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Tattoo HIV Risk: क्या टैटू बनवाने से हो सकता है HIV? यूपी के मामलों के बीच जानें डॉक्टर की सलाह

Tattoo HIV Risk: उत्तर प्रदेश से सामने आए एचआईवी संक्रमण के ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल जनवरी से अक्टूबर तक राज्य में करीब 900 नए मामले दर्ज हुए हैं। इनमें आधे से अधिक किशोर और युवा शामिल हैं जिनकी उम्र 15 से 45 साल के बीच है। सबसे ज्यादा मामले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय अस्पताल में सामने आए, जबकि कुछ जिला अस्पतालों में भी पॉजिटिव रिपोर्ट मिलीं। शहरी इलाकों में संक्रमण के मामले ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा देखे गए।

संक्रमण के कारणों में असुरक्षित यौन संबंध, एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाना शामिल बताया गया। वाराणसी के एक ओएसटी सेंटर पर पिछले दो साल में 30 ऐसे मामले सामने आए जहां लोगों ने साझा सुई का इस्तेमाल किया था। इनमें से दो महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद लोग टैटू और इंजेक्शन से जुड़े जोखिमों को लेकर ज्यादा सजग हो रहे हैं।

क्या टैटू बनवाने से एचआईवी संक्रमण फैल सकता है?

हां, अगर सही सावधानी न बरती जाए तो टैटू बनवाने के दौरान एचआईवी फैलने की आशंका रहती है। टैटू की प्रक्रिया में त्वचा में बार-बार सुई चुभाई जाती है जिससे छोटे घाव बन जाते हैं। अगर टैटू बनाने वाला व्यक्ति एक ही सुई या सिरिंज कई लोगों पर इस्तेमाल करता है और उसे ठीक से स्टरलाइज नहीं किया गया हो, तो संक्रमित व्यक्ति का खून दूसरे के शरीर में पहुंच सकता है। सुई पर खून की मात्रा बहुत कम होने पर भी जोखिम बना रहता है। दूषित इंक या अन्य उपकरणों से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है।

यह जोखिम मुख्य रूप से उन जगहों पर ज्यादा होता है जहां स्टरलाइजेशन के नियमों का पालन नहीं होता। सड़क किनारे, मेले या बाजार में बने अस्थायी स्टॉल पर अक्सर नई और सीलबंद सुई का इस्तेमाल नहीं होता। प्रशिक्षित कलाकार अगर नई सुई और सुरक्षित उपकरण इस्तेमाल करते हैं तो खतरा काफी कम हो जाता है।

उत्तर प्रदेश के मामलों में संक्रमण के मुख्य कारण क्या रहे?

रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे बड़ा कारण एक ही सिरिंज से नशीले पदार्थों का सेवन रहा। इसके अलावा असुरक्षित यौन संबंध और गलत तरीके से टैटू या इंजेक्शन लगवाना भी प्रमुख कारणों में शामिल रहा। अस्पतालों में सर्जरी से पहले एचआईवी जांच अनिवार्य होती है, फिर भी कुछ लोग बाहर से असुरक्षित प्रक्रियाएं करवा रहे हैं। युवाओं में जागरूकता की कमी और सस्ते विकल्पों का चयन इस समस्या को बढ़ा रहा है।

बीएचयू अस्पताल में सबसे ज्यादा मामले सामने आने से यह संकेत मिलता है कि शहरी युवाओं में यह समस्या ज्यादा फैल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों के सेवन के साथ-साथ टैटू जैसी प्रक्रियाएं भी संक्रमण की श्रृंखला को मजबूत कर रही हैं।

टैटू बनवाते समय कौन-सी सावधानियां जरूरी हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टैटू बनवाने से पहले स्टूडियो या कलाकार की विश्वसनीयता जांच लें। सुई नई और सीलबंद होनी चाहिए। इंक और अन्य सामान भी सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल हो रहे हैं, इसकी पुष्टि करें। सड़क किनारे या अस्थायी जगहों पर टैटू बनवाने से बचें क्योंकि वहां स्टरलाइजेशन की व्यवस्था अक्सर नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति पहले से संक्रमित है तो उसकी जानकारी भी लेनी चाहिए।

टैटू के बाद घाव की सही देखभाल करें। अगर कोई लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। युवाओं को सलाह है कि सस्ते और असुरक्षित विकल्पों के बजाय लाइसेंस प्राप्त जगहों का ही चयन करें।

एचआईवी के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं और कब जांच करानी चाहिए?

संक्रमण के शुरुआती हफ्तों में कुछ लोगों को बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते या शरीर में दर्द महसूस हो सकता है। ये लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं। कई लोगों में शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। समय पर जांच और इलाज न मिलने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे बार-बार संक्रमण, वजन घटना, लंबे समय तक बुखार या दस्त और टीबी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अगर असुरक्षित प्रक्रिया के बाद कोई लक्षण दिखें तो तुरंत एचआईवी जांच करानी चाहिए। मेडिकल साइंस में अब प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं जो संक्रमण को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। समय पर इलाज शुरू करने से लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं और कैसे बचें?

डॉक्टरों का कहना है कि टैटू बनवाने से हर व्यक्ति को एचआईवी नहीं होता। अगर नई, स्टरलाइज्ड सुई और सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल हो तो जोखिम से बचा जा सकता है। असुरक्षित यौन संबंध, साझा सुई और संक्रमित खून के संपर्क से बचें। नियमित जांच कराना और जागरूकता फैलाना जरूरी है। युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए और किसी भी इंजेक्शन या टैटू प्रक्रिया से पहले सुरक्षा की पुष्टि करनी चाहिए।

सरकारी और निजी अस्पतालों में जांच सुविधा उपलब्ध है। अगर कोई संदेह हो तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें। सही जानकारी और सावधानी से इस संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। लोग अफवाहों के बजाय आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह पर भरोसा करें।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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