BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में सितंबर 2026 में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सात साल के लंबे अंतराल के बाद शी जिनपिंग भारत पहुंचे, इससे पहले वे 2019 में महाबलीपुरम में हुए अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान भारत आए थे। करीब 40 से 45 मिनट तक चली इस बातचीत को दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे सुधर रहे रिश्तों की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह मुलाकात सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे गहरे मतभेदों को वाकई बदल पाएगी, या फिर यह सिर्फ प्रतीकात्मक कूटनीतिक भाव भर है। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए इसकी पृष्ठभूमि, मुलाकात में हुई बातचीत और आगे की संभावित दिशा पर विस्तार से नजर डालना जरूरी है।
BRICS Summit 2026: गलवान झड़प से नई दिल्ली तक का सफर
भारत-चीन संबंधों की मौजूदा तस्वीर समझने के लिए 2020 में लौटना जरूरी है, जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। इस घटना ने दोनों देशों के रिश्तों को लगभग जमा दिया था। उच्च स्तरीय संपर्क थम गए, सीधी उड़ानें बंद हो गईं, वीजा प्रक्रिया मुश्किल हो गई और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
इसके बाद 2024 में रूस के कजान शहर में हुए BRICS समिट के दौरान मोदी और शी की मुलाकात ने रिश्तों को नई शुरुआत दी। 2025 में तियानजिन में हुए SCO समिट के दौरान दूसरी मुलाकात ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। अब 2026 में नई दिल्ली में हुई तीसरी मुलाकात को कई विश्लेषक भारत-चीन संबंधों के एक नए स्तर की ओर बढ़ने का संकेत मान रहे हैं।
इस दौरान दोनों देशों ने संस्थागत संवाद फिर शुरू किए और सैन्य स्तर पर भी कुछ समझौते हुए। द्विपक्षीय व्यापार 2025 में लगभग 155 अरब डॉलर तक पहुंच गया, हालांकि इसमें भारत का घाटा काफी बड़ा बना हुआ है। उड़ानें धीरे-धीरे फिर शुरू हो रही हैं और आपसी जनसंपर्क बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। शी जिनपिंग की चौबीस घंटे की भारत यात्रा और उनके लिए किए गए लाल कालीन स्वागत ने सार्वजनिक तौर पर रिश्तों में आई गर्माहट को साफ जाहिर किया।
शिखर वार्ता में क्या-क्या तय हुआ
दोनों नेताओं ने पिछली मुलाकातों के बाद हुई प्रगति का स्वागत करते हुए यह सहमति जताई कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। इस दौरान यह भी कहा गया कि आपसी मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर तीन म्यूचुअल्स यानी परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित पर खास जोर दिया।
सीमा पर शांति और स्थिरता को मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के विकास का जरूरी आधार बताया। उन्होंने मौजूदा समझौतों और आपसी समझ के पालन की जरूरत को भी दोहराया। दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने की प्रतिबद्धता जताई, जो समग्र संबंधों और दोनों देशों की जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर हो।
बातचीत के दौरान व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संपर्क और लोगों की आवाजाही बढ़ाने पर भी सहमति बनी। व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं और बाजार पहुंच के मुद्दों को सुलझाने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की बात भी सामने आई।
मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया, जबकि आने वाले 2027 में BRICS की अध्यक्षता चीन के पास रहेगी। चीनी पक्ष की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं, और एक-दूसरे का विकास खतरा नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
सीमा विवाद पर कितनी बनेगी सहमति

भारत-चीन संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दा अब भी सीमा विवाद ही है। मुलाकात के बाद जारी बयानों में भी दोनों देशों के नजरिए में अंतर साफ नजर आया। भारत का रुख यह है कि सीमा पर शांति बने रहना संबंधों के आगे बढ़ने की पहली शर्त है, जबकि चीन का कहना है कि संबंधों और सीमा समाधान को साथ-साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
हाल के महीनों में स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स स्तर की वार्ता भी हुई है, जिसमें कम विवादास्पद क्षेत्रों की पहचान करने और सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। इस दौरान नई सैन्य हॉटलाइन और बैठक बिंदु भी तय किए गए हैं। मौजूदा मुलाकात के बाद सीमा पर तनाव कम रखने और पहले से हुए समझौतों का पालन करने की दिशा और मजबूत हुई नजर आ रही है।
फिर भी सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी दूर की बात लगती है, क्योंकि दोनों देशों की सेनाएं लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC पर अब भी तैनात हैं। छोटी-मोटी घटनाओं की आशंका बनी रह सकती है, लेकिन बड़े स्तर के टकराव से बचने की इच्छा दोनों पक्षों में साफ दिखाई दे रही है। अगर विश्वास इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में कुछ इलाकों में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर और समझौते संभव हो सकते हैं।
व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा
आर्थिक मोर्चे पर देखा जाए तो भारत-चीन व्यापार पहले से ही बढ़ता जा रहा है, और चीन इस समय भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना हुआ है। मुलाकात के दौरान संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला और बाजार तक पहुंच के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
इससे भारतीय कंपनियों को चीनी बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, साथ ही कुछ क्षेत्रों में चीनी निवेश को लेकर प्रक्रिया आसान होने की भी संभावना बन रही है। लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ने से पर्यटन, छात्र आदान-प्रदान और व्यावसायिक यात्राओं में भी इजाफा हो सकता है, जबकि उड़ानों और वीजा प्रक्रिया में और ढील मिलने की उम्मीद भी बनी हुई है।
हालांकि इसके साथ ही भारत आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण पर अपना जोर बनाए रखेगा। चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की कोशिशें आगे भी जारी रहने की संभावना है, और कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश की जांच पहले जितनी ही कड़ी बनी रह सकती है। कुल मिलाकर आर्थिक रिश्ते आगे और गहरे तो होंगे, लेकिन इसमें सतर्कता का पहलू बरकरार रहेगा।
बहुपक्षीय मंचों पर इसका क्या मतलब निकलता है
BRICS के मंच पर भारत और चीन दोनों साथ खड़े नजर आते हैं। भारत की अध्यक्षता में हुआ सफल शिखर सम्मेलन और आने वाले समय में चीन की अध्यक्षता, दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक और मौका बन सकती है।
ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों, विकास वित्त, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार बाधाओं जैसे विषयों पर दोनों देशों की आवाज मिलकर सामने आ सकती है। अमेरिका के साथ भारत और चीन, दोनों के अपने-अपने संबंध जटिल बने हुए हैं, ऐसे में यह गर्मजोशी दोनों देशों को वैश्विक मंच पर कुछ राहत की सांस देने वाली साबित हो सकती है।
फिर भी भारत क्वाड, इंडो-पैसिफिक और अन्य मंचों पर अपनी मौजूदा रणनीति जारी रखेगा, जबकि चीन पाकिस्तान के साथ अपने गहरे रिश्तों को भी बनाए रखेगा। यह बुनियादी अंतर आसानी से मिटने वाला नहीं है, चाहे द्विपक्षीय स्तर पर कितनी भी गर्मजोशी क्यों न दिखे।
आगे की राह में कौन-सी चुनौतियां बरकरार हैं
भारत-चीन संबंधों के आगे बढ़ने के बावजूद कई चुनौतियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं। सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी भी एक लंबी प्रक्रिया है, और व्यापार घाटा भारत के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।
चीन की तथाकथित स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति और पड़ोसी देशों में उसका बढ़ता प्रभाव भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाता है। इसके अलावा दोनों देशों की घरेलू राजनीति भी आपसी रिश्तों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। विश्वास की कमी अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए निकट भविष्य में किसी बड़े और अचानक बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
BRICS Summit 2026, भविष्य की दिशा: सतर्क आशावाद की नीति
मोदी-शी मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को स्थिर रखने और धीरे-धीरे आगे बढ़ाने का माहौल जरूर बनाया है। सीमा पर शांति बनाए रखना, व्यापार को संतुलित करना, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करना, ये सभी क्षेत्र आगे बढ़ने की संभावना रखते हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद कम है, क्योंकि भारत और चीन एक-दूसरे को साझेदार और प्रतिद्वंद्वी, दोनों रूपों में देखते रहेंगे।
यह मुलाकात रिश्तों को पूरी तरह रीसेट करने के बजाय उन्हें सावधानी से मैनेज करने की दिशा में उठाया गया कदम ज्यादा लगती है। अगर मौजूदा समझौतों का पालन होता रहा, संवाद की प्रक्रिया जारी रही और छोटी-छोटी उपलब्धियां लगातार जुड़ती रहीं, तो संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ सकते हैं।
दोनों देशों की मिलाकर करीब 280 करोड़ आबादी और वैश्विक स्तर पर उनकी अहमियत को देखते हुए, स्थिर संबंध पूरे क्षेत्र और दुनिया, दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे। हालांकि इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और यथार्थवादी सोच बेहद जरूरी होगी।
संक्षेप में कहा जाए तो BRICS समिट के दौरान हुई यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक गति बनाए रखने का काम जरूर करेगी। बड़े बदलाव एक ही झटके में आने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, लेकिन दिशा सही तय की गई है।
आगे की राह अब दोनों पक्षों की इच्छाशक्ति, आपसी विश्वास और जमीनी हकीकत पर निर्भर करेगी, और यही तय करेगा कि यह सुधार टिकाऊ साबित होता है या फिर सिर्फ एक कूटनीतिक पड़ाव बनकर रह जाता है।
Read More Here:-
राजस्थान निकाय चुनाव नतीजे, भाजपा कई नगर निगमों में आगे, कांग्रेस को बीकानेर-अजमेर में बढ़त
आफ्टरमार्केट सीएनजी किट लगवाने से पहले जान लें फायदे-नुकसान, वारंटी और आरटीओ नियम
IIT JAM 2026 आवेदन शुरू, 12 अक्टूबर तक भरें फॉर्म, परीक्षा 14 फरवरी को
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

