Bhopal Farmers Protest 2026: भोजताल कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले 78 से अधिक गांवों के किसानों ने अपनी कृषि भूमि के भू-उपयोग में प्रस्तावित बदलाव के खिलाफ आवाज उठाई है। भारतीय किसान संघ की तहसील हुजूर इकाई के बैनर तले किसान शुक्रवार को शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित बदलाव पर आपत्ति दर्ज कराई। किसानों का कहना है कि जमीन को कृषि श्रेणी से हटाकर अन्य उपयोग में बदलने से उनकी खेती और आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है।
तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा समेत अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में दोपहर करीब 12 बजे पहुंचे किसानों ने मांग की कि उनकी जमीन का उपयोग कृषि ही रखा जाए। उन्होंने कहा कि कैचमेंट से जुड़े प्रावधानों का सीधा संबंध किसानों के अधिकारों और रोजमर्रा की खेती से है, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले उनकी स्थिति और आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
भोजताल कैचमेंट में भू-उपयोग बदलाव के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन
किसानों ने टीएंडसीपी कार्यालय के सामने इकट्ठा होकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पीढ़ियों से इन जमीनों पर खेती हो रही है और यही उनकी आय का मुख्य स्रोत है। अगर भू-उपयोग बदल दिया गया तो खेती जारी रखने में अड़चनें आ सकती हैं और परिवारों के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज्ञापन में उन्होंने बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 के प्रस्ताव को हटाने तथा कृषि भूमि का मौजूदा स्वरूप बरकरार रखने की मांग रखी।
किसान संगठनों का कहना है कि भोजताल का संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर उन इलाकों की जमीन पर प्रतिबंध लगाने से पहले प्रभावित किसानों की राय ली जानी चाहिए। कई किसानों ने बताया कि वे पहले से ही कैचमेंट के नियमों का पालन कर रहे हैं और जमीन पर अतिरिक्त निर्माण नहीं करते, फिर भी नए प्रस्ताव से उन्हें डर है कि खेती पर असर पड़ेगा।
1995 के मास्टर प्लान से अब तक कृषि भूमि पर उठ रहे सवाल
किसानों के अनुसार वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में उनकी जमीन का भू-उपयोग कृषि दर्ज था। बाद में 2031 के ड्राफ्ट प्लान में भी यही स्थिति बनी रही। अब नए प्रस्ताव में बदलाव की बात हो रही है, जिससे उन्हें आशंका है कि जमीन को व्यावसायिक या अन्य श्रेणियों में शामिल कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर पुराने प्लान में कृषि का प्रावधान था तो बिना उचित प्रक्रिया और प्रभावित लोगों की सुनवाई के बदलाव नहीं होना चाहिए।
भोजताल यानी बड़ा तालाब भोपाल की पानी आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसका कैचमेंट क्षेत्र कई गांवों में फैला है। यहां ज्यादातर जमीन कृषि उपयोग में है। किसानों का तर्क है कि लंबे समय से खेती हो रही जमीन पर अचानक प्रतिबंध लगाने से न केवल उनकी आय घटेगी बल्कि स्थानीय खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की है कि किसी भी अंतिम फैसले से पहले ग्राम स्तर पर चर्चा और आपत्तियों की सुनवाई की जाए।
बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 क्या हैं और किसानों की मुख्य चिंताएं
मास्टर प्लान में जमीन के अलग-अलग उपयोग के लिए विभिन्न जोन तय किए जाते हैं। बीआईजेड-1 और बीआईजेड-2 भोजताल के संरक्षण से जुड़े जोन माने जाते हैं। किसानों की चिंता यह है कि इन जोनों में उनकी जमीन शामिल होने से खेती, मकान बनाने या छोटे-मोटे काम करने पर पाबंदियां लग सकती हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन पर वे सालों से अनाज उगा रहे हैं, उसे अन्य श्रेणी में डालने से पहले उनके हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कई किसान परिवारों की पूरी आजीविका इन्हीं खेतों पर निर्भर है। अगर जमीन का उपयोग सीमित हो गया तो न केवल फसल उगाना मुश्किल होगा बल्कि जमीन की कीमत और भविष्य की योजनाओं पर भी असर पड़ेगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन संरक्षण और खेती दोनों को साथ चलाने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जमीन पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है तो उसके बदले उचित व्यवस्था या मुआवजे की बात भी होनी चाहिए।
आजीविका और खेती पर संभावित असर
किसानों का कहना है कि कृषि ही उनकी आय का प्रमुख साधन है। अगर जमीन को दूसरी श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। कई गांवों में छोटे और मध्यम किसान हैं जिनके पास दूसरी कमाई का साधन नहीं है। ऐसे में भू-उपयोग बदलने से रोजगार, स्कूल-कॉलेज की फीस और रोजमर्रा के खर्च प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कैचमेंट क्षेत्र में पहले से ही कई नियम लागू हैं और वे उनका पालन कर रहे हैं। फिर भी नए प्रस्ताव से उन्हें डर है कि खेती जारी रखने में बाधा आएगी। किसान संघ के पदाधिकारियों ने प्रभावित किसानों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर सभी किसान एक साथ अपनी आपत्ति दर्ज कराते हैं तो विभाग को उनकी बात सुननी पड़ेगी।
ज्ञापन सौंपने के बाद आगे की मांगें
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग जमीन के कृषि उपयोग को बनाए रखना और प्रस्तावित बदलाव पर पुनर्विचार करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले उनकी आपत्तियों पर सुनवाई की जाए ताकि भोजताल कैचमेंट के गांवों के कृषि आधारित परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो। अब इस मामले में संबंधित विभाग के रुख पर नजर रहेगी।
किसान संगठनों ने कहा कि वे आगे भी अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से बात करेंगे और जरूरत पड़ी तो और बड़े स्तर पर आवाज उठाएंगे। भोजताल का महत्व शहर की पानी आपूर्ति और पर्यावरण के लिहाज से स्पष्ट है, लेकिन कैचमेंट में रहने वाले किसानों की आजीविका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। संतुलित फैसला दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए, ऐसा किसानों का मानना है।
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