Cannabis Addiction Treatment: झारखंड में नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। दुर्गा पूजा के दौरान कई पंडालों में नशे को न कहने के पोस्टर लगाए गए। जून 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नशामुक्त झारखंड अभियान की शुरुआत की थी। इसके बावजूद अक्टूबर 2026 में रांची और सिमडेगा में गांजे की बड़ी खेप पकड़ी गई। ऐसे मामलों से पता चलता है कि पुलिस कार्रवाई के साथ जागरूकता और लत से परेशान लोगों को मदद देना भी जरूरी है।
कुछ लोग गांजे को हल्का नशा मानते हैं, लेकिन इसका असर याददाश्त, ध्यान और सही फैसला लेने की क्षमता पर पड़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव हो सकता है। नुकसान की मात्रा उम्र, सेवन की आवृत्ति और टीएचसी की मात्रा पर निर्भर करती है।
झारखंड में हाल में गांजे की बरामदगी कहां-कहां हुई?
2 अक्टूबर 2026 को रांची के नगड़ी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 97 किलो गांजा पकड़ा गया। इसकी कीमत 48 लाख रुपये से अधिक बताई गई। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक गांजा ओडिशा से लाया जा रहा था और हजारीबाग पहुंचाना था।
1 अक्टूबर 2026 को सिमडेगा के कोलेबिरा में एक एंबुलेंस से 82.98 किलो गांजा बरामद हुआ। इसे 83 पैकेटों में छिपाकर रखा गया था। पुलिस ने 27 हजार रुपये नकद जब्त किए और चार लोगों को गिरफ्तार किया। यह खेप भी ओडिशा से रांची लाई जा रही थी। इन कार्रवाइयों के साथ जागरूकता अभियान भी चल रहे हैं, खासकर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए।
गांजे का सेवन शरीर और दिमाग पर कैसे असर डालता है?
गांजे का सेवन याद रखने और नई बातें सीखने में परेशानी पैदा कर सकता है। 2025 में जर्नल एडिक्टिव बिहेवियर्स में प्रकाशित रिसर्च में गांजे की लत वाले लोगों की 13 क्षमताओं का अध्ययन किया गया। इनमें से 10 में थोड़ी से मध्यम स्तर तक कमी देखी गई। खासकर सुनी या पढ़ी बातों को याद रखने और जानकारी को दिमाग में बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हुई।
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार कुछ लोगों को घबराहट, उलझन और बेवजह शक होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साइकोसिस जैसी मानसिक स्थिति से भी संबंध पाया गया है। कम उम्र में सेवन शुरू करने वालों में यह जोखिम ज्यादा हो सकता है। फेफड़ों पर भी असर पड़ता है। धुएं से खांसी, बलगम और ब्रोंकाइटिस हो सकती है। दिल की धड़कन तेज होना और ब्लड प्रेशर बढ़ना भी संभव है।
गांजे की लत के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें?
अगर कोई व्यक्ति गांजा छोड़ना चाहता है लेकिन बार-बार सेवन करने लगता है तो यह लत का संकेत हो सकता है। पहले से ज्यादा मात्रा लेना, काम, पढ़ाई या रिश्तों पर असर पड़ना भी चेतावनी है। नुकसान का पता होने के बावजूद सेवन जारी रखना और न लेने पर बेचैनी महसूस करना भी लत के लक्षण हैं।
इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जल्दी पहचान होने से इलाज में आसानी होती है। परिवार और दोस्तों को भी इन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।
गांजे की लत छोड़ने में कौन से तरीके मदद कर सकते हैं?
गांजे की लत छोड़ना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। कुछ लोग खुद बंद कर देते हैं जबकि कुछ को बार-बार कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिलती। ऐसे में व्यक्ति को डांटने के बजाय उसकी परेशानी समझना जरूरी है। डॉक्टर और काउंसलर की मदद से कोशिश की जा सकती है।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी यानी सीबीटी में व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को समझने में मदद की जाती है। तनाव से निपटने और गांजा लेने की इच्छा को संभालने के तरीके सिखाए जाते हैं। मोटिवेशनल एन्हांसमेंट थेरेपी के साथ देने से बेहतर परिणाम मिलने के संकेत मिले हैं। काउंसलिंग से लक्ष्य तय करने और छोटे-छोटे कदम उठाने में मदद मिलती है।
परिवार का साथ और डॉक्टर से संपर्क क्यों जरूरी है?
लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में गांजा लेने वाले कुछ लोगों को छोड़ने के बाद नींद न आने, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और दोबारा लेने की तेज इच्छा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की मदद लेना उपयोगी है। खुद से दवाएं लेना सही नहीं है।
परिवार के लोग व्यक्ति को शर्मिंदा करने के बजाय उसकी बात सुनें और इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। रोजमर्रा की दिनचर्या बनाना और अच्छी गतिविधियों में शामिल होना भी मदद कर सकता है। अगर दोबारा सेवन शुरू हो जाए तो इसे नाकामी मानने के बजाय कारण समझना चाहिए। डॉक्टर या काउंसलर से नियमित संपर्क बनाए रखना जरूरी है। फिलहाल कोई एक खास दवा हर व्यक्ति के लिए पक्का इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर जरूरत के अनुसार लक्षणों का इलाज कर सकते हैं।
नशामुक्त झारखंड के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता और स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सुविधा बढ़ाना जरूरी है। इन प्रयासों से लोगों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सकती है।
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