Jharkhand News: झारखंड की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) और बड़े आकार की बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (लैम्प्स) के सामने आय बढ़ाने का एक नया और व्यावहारिक अवसर खुल गया है। राज्य की ये सहकारी संस्थाएं अब भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएल) के साथ साझेदारी में बीज का कारोबार शुरू कर सकती हैं। इस व्यवस्था में सिद्धकोफेड मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा और संस्थाओं को लाभ का बड़ा हिस्सा मिलने की व्यवस्था की गई है। बुधवार को रांची के हटिया स्थित निबंधक कार्यालय में आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप में इस पूरे मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें 13 जिलों के जिला सहकारिता पदाधिकारी और विभिन्न लैम्प्स-पैक्स के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सहकारिता विभाग और बीबीएसएल की यह पहल उन संस्थाओं के लिए खास मायने रखती है, जो लंबे समय से अपनी आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के रास्ते तलाश रही थीं। बीज कारोबार को व्यवसाय के रूप में अपनाने से न केवल संस्थाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि किसानों तक अच्छी गुणवत्ता के बीज पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
बीज कारोबार में लैम्प्स-पैक्स को कितना मार्जिन मिलेगा?
वर्कशॉप में बीबीएसएल के प्रमुख जेपी सिंह ने स्पष्ट किया कि बीज का कारोबार करने वाली संस्थाओं को 11 प्रतिशत का मार्जिन दिया जाएगा। इसके साथ ही, 40 प्रतिशत अग्रिम राशि जमा करने पर संस्थाओं को बीज उपलब्ध करा दिया जाएगा। यह व्यवस्था संस्थाओं के लिए व्यावहारिक बनाई गई है ताकि वे कम पूंजी से भी कारोबार शुरू कर सकें।
सहकारिता निबंधक शशि रंजन ने बैठक को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि बीज कारोबार से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा लैम्प्स और पैक्स को ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सहकारी संस्थाओं के लिए एक अच्छा व्यवसायिक अवसर है। बीबीएसएल की तरफ से अब तक झारखंड की 775 संस्थाएं इस सिस्टम से जुड़ चुकी हैं, जबकि दो संस्थाओं ने बीज कारोबार शुरू करने की सहमति भी दे दी है। इससे साफ है कि मॉडल को धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है और शुरुआती संस्थाओं को अनुभव हासिल करने का मौका मिल रहा है।
सिद्धकोफेड की भूमिका क्या रहेगी और कैसे मिलेगा सपोर्ट?
सिद्धकोफेड को इस पूरे सिस्टम में नोडल एजेंसी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। संस्था बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। सिद्धकोफेड के सचिव राकेश कुमार सिंह ने लैम्प्स-पैक्स के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस पहल को एक व्यवसाय के रूप में अपनाएं और व्यापारी की तरह सोचकर काम करें। उन्होंने कहा कि सिद्धकोफेड हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयार है।
सहकारिता विभाग की ओर से बनाए गए गोदामों का उपयोग भी बीज भंडारण के लिए किया जा सकता है। इससे संस्थाओं को अतिरिक्त स्टोरेज की सुविधा मिलेगी और कारोबार चलाने में आसानी होगी। सिद्धकोफेड की मध्यस्थता से बीबीएसएल और सहकारी संस्थाओं के बीच तालमेल बेहतर रहेगा। इससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बीज समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।
वर्कशॉप में क्या चर्चा हुई और किन अधिकारियों ने भाग लिया?
हटिया स्थित निबंधक कार्यालय में आयोजित वर्कशॉप का संचालन सहायक निबंधक सुजीत कुमार सिंह ने किया। मौके पर संयुक्त निबंधक अफ्रेम जॉर्ज कुजूर समेत अन्य अधिकारी और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में सहकारी संस्थाओं की आय बढ़ाने और बीज कारोबार को एक स्थिर व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर विस्तार से बातचीत हुई।
13 जिलों के जिला सहकारिता पदाधिकारियों की मौजूदगी से यह साफ हुआ कि राज्य स्तर पर इस मॉडल को लागू करने की तैयारी चल रही है। चर्चा का मुख्य केंद्र यह रहा कि कैसे लैम्प्स-पैक्स अपनी मौजूदा गतिविधियों के साथ बीज कारोबार को जोड़ सकें। अधिकारियों ने संस्थाओं को आश्वासन दिया कि उन्हें जरूरी मार्गदर्शन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
किसानों और सहकारी संस्थाओं को इस पहल से क्या फायदा होगा?
यह मॉडल किसानों और सहकारी संस्थाओं दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। संस्थाओं को 11 प्रतिशत मार्जिन मिलने से उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, गोदामों की उपलब्धता से भंडारण की समस्या भी कम होगी। किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज समय पर मिल सकेंगे, क्योंकि सिद्धकोफेड गुणवत्ता और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी संभालेगा।
सहकारी संस्थाएं पहले से किसानों के संपर्क में रहती हैं। बीज कारोबार शुरू होने से यह संपर्क और मजबूत होगा। संस्थाएं न केवल बीज बेचेंगी, बल्कि किसानों को सही बीज चुनने और उपयोग करने की जानकारी भी दे सकेंगी। लंबे समय में इससे क्षेत्र की कृषि उत्पादकता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
इस व्यवस्था को अपनाने में संस्थाओं को किन बातों का ध्यान रखना होगा?
बीज कारोबार शुरू करने वाली संस्थाओं को 40 प्रतिशत अग्रिम जमा करना होगा। इसके बाद बीज उपलब्ध हो जाएंगे। संस्थाओं को कारोबार को व्यवसाय की तरह चलाना होगा। सिद्धकोफेड से तकनीकी और गुणवत्ता संबंधी सहयोग मिलेगा, लेकिन दैनिक संचालन की जिम्मेदारी संस्थाओं पर ही रहेगी।
शशि रंजन और अन्य अधिकारियों ने जोर दिया कि यह अवसर उन संस्थाओं के लिए है जो अपनी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना चाहती हैं। अभी तक 775 संस्थाएं सिस्टम से जुड़ चुकी हैं, लेकिन बीज कारोबार पर सहमति देने वाली संस्थाओं की संख्या अभी कम है। आने वाले समय में और संस्थाएं इसमें शामिल हो सकती हैं।
इस पहल से झारखंड की सहकारी व्यवस्था को एक नई दिशा मिल सकती है। लैम्प्स-पैक्स जैसी संस्थाएं अब केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं रहेंगी। बीज कारोबार के जरिए वे अपनी आय बढ़ा सकती हैं और किसानों को बेहतर सेवाएं दे सकती हैं। सिद्धकोफेड और बीबीएसएल के बीच तालमेल से पूरे सिस्टम को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। संस्थाओं के लिए यह समय है कि वे इस मौके का लाभ उठाएं और अपने स्तर पर तैयारी शुरू करें।
राज्य सरकार और सहकारिता विभाग की यह पहल उन क्षेत्रों में खास मायने रखती है जहां सहकारी संस्थाएं किसानों की सबसे करीबी कड़ी मानी जाती हैं। अगर यह मॉडल सफल होता है तो आने वाले वर्षों में अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। फिलहाल, वर्कशॉप के बाद संस्थाओं के स्तर पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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Sanjana Gupta
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