?
निरीक्षण के दौरान सुरक्षा और देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं मिली। तीन बच्चियां कमरे में बंद मिलीं, जिसकी जानकारी प्रबंधन ने नहीं दी थी। जांच के दौरान पता चला कि कुछ बच्चियां कमरे में हैं। बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और देखरेख में कमियां पाई गईं। कुछ दिन पहले इसी मदरसे में रहने वाला मेवाती मोहल्ले का 13 वर्षीय बालक लापता हो गया था। 15 अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद थाने में शिकायत की गई थी। बाद में बालक मिल गया था।
बच्चों को कहां शिफ्ट किया गया?
बाल कल्याण समिति की निगरानी में छोटे बच्चों को शिशु गृह और बड़े बच्चों को उम्र के अनुसार अन्य जगह शिफ्ट कराया गया। आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने बताया कि मदरसे को लेकर शिकायत मिली थी कि यहां अवैध रूप से बालक-बालिकाओं को रखा जा रहा है। निरीक्षण और जांच के बाद सामने आया कि मदरसा प्रबंधन पर कोई मान्यता नहीं है। तीन बच्चियां कमरे में बंद मिलीं।
ग्वालियर के दारूल कुरआन मदरसे से 22 बच्चों को मुक्त कराया गया है। बिना मान्यता के बच्चों को रखे जाने का आरोप है। दस्तावेज न मिलने और सुरक्षा व्यवस्था में कमियां पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई। बच्चों को बाल कल्याण समिति की निगरानी में अन्य जगह भेज दिया गया है।
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