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Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी 2026 कब है 25 सितंबर शुक्रवार भगवान अनंत कौन हैं?

Anant Chaturdashi 2026: अनंत चतुर्दशी हिंदुओं का पवित्र पर्व है। स्कन्द पुराण ब्रह्म पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार भाद्रपद यानी भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी इसी नाम से जानी जाती है। इस दिन भगवान अनंत का पूजन होता है।

मिथिला और महावीर पंचांग के अनुसार 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर शुक्रवार को है। चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 25 सितंबर रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत 25 सितंबर को रखा जाएगा।

अनंत का अर्थ है जिसका अंत न हो। पूजन उस निराकार सर्वव्यापी सत्ता का माना जाता है जिसका आदि अंत नहीं। कुछ लोग अनंत को अलग देवता समझते हैं शास्त्रों के अनुसार यह भ्रम बताया गया है।

अनंत का मतलब क्या है और पूजा किसकी होती है?

अनंत शब्द न और अंत से बनता है। जिसका समापन न हो वही अनंत है। इसलिए यह पर्व निराकार भगवान का पूजनोत्सव कहा गया है। वे सर्वव्यापी माने गए हैं आदि भी नहीं अंत भी नहीं।

कुछ श्रद्धालु अनंत देव को खास अलग देवता मान लेते हैं। शास्त्रों की दृष्टि में यह भ्रम है। पौराणिक कथा में कौंडिल्य मुनि अनंत की खोज में वन वन घूमते रहे पता नहीं चला। पता कैसे चलता वह तो उनके शरीर में ही थे। खोज बाहर थी सत्ता भीतर बताई गई।

पूजा भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को व्रत रखकर की जाती है। मान्यता है इस दिन व्रत से कामनाएं पूरी होती हैं। महिमा भविष्य पुराण के उत्तर पर्व के 95वें अध्याय में कथा रूप में विस्तार से कही गई है। विष्णु के अनंत रूप की आराधना इसी तिथि से जुड़ी है।

2026 में वही तिथि 25 सितंबर शुक्रवार पर स्थिर है। पंचांग दो नामों मिथिला और महावीर से पुष्टि दी गई है। व्रती उसी शुक्रवार को व्रत रखेंगे तिथि की रात वाली सीमा के भीतर।

भगवान अनंत कौन हैं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से क्या कहा?

भविष्य पुराण के अनुसार दुर्योधन ने द्यूत में युधिष्ठिर को हराया। द्रौपदी और भाइयों संग 12 वर्ष वनवास भोगना पड़ा। वन कष्ट के दौरान संयोग से श्रीकृष्ण पहुंचे। उन्होंने कहा हर प्रकार के पाप नाश करने वाला कल्याणकारी और कामना पूरी करने वाला अनंत चतुर्दशी व्रत है। भादो शुक्ल चतुर्दशी को रखा जाता है।

युधिष्ठिर ने पूछा आपने जो नाम लिया क्या ये अनंत शेषनाग हैं या कोई और नाग या परमात्मा। अनंत किसे कहते हैं बताएं। श्रीकृष्ण ने कहा अनंत मेरा ही नाम है। कला काष्ठा मुहूर्त दिन पक्ष मास ऋतु अयन संवत्सर युग और कल्प आदि रूप में मैं ही मौजूद हूं।

आगे कहा संसार का भार उतारने और दानव नाश के लिए वसुदेव वंश में मैं उत्पन्न हुआ। पार्थ मुझे विष्णु हर शिव ब्रह्मा भास्कर शेष सर्वव्यापी ईश्वर समझो अनंत भी मैं ही हूं। विश्वास जगाने को ऐसा कहा। इस संवाद से अनंत को विष्णु का ही विस्तार माना गया अलग नाग देवता नहीं।

वनवास की पीड़ा और व्रत का उपाय एक साथ आते हैं। पाप नाश और कामना पूर्ति दोनों फल कथा में जुड़े हैं। 12 वर्ष के वन के संदर्भ से व्रत की महत्ता और बढ़ती है। पाठक के लिए संदेश साफ है अनंत कोई तीसरा चेहरा नहीं कृष्ण विष्णु की अनंतता है।

2026 में अनंत चतुर्दशी का मुहूर्त क्या है?

मिथिला और महावीर पंचांग कहते हैं पर्व 25 सितंबर शुक्रवार को है। चतुर्दशी 24 सितंबर गुरुवार रात 11 बजकर 18 मिनट से चलकर 25 सितंबर शुक्रवार रात 11 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। व्रत का दिन 25 सितंबर शुक्रवार लिखा गया है।

तिथि रात को बदलती है इसलिए व्रत का मुख्य दिन शुक्रवार ठहराया गया। पूजन उसी दिन विष्णु के अनंत रूप का बताया गया है। पारण का अलग घंटा इस सामग्री में नहीं दिया गया। व्रती अपने पंचांग और पुरोहित से पारण देख सकते हैं।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी हर वर्ष इसी क्रम से आती है। 2026 की तारीख शुक्रवार पर टिकी है। 24 की देर रात से तिथि शुरू होना याद रखना जरूरी है ताकि व्रत का दिन गलत न चुना जाए। स्रोत ने व्रत स्पष्ट 25 सितंबर लिखा है।

कामना पूर्ति वाली मान्यता व्रत से जुड़ी है। पुराण अध्याय 95 की कथा उसी महिमा को खोलती है। मुहूर्त तालिका छोटी है तिथि आरंभ समाप्ति और व्रत दिन तीन पंक्तियों में सिमटी है।

कौंडिल्य मुनि वाली कथा से क्या समझ आता है?

मुनि जंगल जंगल अनंत देव खोजते रहे। दर्शन बाहर न मिला। कथा कहती है वह तो शरीर में मौजूद थे। बाहर के देवता की तलाश और भीतर की व्यापकता का फर्क यही कथा दिखाती है।

यही वजह है अलग अनंत देव वाला भ्रम शास्त्र दृष्टि से काटा गया। पर्व निराकार सर्वव्यापी का है जिसका आदि अंत नहीं। विष्णु हर शिव ब्रह्मा भास्कर शेष सब एक ही सत्ता के नाम श्रीकृष्ण के वचन में आए।

वन में युधिष्ठिर को व्रत का उपाय मिला। द्यूत हार और 12 वर्ष वनवास के बाद कल्याणकारी व्रत बताया गया। भादो शुक्ल चतुर्दशी वह तिथि ठहरी। 2026 में वही तिथि 25 सितंबर को व्रत दिन है।

श्रद्धालु व्रत रखकर अनंत रूप का पूजन करते हैं। विस्तृत सामग्री विधि की चरणबद्ध सूची इस स्रोत में नहीं है। महत्व कथा और पंचांग यहां केंद्र हैं। घर घर पंचांग मिलान कर समय तय करना चाहिए।

अनंत चतुर्दशी 2026 मिथिला और महावीर पंचांग के अनुसार 25 सितंबर शुक्रवार को है। तिथि 24 सितंबर रात 11 बजकर 18 मिनट से 25 सितंबर रात 11 बजकर 6 मिनट तक चलेगी। अनंत का अर्थ अंतहीन है पूजन निराकार सर्वव्यापी विष्णु रूप का माना गया। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा अनंत मेरा नाम है। कौंडिल्य कथा बाहर खोज और भीतर सत्ता का भेद बताती है। व्रत से कामना पूर्ति की मान्यता भविष्य पुराण से जुड़ी है।

News Desk Declaration / Disclaimer

घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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