Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 2026 इस बार 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पूरा दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को छलनी से चांद का दीदार कर व्रत खोलती हैं। लेकिन इस साल बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसम सिस्टम के कारण ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में चांद दिखने में देरी या रुकावट आ सकती है। भारतीय मौसम विभाग के 24 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार सिस्टम 26 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है और 28 अक्टूबर के आसपास आंध्र प्रदेश तट के पास पहुंच सकता है। इसके असर से 29 अक्टूबर को स्थानीय बादल और बारिश की संभावना बनी हुई है।
चंद्रोदय का समय और चांद का वास्तव में दिखाई देना दो अलग बातें हैं। पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का अनुमानित समय शहरों में अलग-अलग है। ओडिशा के कटक में रात करीब 8:03 बजे, झारखंड के जमशेदपुर में रात 7:49 बजे और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में शाम 7:42 से 7:47 बजे के बीच चंद्रोदय होने का अनुमान है। दूसरे शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। अगर आसमान में बादल छाए रहे तो चांद दिखने में देरी हो सकती है या कुछ देर के लिए छिप सकता है।
चक्रवात के कारण चांद देखने में क्या दिक्कत आ सकती है?
बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम अगर चक्रवात में बदलता है तो उसके बाद के दिनों में तटीय और आसपास के इलाकों में बादल और बारिश की संभावना रहती है। ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में 29 अक्टूबर को आसमान साफ न रहने की आशंका है। करवा चौथ की रस्म में चांद को छलनी से देखकर ही व्रत खोला जाता है। अगर चांद देर से दिखे या बादलों के बीच से झांके तो महिलाएं थोड़ा इंतजार कर सकती हैं। कई परिवारों में चांद न दिखने पर थाली या छलनी में पानी रखकर प्रतिबिंब देखने की परंपरा भी कुछ जगहों पर देखी जाती है, लेकिन यह व्यक्तिगत मान्यता पर निर्भर करता है।
मौसम विभाग के अनुसार सिस्टम की दिशा और तीव्रता के आधार पर असर बदल सकता है। 29 अक्टूबर को स्थानीय मौसम पर निर्भर करेगा कि चांद कितना साफ दिखेगा। तटीय ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में बारिश या घने बादल होने की संभावना अधिक है, जबकि झारखंड के अंदरूनी इलाकों में असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
सुहागिनें चांद का दीदार कैसे करेंगी?
करवा चौथ पर सुहागिनें शाम को तैयार होकर छत या खुली जगह पर चांद का इंतजार करती हैं। छलनी में दीया जलाकर और थाली सजाकर चांद देखते हैं। इस साल अगर बादल रहे तो उन्हें थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। कुछ महिलाएं चांद निकलने तक व्रत जारी रखती हैं। अगर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर से या बालकनी से चांद देखने की कोशिश की जा सकती है। कई जगहों पर पति भी साथ खड़े होकर चांद दिखाने में मदद करते हैं।
अगर चांद पूरी तरह न दिखे तो कुछ परिवारों में अगले दिन या साफ होने पर व्रत खोलने की प्रथा भी है, लेकिन ज्यादातर जगहों पर चांद दिखने तक इंतजार किया जाता है। मौसम की स्थिति के अनुसार महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। तटीय इलाकों में तेज हवा या बारिश की संभावना को देखते हुए सुरक्षित जगह से चांद देखने की कोशिश करना बेहतर रहेगा।
ओडिशा, झारखंड और कोलकाता में चंद्रोदय का समय
कटक में अनुमानित चंद्रोदय रात 8:03 बजे के आसपास है। जमशेदपुर में यह रात 7:49 बजे और कोलकाता में शाम 7:42 से 7:47 बजे के बीच बताया गया है। ये समय पंचांग पर आधारित अनुमान हैं। असल में चांद दिखना स्थानीय बादलों पर निर्भर करेगा। ओडिशा के तटीय जिलों में चक्रवात के असर से बादल ज्यादा हो सकते हैं, जबकि झारखंड के कुछ हिस्सों में आसमान अपेक्षाकृत साफ रह सकता है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में भी शाम के समय बादलों की स्थिति चेक करना जरूरी रहेगा।
महिलाएं चंद्रोदय के समय से कुछ मिनट पहले तैयार रह सकती हैं। अगर चांद देर से निकले तो इंतजार करना पड़ सकता है। कई जगहों पर परिवार के सदस्य मिलकर आसमान पर नजर रखते हैं और चांद दिखते ही सूचना देते हैं।
व्रत और रस्म के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
चक्रवात के बाद के मौसम में बारिश या तेज हवा की संभावना को देखते हुए सुहागिनों को सुरक्षित जगह चुननी चाहिए। खुली छत पर ज्यादा देर न रुकें। अगर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर से चांद देखने की कोशिश करें। छलनी और थाली पहले से तैयार रखें। व्रत के दौरान पानी न पीने की परंपरा है, इसलिए मौसम की स्थिति के अनुसार शरीर का ध्यान रखें। बुजुर्ग महिलाओं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए।
अगर चांद न दिखे तो घबराएं नहीं। कई परिवारों में बादल छंटने का इंतजार किया जाता है। मौसम विभाग के अपडेट चेक करते रहें। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें, खासकर तटीय इलाकों में।
अगर चांद न दिखे तो क्या करें?
कुछ परंपराओं में चांद न दिखने पर थाली में पानी भरकर उसमें चांद का प्रतिबिंब देखने की कोशिश की जाती है। कुछ जगहों पर अगले दिन सुबह व्रत खोलने की प्रथा भी है। लेकिन ज्यादातर सुहागिनें चांद दिखने तक इंतजार करती हैं। परिवार के साथ मिलकर आसमान पर नजर रखना और धैर्य रखना जरूरी है। मौसम साफ होने की उम्मीद बनी रहती है क्योंकि चक्रवात का मुख्य असर 28 अक्टूबर के आसपास रहने की संभावना है।
करवा चौथ की रस्म में चांद का दीदार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल मौसम की वजह से कुछ इलाकों में इंतजार बढ़ सकता है, लेकिन सुहागिनें अपनी परंपरा के अनुसार व्रत और पूजा पूरी करेंगी। स्थानीय मौसम की जानकारी लेकर और सुरक्षित जगह से चांद देखने की कोशिश करने से रस्म बिना किसी परेशानी के पूरी हो सकती है। ओडिशा, झारखंड और कोलकाता के परिवार मौसम अपडेट पर नजर रखते हुए तैयारियां कर रहे हैं।
News Desk Declaration / Disclaimer
घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
Read More Here
- Rahul Gandhi की रैली पर विवाद, भाजपा के सवाल; व्यापारियों ने की तारीख बदलने की मांग
- Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर पार्टनर संग बनाएं रोमांटिक प्लान! चांद देखने के लिए बेस्ट हैं ये 4 हिल स्टेशन
- Top 20 News India: चक्रवात अलर्ट से पीएम मोदी के दौरे तक, पढ़ें 25 अक्टूबर की 20 बड़ी खबरें
- Ravivar Puja Vidhi: रविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें, अर्घ्य देने की सही विधि और क्या माना जाता है?

