रांची: झारखंड के सेराइकेला-खरसावां जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक निजी कंपनी ने नौकरी का झांसा देकर 62 युवकों को बंधक बना लिया और उनसे जबरन काम करवाया। इस खबर ने झारखंड के लोगों को चौंका दिया है। झारखंड पुलिस ने 30 अगस्त 2025 को छापेमारी कर इन युवकों को आजाद कराया। यह घटना नौकरी की तलाश में ठगी के शिकार होने वालों के लिए बड़ा सबक है।
पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कंपनी तमोलिया के किराए के मकानों में युवकों को बंधक बनाकर रख रही है। इन युवकों को नौकरी और ट्रेनिंग का लालच दिया गया था, लेकिन बाद में उनसे मारपीट कर काम करवाया गया। पुलिस ने छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो बिहार के भागलपुर और गया जिले के हैं।
पुलिस की कार्रवाई और बचाव
चांडिल के सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी अरविंद बिन्हा ने बताया कि युवकों को तीन किराए के मकानों में बंधक बनाया गया था। पुलिस ने गुरुवार को छापेमारी की और सभी 62 युवकों को सुरक्षित निकाला। कंपनी के सुपरवाइजर और अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। शुक्रवार को तीन आरोपियों के खिलाफ BNS की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कंपनी से जुड़े 33 दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
Jharkhand News: युवकों की आपबीती
छुड़ाए गए युवकों ने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी ने उन्हें कैद कर लिया। मारपीट और डराने-धमकाने के बाद उनसे जबरन काम करवाया गया। ज्यादातर युवक बिहार और झारखंड के गरीब परिवारों से हैं। इस घटना ने नौकरी के नाम पर ठगी की गंभीर समस्या को उजागर किया है।
लोगों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर लोग इस घटना पर गुस्सा जता रहे हैं। कई लोग इसे मानव तस्करी से जोड़कर देख रहे हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह खबर बिहार और झारखंड में वायरल हो रही है। लोग कह रहे हैं कि ऐसी ठगी करने वाली कंपनियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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