Bengal Crime News: पश्चिम बंगाल से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पुलिस महकमे से लेकर आम लोगों तक को हिलाकर रख दिया है। कोलकाता में किडनी तस्करी गिरोह के खिलाफ चल रही जांच में अब बांग्लादेश का नाम भी जुड़ गया है। बंगाल एसटीएफ ने बांग्लादेशी नागरिक रसेल अहमद को गिरफ्तार किया है, और उसके पास से जो सामान बरामद हुआ है, उसने पूरे गिरोह के काले कारोबार की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रसेल कोई नया अपराधी नहीं है। यह शख्स पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुका है, और फिर भी दोबारा उसी धंधे में लौट आया। आखिर एक बार पकड़े जाने के बाद भी यह शख्स कैसे फिर से इस काले कारोबार में सक्रिय हो गया? यही सवाल अब जांच एजेंसियों को परेशान कर रहा है।
Bengal Crime News: बागूइयाती से हुई गिरफ्तारी, एसटीएफ ने संभाला मोर्चा
जानकारी के मुताबिक रसेल अहमद को बागूइयाती इलाके के अतघरा फुलतला से पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी कल रात बंगाल एसटीएफ की टीम ने की। गिरफ्तारी के बाद उसे बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया, जहां अब उससे पूछताछ चल रही है।
देखने पर लगता है कि रसेल किराए के मकान में छिपकर रह रहा था और वहीं से अपने गिरोह का जाल फैला रहा था। स्थानीय स्तर पर किसी को शक भी नहीं हुआ कि उसके पड़ोस में एक अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का सदस्य रह रहा है।
2024 में भी हो चुकी थी गिरफ्तारी, दिल्ली पुलिस ने पकड़ा था
यहां से मामला और दिलचस्प मोड़ लेता है। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि रसेल को 2024 में भी किडनी तस्करी गिरोह में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त दिल्ली पुलिस ने उसे धर दबोचा था। जांच में तब यह भी सामने आया था कि रसेल भारत में अवैध रूप से घुसा था, और उसने फर्जी तरीके से आधार कार्ड और पैन कार्ड तक बनवा लिए थे।
सोचने वाली बात है कि जिस शख्स का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद था, वह आखिर कैसे दोबारा देश में घूमता रहा और नया गिरोह खड़ा कर लिया। इस सवाल का जवाब जांच एजेंसियां अब खंगाल रही हैं।
प्रभास मंडल की गिरफ्तारी से खुला पूरा राज
रसेल तक पहुंचने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। कुछ दिन पहले पुलिस ने गुर्दा तस्करी गिरोह में शामिल प्रभास मंडल नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था। प्रभास से जब पूछताछ हुई, तो उसने रसेल का नाम लिया। यहीं से पूरी कड़ी जुड़ती चली गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गुर्दा तस्करी गिरोह भारत-बांग्लादेश सीमा पर फैला हुआ है। यानी यह सिर्फ कोलकाता या बंगाल तक सीमित मामला नहीं, बल्कि सीमा पार तक इसकी जड़ें फैली हुई हैं।
18 अगस्त की शिकायत से शुरू हुई पूरी जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 18 अगस्त को हुई थी, जब एक पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर पुलिस हरकत में आई और गिरोह के बिचौलिए प्रभास को गिरफ्तार किया। प्रभास से हुई पूछताछ में ही रसेल का नाम सामने आया, जिसके बाद एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को खासतौर पर निशाना बनाता था। गरीब परिवारों के सदस्यों को दूसरे राज्यों में ले जाया जाता, और वहां आकर्षक नौकरी का लालच देकर उनकी किडनी निकलवा ली जाती। यह सुनकर ही रूह कांप जाती है कि कैसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके शरीर के अंगों का सौदा किया जा रहा था।
रेट चार्ट देखकर पुलिस भी रह गई हैरान
पूछताछ के दौरान पुलिस को रसेल के पास से एक रेट चार्ट भी बरामद हुआ। इसके अलावा उसके पास कई राज्यों के निजी अस्पतालों से जुड़े कागजात भी मिले, जिनमें यह लिखा था कि किस अस्पताल को कितने गुर्दों की जरूरत है। यह बरामदगी इस बात का साफ सबूत है कि यह पूरा कारोबार किसी छोटे-मोटे लेवल पर नहीं, बल्कि एक संगठित और सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था।
यह जानकारी हर आम इंसान के लिए एक चेतावनी की तरह भी है। नौकरी के लालच में या पैसों की तंगी की वजह से अनजान लोगों के झांसे में आना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, यह मामला इसकी बानगी भर है।
सीमावर्ती इलाकों में क्यों फल-फूल रहा है यह धंधा
जानकार बताते हैं कि भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में इस तरह के गिरोहों का सक्रिय होना कोई नई बात नहीं है। सीमा पार आवाजाही आसान होने की वजह से तस्कर आसानी से दोनों देशों के बीच अपना नेटवर्क खड़ा कर लेते हैं। फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऐसे लोग भारत में लंबे समय तक बिना किसी शक के रह लेते हैं, जैसा कि रसेल के मामले में भी सामने आया।
इस तरह के गिरोह अक्सर स्थानीय बिचौलियों का सहारा लेते हैं, जो गांव-देहात में घूमकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पहचान करते हैं। प्रभास मंडल की भूमिका भी कुछ इसी तरह की बताई जा रही है, जो स्थानीय स्तर पर पीड़ितों तक पहुंच बनाने का काम करता था।
Bengal Crime News: अब अदालत में होगी रसेल की पेशी
फिलहाल रसेल से दक्षिण बिधाननगर पुलिस स्टेशन में पूछताछ जारी है। पुलिस उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल है, और यह कारोबार किस स्तर तक फैला हुआ है। उसे आज ही बिधाननगर अदालत में पेश किया जाना है, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। पुलिस की कोशिश अब यह भी है कि गिरोह के बाकी सदस्यों और सीमा पार बैठे उसके साथियों तक पहुंचा जाए, ताकि यह पूरा नेटवर्क जड़ से खत्म किया जा सके।
पश्चिम बंगाल में सामने आया यह किडनी तस्करी मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी की खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि इंसानी अंगों का काला कारोबार किस हद तक संगठित हो चुका है। रसेल अहमद की गिरफ्तारी और उसके पास से मिला रेट चार्ट इस बात की तस्दीक करता है कि गरीब और मजबूर परिवारों को निशाना बनाकर चलने वाला यह धंधा सरहद पार तक फैला हुआ है। पुलिस की पूछताछ में आगे और भी नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को कब तक और कितनी गहराई तक खंगाल पाती हैं।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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