Food Label Checking: बाजार से आटा, बेसन या मसाले खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ ब्रांड का नाम और कीमत देखकर पैकेट उठा लेते हैं। लेकिन पैकेट पर लिखी कुछ छोटी-छोटी जानकारियां भी खरीदारी को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती हैं। पैकेट की हालत, तारीख, वजन और अन्य डिटेल्स चेक करने में कुछ सेकंड ही लगते हैं। ये बातें प्रोडक्ट की पहचान और उसकी बेसिक जानकारी समझने में काम आती हैं। हालांकि सिर्फ लेबल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी चीज में मिलावट नहीं है। फिर भी इन बातों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है।
पैकेट की हालत और सील क्यों चेक करनी चाहिए?
आटा, बेसन या मसाले खरीदते समय सबसे पहले पैकेट को अच्छी तरह देख लें। अगर पैकेट फटा हुआ है, उसमें छेद है, सील खुली है या वह नमी से खराब दिख रहा है तो उसे न खरीदें। पैकेट का काम अंदर रखी चीज को बाहरी गंदगी और नमी से बचाना होता है। खासकर पिसे मसालों के पैकेट को ध्यान से देखें। अगर अंदर गांठें बनी दिख रही हैं या अजीब गंध आ रही है तो सावधानी बरतें। हालांकि केवल गांठ या रंग देखकर यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि मसाले में मिलावट है। नमी या गलत तरीके से रखने की वजह से भी टेक्सचर बदल सकता है। FSSAI की गाइडेंस में भी खराब पैकेट न खरीदने और मसालों की गंध, रंग तथा टेक्सचर पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
FSSAI लाइसेंस नंबर देखने का क्या मतलब है?
पैक्ड खाने की चीजों पर FSSAI का लोगो या लाइसेंस नंबर अक्सर दिखता है। FSSAI देश में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों पर काम करता है। पैक्ड आटा, बेसन और मसाले खरीदते समय पैकेट पर दी गई FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की जानकारी देखनी चाहिए। अगर नंबर नहीं दिया गया है या जानकारी अधूरी लग रही है तो सावधानी बरतें। जरूरत पड़ने पर FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर भी चेक कर सकते हैं। लेकिन पैकेट पर FSSAI नंबर होने का मतलब यह नहीं है कि उस प्रोडक्ट की हर बैच की जांच हो चुकी है या उसमें मिलावट हो ही नहीं सकती। यह सिर्फ प्रोडक्ट से जुड़ी जरूरी जानकारी में से एक है।
मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट क्यों जरूरी है?
कई लोग कीमत तो देखते हैं लेकिन पैकेट पर लिखी तारीख पर ध्यान नहीं देते। आटा, बेसन और मसाले खरीदते समय बनाने या पैक करने की तारीख, बेस्ट बिफोर और जहां लागू हो यूज-बाय डेट जरूर पढ़ें। बेस्ट बिफोर का मतलब है कि सही तरीके से रखने पर प्रोडक्ट एक तय समय तक अपनी बताई गई क्वालिटी बरकरार रख सकता है। उसके बाद क्वालिटी थोड़ी कम हो सकती है। अगर तारीख मिटाई हुई लग रही है या स्टिकर से जरूरी जानकारी छिपाई गई है तो ऐसा पैकेट न खरीदें। दुकान पर एक ही सामान के कई पैकेट हों तो तारीख देखकर ही चुनें।
इंग्रीडिएंट लिस्ट और वजन पर ध्यान क्यों दें?
बेसन या मसाले खरीदते समय सिर्फ पैकेट का रंग या कंपनी का नाम देखकर फैसला न करें। पहले देखें कि प्रोडक्ट का नाम साफ लिखा है या नहीं। उसके बाद इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ें। इससे पता चलता है कि प्रोडक्ट बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है। FSSAI की गाइडेंस में बेसन में दूसरी दालों या अनाज का आटा मिलाए जाने और पिसे मसालों में स्टार्च, चाक पाउडर जैसी चीजों की मिलावट की आशंका का जिक्र है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर प्रोडक्ट मिलावटी है। इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ने से भी हर तरह की मिलावट का पता नहीं चलता।
कीमत के साथ वजन भी देखें। सस्ता पैकेट लेने से पहले चेक करें कि दोनों पैकेट में सामान कितना है। महंगा प्रोडक्ट हमेशा बेहतर हो, यह जरूरी नहीं। कीमत और वजन के साथ अन्य जानकारी भी देखकर अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला करें।
रंग, गंध, बैच नंबर और कंपनी की जानकारी क्यों देखें?
पिसे मसाले खरीदते समय उनके रंग और गंध पर भी ध्यान दें। अगर रंग जरूरत से ज्यादा चमकीला है, गांठें बनी हैं या गंध सामान्य से अलग है तो खरीदने से बचें। लेकिन सिर्फ रंग, गंध या टेक्सचर के आधार पर यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि मिलावट है। FSSAI की गाइडेंस में भी कुछ मिलावटों की पहचान केवल आंखों से मुश्किल बताई गई है। जहां AGMARK जैसे सर्टिफिकेशन लागू हों, वहां उनकी जानकारी देख सकते हैं। लेकिन एक निशान के आधार पर यह न मानें कि मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं।
बैच नंबर से किसी खास बैच की पहचान करने में मदद मिलती है। शिकायत या जांच के समय यह काम आता है। कंपनी या मैन्युफैक्चरर का नाम और पता भी देखें। अगर जरूरी जानकारी गायब है या छिपाई गई है तो दूसरा पैकेट चुनें। ऑनलाइन खरीदते समय भी भरोसेमंद सेलर चुनें और बिल संभालकर रखें।
लेबल देखकर मिलावट का पता चल सकता है क्या?
लेबल पर दी गई जानकारी से प्रोडक्ट की पहचान, तारीख, वजन, कंपनी और लाइसेंस जैसी बातें समझ में आती हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि प्रोडक्ट में मिलावट नहीं है या हर बैच की जांच हुई है। कुछ तरह की मिलावट का पता केवल देखकर लगाना मुश्किल हो सकता है। अगर किसी प्रोडक्ट को लेकर ज्यादा शक है तो केवल घर पर देखकर फाइनल फैसला न करें। कई मामलों में लैबोरेटरी टेस्टिंग जरूरी हो सकती है। लेबल पढ़ना जरूरी है, लेकिन इसे मिलावट से बचने की पूरी गारंटी नहीं समझना चाहिए।
एक पुरानी रिपोर्ट में भी बेसन की जांच का जिक्र है, लेकिन वह 2015 की है और सीमित सैंपल्स पर आधारित थी। इसलिए उसके आधार पर आज के बाजार के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। खरीदारी करते समय लेबल चेक करना एक अच्छी आदत है। यह प्रोडक्ट की बेसिक जानकारी समझने में मदद करता है, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।
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