Giridih By Election 2026: झारखंड में अगले चार महीने में होने वाले गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश कार्यसमिति की दो दिन चली बैठक में बनी रणनीति को पार्टी सबसे पहले इसी सीट पर आजमाने की योजना बना रही है। भाजपा सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय के बीच मजबूत रही है, लेकिन पीरटांड़ के आदिवासी बहुल बूथों पर पिछले दो विधानसभा चुनाव से पिछड़ रही है। इसे देखते हुए इस बार पार्टी अपने आधार वोटबैंक को बंटने से रोकने के साथ आदिवासी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने पर ध्यान दे रही है।
वैश्य समुदाय को एकजुट रखने की योजना भी बनाई गई है। कार्यसमिति में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग उठाकर पार्टी ने इस दिशा में पहल की है। संताल आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को सक्रिय करने की योजना है।
भाजपा ने गिरिडीह उपचुनाव के लिए क्या रणनीति बनाई है?
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में गिरिडीह उपचुनाव को लेकर ठोस योजना तैयार की गई है। पार्टी अपने पारंपरिक वोटबैंक को मजबूत रखने के साथ उन क्षेत्रों पर खास ध्यान दे रही है जहां पिछली बार कमजोर प्रदर्शन रहा। पीरटांड़ के आदिवासी बहुल बूथों पर भाजपा पिछले दो चुनावों से पीछे रही है। अब इन बूथों में आदिवासी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
साथ ही ओबीसी और वैश्य समुदाय को एकजुट रखने की कोशिश की जा रही है। पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग को भी रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। गिरिडीह उपचुनाव के लिए किसी प्रदेश महामंत्री को प्रभारी बनाया जाएगा। सह संगठन प्रभारी सौरभ सिंह त्योहार के बाद वहां कैंप करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उपचुनाव में जीत के लिए ठोस योजना बनाने की सलाह दी है।
आदिवासी और ओबीसी वोटबैंक पर खास फोकस क्यों?
भाजपा सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय के बीच मजबूत रही है। हालांकि, पीरटांड़ के आदिवासी बहुल बूथों पर पार्टी पिछले दो विधानसभा चुनाव से पिछड़ रही है। संताल आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में समर्थन बढ़ाने के लिए खास प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी का मानना है कि आदिवासी और ओबीसी दोनों समुदायों का संतुलित समर्थन मिलने पर सीट पर मजबूत स्थिति बन सकती है।
ओबीसी आरक्षण की मांग को पंचायत चुनाव के संदर्भ में उठाया गया है ताकि इस समुदाय के मतदाताओं का विश्वास बढ़ाया जा सके। वैश्य समुदाय को भी एकजुट रखने की योजना है ताकि आधार वोटबैंक बंटने से बचा जा सके। यह रणनीति पिछले चुनावों के नतीजों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
चम्पाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी की भूमिका क्या होगी?
पीरटांड़ में बढ़त के लिए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को सक्रिय करने की योजना बनाई है। संताल आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में दोनों नेता छठ के बाद प्रचार करेंगे। दोनों नेताओं की मौजूदगी से आदिवासी मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
चम्पाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी झारखंड की राजनीति में आदिवासी समुदाय के बीच पहचान रखते हैं। उनकी प्रचार सभाओं से पार्टी को उन बूथों में फायदा होने की उम्मीद है जहां पिछली बार कमजोर प्रदर्शन रहा। प्रचार कार्यक्रम त्योहार के बाद शुरू होने की बात कही गई है।
सौदान सिंह और अन्य नेताओं की क्या तैयारी है?
राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह अपने सप्ताह भर के प्रवास के दौरान गिरिडीह में भाजपा कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं। चुनाव हार चुके एक पूर्व प्रत्याशी से उन्होंने कहा कि गिरिडीह पार्टी की जीती हुई सीट थी, जिसे बरकरार नहीं रखा जा सका। उन्होंने कार्यकर्ताओं से उपचुनाव में जीत के लिए पूरी मेहनत करने की अपील की।
सह संगठन प्रभारी सौरभ सिंह भी त्योहार के बाद गिरिडीह में कैंप करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बैठक में उपचुनाव में जीत के लिए ठोस योजना बनाने की सलाह दी है। पार्टी कार्यकर्ताओं को मैदान में सक्रिय करने और बूथ स्तर पर काम तेज करने की बात कही गई है।
गिरिडीह उपचुनाव की तैयारी का क्या मतलब है?
गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव अगले चार महीने में होना है। भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बनी रणनीति को सबसे पहले इसी सीट पर आजमाने का फैसला किया है। पार्टी का फोकस आदिवासी और ओबीसी वोटबैंक पर है क्योंकि इन समुदायों का समर्थन सीट के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।
चम्पाई सोरेन और बाबूलाल मरांडी जैसे नेताओं को मैदान में उतारने से पार्टी आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है। सौदान सिंह द्वारा कार्यकर्ताओं से की गई अपील और नितिन नवीन की सलाह से साफ है कि पार्टी इस उपचुनाव को गंभीरता से ले रही है। आने वाले दिनों में प्रचार कार्यक्रम और संगठनात्मक बैठकें तेज होने की उम्मीद है।
भाजपा की यह रणनीति गिरिडीह में अपना परंपरागत आधार मजबूत करने और उन क्षेत्रों में घुसपैठ करने की कोशिश है जहां पिछली बार चुनौती रही। उपचुनाव का नतीजा पार्टी की आगे की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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