Bihar Chunav: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा से ठीक पहले, सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन की एकजुटता के दावों पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब पश्चिम चंपारण के बेतिया में बीजेपी और जेडीयू के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। एक सरकारी योजना का श्रेय लेने को लेकर हुआ यह विवाद इतना बढ़ा कि स्थानीय बीजेपी विधायक के सामने ही दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस घटना ने चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर की जमीनी खींचतान को सतह पर ला दिया है।
‘यह काम हमने कराया है’, श्रेय लेने पर हुआ विवाद
यह पूरा विवाद बेतिया में एक नई सड़क के उद्घाटन समारोह के दौरान हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय बीजेपी विधायक और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं। जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, जेडीयू के स्थानीय कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में नारेबाजी करने लगे। उन्होंने दावा किया कि यह सड़क राज्य सरकार की योजना का हिस्सा है और इसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाता है। इस पर, बीजेपी के कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘डबल इंजन’ सरकार और स्थानीय विधायक की देन बताया।
विधायक के सामने ही हुई तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की
देखते ही देखते, श्रेय लेने की यह होड़ तीखी बहस में बदल गई। दोनों दलों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में जोरदार नारे लगाने लगे। माहौल इतना गरमा गया कि दोनों गुट आमने-सामने आ गए और उनके बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। यह सब कुछ बीजेपी विधायक रेणु देवी के सामने ही होता रहा। बाद में, मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और पुलिस ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया।
पर्दे के पीछे टिकट और वर्चस्व की लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह झड़प सिर्फ एक सड़क का श्रेय लेने के लिए नहीं थी, बल्कि इसके पीछे विधानसभा चुनाव के टिकट और अपने-अपने दल के वर्चस्व की लड़ाई है। बेतिया बीजेपी की परंपरागत सीट है, लेकिन जेडीयू भी आस-पास की सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है। इस तरह के शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से, दोनों दलों के स्थानीय नेता टिकट बंटवारे से पहले आलाकमान पर अपने प्रभाव का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
Bihar Chunav: एकजुटता के दावों पर उठे सवाल
एक तरफ जहां पटना और दिल्ली में एनडीए के बड़े नेता ‘ऑल इज वेल’ और एकजुट होकर चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेतिया जैसी घटनाएं जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच गहरे मतभेद को उजागर कर रही हैं। यह घटना विपक्ष के उन आरोपों को बल देती है कि एनडीए एक ‘सुविधा का गठबंधन’ है, जिसके नेता और कार्यकर्ता एकजुट नहीं हैं।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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