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RIMS New Rules: अस्पताल में भीड़ और संक्रमण रोकने की पहल, मरीजों से मिलने के लिए बदली व्यवस्था

RIMS New Rules: रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में अब मरीजों से मिलने वालों के लिए नियम सख्त हो गए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने भीड़ कम करने, सुरक्षा बेहतर बनाने और संक्रमण के खतरे को घटाने के मकसद से अटेंडेंट तथा विजिटर्स के प्रवेश पर नियंत्रण शुरू कर दिया है। अब बिना पास के अस्पताल के अंदर प्रवेश नहीं मिलेगा। गंभीर और सामान्य मरीजों के लिए अटेंडेंट की संख्या अलग-अलग तय की गई है, जबकि मिलने का समय भी सीमित कर दिया गया है। प्रवेश द्वार पर स्पेशल ऑक्जिलियरी पुलिस (SAP) के अधिकारी पास की जांच करेंगे। प्रबंधन का दावा है कि इससे वार्डों में भीड़ कम होगी, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को काम करने में आसानी होगी और अस्पताल का माहौल साफ-सुथरा रहेगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बड़े सरकारी अस्पतालों में अक्सर भीड़भाड़ के कारण इलाज प्रभावित होता है और संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ जाता है। रिम्स जैसे संस्थान में रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती होते हैं और उनके परिजनों की संख्या कई गुना अधिक हो जाती है। नए नियम इसी समस्या का समाधान निकालने की दिशा में एक प्रयास हैं।

RIMS New Rules: RIMS रांची में पास सिस्टम क्यों लागू किया गया है?

रिम्स प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल में लगातार बढ़ती भीड़ से न केवल मरीजों के इलाज में बाधा आती है, बल्कि साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण भी मुश्किल हो जाता है। वार्डों में अटेंडेंट और मिलने वालों की अनियंत्रित संख्या के कारण डॉक्टरों और नर्सों को काम करने में परेशानी होती थी। कई बार एक मरीज के साथ कई परिजन अंदर रहते थे, जिससे जगह की कमी हो जाती थी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता था।

नया पास सिस्टम इसी समस्या से निपटने के लिए शुरू किया गया है। पास के जरिए केवल जरूरी लोगों को ही प्रवेश मिलेगा। इससे अस्पताल के अंदर अनावश्यक भीड़ नहीं होगी और स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों पर पूरा ध्यान देने का मौका मिलेगा। प्रबंधन का कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों के हित में है क्योंकि शांत और साफ माहौल में इलाज बेहतर तरीके से हो सकता है।

गंभीर और सामान्य मरीजों के लिए अटेंडेंट की संख्या क्या तय की गई है?

नए नियमों के तहत अटेंडेंट की संख्या मरीज की स्थिति के हिसाब से तय की गई है। गंभीर मरीज के साथ अधिकतम दो अटेंडेंट को अस्पताल के अंदर रहने की अनुमति होगी। सामान्य मरीज के साथ सिर्फ एक अटेंडेंट रह सकेगा। इसका मतलब है कि परिवार के अन्य सदस्य या रिश्तेदार अब बिना अनुमति के अंदर नहीं रुक पाएंगे।

यह नियम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गंभीर मरीजों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है, इसलिए उनके साथ दो लोग रह सकते हैं। जबकि सामान्य मरीजों के मामले में एक अटेंडेंट पर्याप्त माना गया है। पास जारी करते समय मरीज की स्थिति का ध्यान रखा जाएगा और उसी हिसाब से अनुमति दी जाएगी। इससे वार्डों में जगह की कमी नहीं होगी और स्टाफ को मरीजों की जरूरत के हिसाब से काम करने में सुविधा मिलेगी।

मरीजों से मिलने का समय क्या है और पास कैसे काम करेगा?

मरीजों से मिलने आने वाले लोगों के लिए समय भी सीमित कर दिया गया है। अब वे सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 4 बजे से 6 बजे तक ही मरीजों से मिल सकेंगे। इन घंटों के बाहर मिलने की अनुमति नहीं होगी। मिलने के दौरान भी पास दिखाना जरूरी होगा।

पास अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी किया जाएगा। अटेंडेंट और विजिटर्स को प्रवेश द्वार पर पास दिखाकर ही अंदर जाने की अनुमति मिलेगी। बिना पास के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि तय समय में ही लोग अंदर जाएं और उसके बाद वार्डों में शांति बनी रहे। डॉक्टरों और नर्सों को बिना बाधा के काम करने का मौका मिल सके।

प्रवेश द्वार पर जांच कैसे होगी और कौन निगरानी करेगा?

नए नियमों को लागू करने के लिए अस्पताल के प्रवेश द्वारों पर सख्त जांच की जाएगी। स्पेशल ऑक्जिलियरी पुलिस (SAP) के अधिकारी निगरानी का काम संभालेंगे। वे पास की जांच करेंगे और नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे। अगर कोई बिना पास के प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो उसे रोका जाएगा।

SAP अधिकारियों की मौजूदगी से सुरक्षा भी बेहतर होगी। पहले कई बार अस्पताल परिसर में अनावश्यक लोग घूमते रहते थे, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती थीं। अब पास सिस्टम और SAP की निगरानी से यह समस्या कम होने की उम्मीद है। प्रबंधन का मानना है कि इससे अस्पताल का माहौल नियंत्रित रहेगा और मरीजों तथा स्टाफ दोनों को राहत मिलेगी।

इस व्यवस्था से क्या फायदे होने की उम्मीद है?

रिम्स प्रबंधन का कहना है कि पास सिस्टम लागू होने से कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा भीड़ कम होने का है। वार्डों में कम लोग होंगे तो डॉक्टर और नर्स मरीजों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। इलाज की प्रक्रिया बिना बाधा के चल सकेगी।

दूसरा फायदा संक्रमण नियंत्रण का है। भीड़ कम होने से साफ-सफाई बनाए रखना आसान होगा। संक्रमण फैलने का खतरा घट जाएगा, जो अस्पतालों में एक बड़ी समस्या होती है। तीसरा फायदा सुरक्षा का है। पास के बिना कोई अंदर नहीं जा सकेगा, जिससे परिसर सुरक्षित रहेगा।

मरीजों के परिजनों को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें पता होगा कि कब और कैसे मिलना है। अनावश्यक इंतजार या भीड़ में धक्का-मुक्की नहीं होगी। कुल मिलाकर यह व्यवस्था अस्पताल के संचालन को बेहतर बनाने और मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की दिशा में एक कदम है। आने वाले दिनों में इसकी प्रभावशीलता पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार भी किया जा सकता है।

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Author: Sanjna Gupta

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