
डेस्क: भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 9 और 10 मई की मध्य रात्रि पाकिस्तान के हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने जबरदस्त पलटवार किया और पाकिस्तानी ठिकानों को तबाह कर दिया। इस अभियान को वायुसेना की ऐतिहासिक जीत बताया गया।
एयर मार्शल तिवारी ने कहा, “हमारे लिए यह बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि थी कि 50 से भी कम अस्त्रों का इस्तेमाल कर हम पूर्ण प्रभुत्व हासिल करने में सफल रहे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।”
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय तैयारियों की हुई परीक्षा
ऑपरेशन सिंदूर में सक्रिय भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि इस दौरान कुछ ऐसे पाकिस्तानी ठिकाने नष्ट किए गए जिन्हें 1971 के युद्ध में भी निशाना नहीं बनाया जा सका था। उन्होंने कहा कि हर हथियार का सटीक इस्तेमाल किया गया, जिससे भारतीय योजनाकारों और वायुसेना के मिशन अंजाम देने वाले जवानों की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
यह अभियान 7 मई को शुरू हुआ था, जब पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में बने आतंकी ढांचे को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक तीव्र झड़पें जारी रहीं और 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
केवल सैन्य ठिकानों पर किया गया प्रहार
एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि भारत स्थिति को और बिगाड़ना नहीं चाहता था, इसलिए शुरुआती हमले के बाद जवाबी कार्रवाई को संतुलित रखा गया। हालांकि, 9-10 मई की रात जब पाकिस्तान की ओर से बड़ा हमला हुआ, तो भारतीय वायुसेना ने उसे कड़ा संदेश देने का फैसला लिया। इसके तहत पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। तिवारी ने कहा कि इस हमले का उद्देश्य पाकिस्तान की क्षमता को खत्म करना और उसे सही संदेश देना था।
एयर मार्शल ने यह भी स्वीकार किया कि दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से हमला करना बेहद जोखिम भरा था। उन्होंने कहा, “इस रेंज से सटीक निशाना साधना आसान नहीं होता। लंबी दूरी जितनी ज्यादा होगी, असफलता की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। लेकिन हमारी टीमवर्क और सटीक योजना ने इसे संभव बनाया। यह केवल पायलटों का नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम था।”
ये भी पढ़ें: Voter Adhikar Yatra: राहुल गांधी के सामने BJP कार्यकर्ताओं ने लगाए मोदी जिंदाबाद के नारे, दिखाए काले झंडे